कॉलेज-यूनिवर्सिटियों में आवारा कुत्तों से रक्षा के क्या हुए हैं इंतजाम? यूजीसी ने मांगी रिपोर्ट
यूपी में यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में आवारा कुत्तों से रक्षा के इंतजाम की रिपोर्ट मांगी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में 10 जुलाई तक सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों को अपनी ओर से कार्रवाई की जानकारी देनी होगी।

कुत्ते के काटने के मामलों में बढ़ोतरी का संज्ञान लेते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जैसे सार्वजनिक संस्थानों और अहम बुनियादी ढांचों वाले इलाकों से आवारा कुत्तों को तुरंत हटाएं। अब इसी के तहत आदेश का अनुपालन करते हुए यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में आवारा कुत्तों से रक्षा के इंतजाम की रिपोर्ट मांगी है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को परिसरों में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किए गए उपायों की जानकारी मांगी है। जिन उच्च शिक्षण संस्थानों ने अभी तक इस संबंध में अपनी रिपोर्ट नहीं भेजी है, उन्हें हर हाल में 10 जुलाई तक निर्धारित प्रारूप में जानकारी उपलब्ध करानी होगी।
यूजीसी ने इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और महाविद्यालयों के प्राचार्यों को पत्र जारी किया है। यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट के सात नवंबर 2025 के आदेश के अनुपालन में दिए गए हैं। यह आदेश स्वत: संज्ञान याचिका मामले में पारित किया गया था। यूजीसी ने अपने पत्र में कहा है कि इस संबंध में पहले भी 18 दिसंबर और 15 अप्रैल 2026 को परामर्श (एडवाइजरी) जारी की जा चुकी है। ये परामर्श शिक्षा मंत्रालय से प्राप्त निर्देशों और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में जारी किए गए थे।
इनमें सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को परिसर में आवारा कुत्तों के प्रवेश की रोकथाम और सुरक्षा व्यवस्था के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था। आयोग ने कहा है कि पहले जारी किए गए निर्देशों के बावजूद कुछ उच्च शिक्षण संस्थानों ने अब तक आवश्यक जानकारी निर्धारित लिंक के माध्यम से उपलब्ध नहीं कराई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को लागू करने की जिम्मेदारी स्थानीय सरकारी निकायों को सौंपी गई है। उन्हें आवारा कुत्तों को पकड़ना होगा, उनका टीकाकरण और नसबंदी करनी होगी (इसके लिए 'एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स' का पालन करना होगा) और फिर उन्हें तय शेल्टर में भेजना होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से इसके लिए जिम्मेदार होंगे। कोर्ट ने साफ किया कि ऐसी जगहों से हटाए गए कुत्तों को उन्हीं इलाकों में वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का मकसद ही बेकार हो जाएगा।


