
यूपी के ‘छोटे’ उद्यमियों के सपनों को लगेंगे ‘बड़े’ पंख, 1800 करोड़ का मिला ग्रोथ फंड
केंद्रीय बजट से यूपी के ‘छोटे’ उद्यमियों के सपनों को ‘बड़े’ पंख लग सकेंगे। केंद्र से 1800 करोड़ का ग्रोथ फंड मिला है। इससे एमएसएमई की 96 लाख इकाइयों को लाभ मिल सकेगा। आने वाले वर्षों में उद्यमों के लिए सुरक्षा घेरा बढ़ेगा। निर्यात बढ़ाने में सहायक होंगे।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के क्षेत्र में शीर्ष पर चल रहे यूपी के छोटे उद्यमियों के सपनों को अब बड़े पंख लगेंगे। केंद्रीय बजट में एमएसएमई को सशक्त बनाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई ग्रोथ फंड स्थापित किए जाने की घोषणा इसका आधार बनेगी। ग्रोथ फंड के तहत यूपी के हिस्से लगभग 1800 करोड़ रुपये आएंगे। इससे प्रदेश की 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में खासकर सूक्ष्म उद्यमों को सर्वाधिक लाभ होगा। छोटे उद्यमों की ग्रोथ से निर्यात को भी और रफ्तार मिलेगी। आर्थिक विकास में अपनी खास भूमिका निभा रहे एमएसएमई के उच्च संभावना वाले उद्यमों को यूपी में आने वाले समय में और बड़ा स्वरूप मिल सकेगा।
खासकर ओडीओपी की इकाई चला रहे छोटे उद्यमियों के लिए विशेष छूट से बेहतर भविष्य की राह तय करेगी। एसएमई ग्रोथ फंड से अब नवाचार, गुणवत्ता, निवेश, रोजगार सृजन व वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे मानकों पर बेहतर काम कर रहे उद्यमों को एक्विटी सहायता मिलेगी। इन उद्यमों के लिए बड़ी आर्थिक गतिविधियों में शामिल होकर वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बनने का अवसर भी होगा।
साथ ही सरकार टियर-टू और टियर-थ्री शहरों में व्यावसायिक संस्थानों को ‘कार्पोरेट मित्र’ के रूप में विकसित करने में सहायता प्रदान करेगी। इससे उद्यमों को कम खर्च में जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी। एमएसएमई सेक्टर के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा का जो घेरा बनाने का प्रयास किया जा रहा है, उससे फर्मों के विस्तार और उनके निर्यात बाजारों में प्रवेश की राह भी आसान होगी। आत्मनिर्भर भारत फंड में 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी डाले जाने का निर्णय एमएसएमई सेक्टर की इकाइयों को आर्थिक सुरक्षा दिलाएगा। खासकर सूक्ष्म उद्यमों को जोखिम पूंजी उपलब्ध होगी। टी-रेड्स के माध्यम से छोटे उद्यमों को वित्तीय सहायता भी दी जाएगी।
बढ़ेगा जूतों का कारोबार
टैरिफ वार की मार झेल रहे यूपी के चमड़ा कारोबार को बड़ी राहत मिलेगी। चमड़े व सिंथेटिक लेदर जूते के निर्यातकों को अब अंतिम उत्पादों के निर्यात के लिए छह महीने के बजाय एक वर्ष का समय दिया जाएगा। यह उत्पादन चक्रों, कार्यशील पूंजी की बाधाओं और वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव से निपटने में उद्यमियों की मदद करेगा। केंद्रीय बजट में चमड़ा और जूता क्षेत्र के लिए शुल्क मुक्त आयात सुविधा का विस्तार भी किया गया है।
अब इसमें जूते के ऊपरी हिस्से भी शामिल होंगे, जिससे निर्माताओं के लिए उत्पादन लागत कम होगी और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगी। यूपी के लेदर निर्यात में 10 प्रतिशत से अधिक का उछाल आ सकता है। यूरोपीय संघ से हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से भी निर्यात बढ़ने की उम्मीद जागी है।
ई-कामर्स सुविधा को मिलेगा लाभ
पहल इंडिया फाउंडेशन के सहायक शोधकर्ता जशन कक्कड़ का कहना है कि कूरियर निर्यात पर प्रति खेप 10 लाख रुपये की मूल्य सीमा का हटाया जाना बड़ा कदम है। इससे छोटे व्यवसायों, कारीगरों व स्टार्टअप्स को ई-कामर्स चैनलों के माध्यम से वैश्विक बाजारों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। लघु व मध्यम उद्यम तथा छोटे निर्यातक अब उच्च मूल्य वाली वस्तुओं का आसानी से निर्यात कर सकते हैं, जो यूपी के निर्यात की ग्रोथ बढ़ाने में कारगर साबित होगा। एमएसएमई सेक्टर को इसका बड़ा लाभ मिलेगा।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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