यूपी में टीले की खुदाई में निकला 'खजाना', सिक्कों से भरा मटका लेकर भागा जेसीबी ड्राइवर

Jan 24, 2026 04:01 pm ISTDinesh Rathour बदायूं (ककराला)
share Share
Follow Us on

बदायूं में तालाब पाटने के लिए हो रही टीले की खुदाई के दौरान जमीन से खजाना निकल आया। मिट्टी की खुदाई जेसीबी से की जा रही थी। जेसीबी चालक की नजर जैसे ही खजाने भरे मटके पर पड़ी तो वह जेसीबी को वहीं छोड़ दिया।

यूपी में टीले की खुदाई में निकला 'खजाना', सिक्कों से भरा मटका लेकर भागा जेसीबी ड्राइवर

यूपी के बदायूं में तालाब पाटने के लिए हो रही टीले की खुदाई के दौरान जमीन से खजाना निकल आया। मिट्टी की खुदाई जेसीबी से की जा रही थी। जेसीबी चालक की नजर जैसे ही खजाने भरे मटके पर पड़ी तो वह जेसीबी को वहीं छोड़ दिया और मटका लेकर भागने लगा। इसी बीच खजाना मिलने की बात पूरे गांव में फैल गई। जेसीबी मालिक भी मौके पर पहुंचा और दोनों के बीच खजाना बंटवारे को लेकर मारपीट शुरू हो गई। जहां पर खुदाई का काम चल रहा था वहीं पर कुछ बच्चे भी पहुंचे, जिन्हें भी सिक्के मिलने की बात सामने आई है। पुलिस पूरे मामले की जांच-पड़ताल में जुटी है।

अलापुर थाना क्षेत्र के ककराला कस्बे के फरीदपुर–आसपुर मार्ग स्थित टीले (खेरे) पर तालाब पाटने के लिए अवैध खनन किया जा रहा था। गुरुवार दोपहर खेरे से मिट्टी निकालकर फरीदपुर मार्ग स्थित अंतामई तालाब में डाला जा रहा था। इसी दौरान जेसीबी चालक को एक मटकी दिखाई दी, जिसमें तुगलक कालीन होने के दावे के साथ चांदी के प्राचीन सिक्के बताए जा रहे हैं, जिन पर अरबी भाषा में लिखावट है। मटकी दिखते ही चालक जेसीबी छोड़कर फरार हो गया।

जानकारी मिलने पर जेसीबी मालिक बदायूं स्थित मंडी समिति के पास पहुंचा, जहां सिक्कों के बंटवारे को लेकर दोनों में कहासुनी और झगड़ा हुआ। इसके बाद मंडी पुलिस चौकी पर तहरीर दर्ज कराई गई। उधर, टीले पर खेल रहे कुछ बच्चों को भी सिक्के मिले। खजाना तलाशने की चर्चा फैलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए। कुछ युवकों को खुदाई करते देखा गया, जिन्होंने सिक्के दिखाने से इंकार किया। मौके से लगभग दर्जन भर सिक्कों की पुष्टि हुई है, जबकि कुछ सूत्र 200 से अधिक सिक्कों की संख्या बता रहे हैं।

सूचना मिलने पर ककराला पुलिस चौकी के पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और स्थिति संभालते हुए जांच शुरू की। हालांकि अब तक अलापुर थाने में कोई औपचारिक शिकायत नहीं दर्ज हुई है। सिक्कों के मिलने के बावजूद पुरातत्व विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक जांच नहीं की गई है, जिससे उनके काल और धातु का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। वहीं, अवैध खनन के कारण प्राचीन टीले को भी नुकसान पहुंच कर गायब किया जा रहा है।

अंग्रेजों का आराम स्थल और ऐतिहासिक गांव

स्थानीय लोगों के अनुसार ककराला का खेरा टीला ऐतिहासिक महत्व रखता है। बताया जाता है कि अंग्रेजी शासन के समय यह टीला सराय के रूप में इस्तेमाल होता था, यानी अंग्रेज अफसर यहां आराम किया करते थे। इसके आसपास एक समय में एक संपन्न गांव भी बसता था, जहां लोग अपने घर-द्वार और खेती-बाड़ी के साथ रहते थे। ग्रामीण इसे अपने इलाके की गौरवशाली धरोहर मानते हैं और इसे संरक्षित करने की आवश्यकता बताते हैं।

