
बुर्का पहनकर कॉलेज पहुंचीं दो युवतियों को नहीं मिली एंट्री, दीवाली एग्जबिशन के दौरान मचा बवाल
मेरठ में एक कॉलेज में समाजशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित एक प्रदर्शनी में बुर्का पहनकर आई दो बाहरी युवतियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कॉलेज की छात्राएं न होने के बावजूद, युवतियां प्रदर्शनी में स्टॉल लगाना चाहती थीं। विवाद तब और बढ़ गया जब उन्हें बुर्का उतारकर प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए कहा गया।
यूपी के मेरठ के एक इस्माईल नेशनल महिला पीजी कॉलेज में शुक्रवार को समाजशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित प्रदर्शनी में दो युवतियों के बुर्के में आने को लेकर विवाद हो गया। बुर्का पहनकर कॉलेज में आईं दोनों युवतियां कॉलेज की छात्रा नहीं थीं। वह इस प्रदर्शनी में स्टाल लगाना चाहती थी। विवाद तब बढ़ा जब दोनों युवतियों को चेंजिंग रूम में बुर्का उतार कर प्रदर्शनी में शामिल होने के लिए कहा गया। उनके अभिभावक भी साथ थे। बाद में कॉलेज प्रबंधन के समझाने पर दोनों युवतियां अपना सामान लेकर कॉलेज के बाहर चली गईं।

समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्षा डॉ. दीप्ति कौशिक का कहना है कि प्रदर्शनी विभागीय छात्राओं की थी। उनके हुनर का प्रदर्शन किया गया। हर धर्म की छात्राएं प्रदर्शनी में मौजूद थी। दोनों युवतियों को समझाया जा रहा था कि यह विभागीय प्रदर्शनी है न कि प्रोफेशनल प्रदर्शनी। कॉलेज में बुर्का पहनकर आने पर रोक नहीं है, लेकिन किसी भी प्रोग्राम व कक्षा में पढ़ने के लिए छात्राएं चेजिंग रूम में बुर्का उतारकर यूनिफार्म में होने के बाद पढ़ाई करती हैं।
इस मामले में प्रधानाचार्या प्रो. अनीता राठी का कहना है कि कॉलेज में नियम है कि छात्राएं कालेज में बुर्का पहनकर आती हैं, लेकिन चेजिंग रूम में बुर्का बदलकर यूनिफार्म में ही कक्षा में पढ़ती हैं। सुरक्षा की दृष्टि से भी कई बार कुछ नियम बनाने होते हैं। हर साल कॉलेज में दीपावली के अवसर पर समाजशास्त्र विभाग द्वारा मेले का आयोजन किया जाता है। इसमें सभी छात्राएं अपने हाथों से बनाए गए सामान की प्रदर्शनी लगाती हैं। इस मेले में विभिन्न तहत के स्टॉल लगाए गए हैं। वहीं, कॉलेज की चीफ प्रॉक्टर डॉ. दीप्ति कौशिक ने बताया कि दीपावली मेला कॉलेज की छात्राओं के लिए ही आयोजित किया गया था। बाहरी लोगों को बिना अनुमति प्रवेश देना सुरक्षा नियमों के खिलाफ है।