खेरे की खुदाई में फिर उठी खजाने की चर्चा

स्थानीय लोगों के अनुसार खेरे की खुदाई में कई बार मिट्टी के बर्तन और सिक्के मिले हैं, जिससे कस्बे में खजाने को लेकर कौतुहल बना हुआ है। हाल ही में खुदाई में बच्चों को तुगलक और बहादुरशाह कालीन सिक्के मिले, जिससे लोगों में मची हलचल ने हड़कंप जैसा माहौल बना दिया। अनुमान है कि मौके पर सैकड़ों सिक्के होने की संभावना है।

तुगलक कालीन सिक्कों पर लिखाबट में छिपा इतिहास

तुगलक कालीन सिक्कों पर लिखाबट नासिर-अमीरुल मोमिनीन है, एक उपाधि जो दिल्ली सल्तनत के शक्तिशाली सुल्तानों जैसे इल्तुतमिश और बलबन द्वारा धारण की जाती थी। इसका अर्थ 'विश्वासियों के सेनापति का सहायक' है, जो खलीफा से मिली वैधता और शक्ति को दर्शाता था। तुगलक वंश के अंतिम सुल्तान नासिर-उद-दीन महमूद शाह तुगलक के शासनकाल में यह नाम इस्तेमाल हुआ। यह उपाधि सल्तान की शक्ति और इस्लामी दुनिया से मान्यता का प्रतीक थी और तैमूर के आक्रमण के समय वंश के पतन का ऐतिहासिक संकेत भी देती है।

मुगलकालीन हज सिक्कों में दर्ज है दिल्ली की टक्साल और हिजरी वर्ष

स्थानीय बुजुर्ग और जानकारों के अनुसार दूसरा सिक्का अरबी–फारसी मिश्रित वाक्यांशों वाला मुगलकालीन सिक्का लगता है, संभवतः बहादुर शाह जफर के समय का। सिक्के पर लिखा है "जर्ब हज अल सिक्का बा हजरत दिल्ली", जिसका अर्थ है कि इसे दिल्ली की टक्साल में ढाला गया पवित्र सिक्का। हिजरी वर्ष "फी संह असनी वा असरैन वा सबमाया" दर्शाता है, जो 1222 हिजरी (1807–1808 ईस्वी) के समय का है। इसे आमतौर पर हज यात्रियों के लिए जारी किया गया ‘हज सिक्का’ माना जाता है।

यह बोली पुलिस

अलापुर थाने में तैनात प्रभारी निरीक्षक माधव सिंह बिष्ट ने बताया कि सिक्के मिलने की जानकारी मिली है, ककराला पुलिस चौकी इंचार्ज ने लोगों से 7 सिक्के बरामद किए हैं जिन्हें जांच के लिए पुरातत्व विभाग को भेजा जाएगा और पूरे मामले की जांच की जा रही है। वहीं, मंडी पुलिस चौकी पर तहरीर देने के मामले में सिविल लाइंस कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक हरेंद्र सिंह ने कहा कि ऐसी कोई तहरीर उनके संज्ञान में नहीं आई और ना ही उन्हें कोई मामला प्राप्त हुआ है।

Dinesh Rathour

लेखक के बारे में

Dinesh Rathour

दिनेश राठौर लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पिछले आठ सालों से काम कर रहे हैं। वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। कानपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। पत्रकारिता में 13 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश की डिजिटल मीडिया और प्रिंट जर्नलिज्म में अलग पहचान है। इससे पहले लंबे समय तक प्रिंट में डेस्क पर भी काम किया है। कुछ सालों तक ब्यूरो में भी रहे हैं। यूपी और राजस्थान के सीकर जिले में भी पत्रकारिता कर चुके हैं। यूपी की राजनीति के साथ सोशल, क्राइम की खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। वायरल वीडियो की फैक्ट चेकिंग में दिनेश को महारत हासिल है।

और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, बॉलीवुड न्यूज , बिजनेस न्यूज , क्रिकेट न्यूज पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करे| पाएं Lucknow news , Prayagraj News , Varanasi News , Gorakhpur News , Kanpur News , Aligarh News से जुड़ी ताजा खबरें हिंदी में |