यूपी के इस विभाग में बदली ट्रांसफर पॉलिसी, जिला बाहर तबादले पर नया आदेश

Ajay Singh विशेष संवाददाता, लखनऊ
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नई व्यवस्था में चिकित्सीय सेवाओं को प्रभावित न होने देने पर जोर दिया गया है। स्पष्ट किया गया है कि चिकित्सीय कार्यों में लगे डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों को सिर्फ सेवाकाल के आधार पर अनिवार्य रूप से बाहर भेजने की बाध्यता नहीं होगी। इससे तबादले को लेकर सशंकित डॉक्टरों, स्टाफ नर्सों को राहत मिली है।

यूपी के इस विभाग में बदली ट्रांसफर पॉलिसी, जिला बाहर तबादले पर नया आदेश

Transfer Policy : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में तबादला नीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। नई नीति के जरिए डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को काफी राहत दी गई है। अब चिकित्सीय कार्यों में लगे डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों का केवल सेवाकाल पूरा होने के आधार पर अनिवार्य रूप से जिला और मंडल से बाहर तबादला नहीं किया जाएगा। शासन ने इस संबंध में संशोधित आदेश जारी कर दिया है। इससे ट्रांसफर को लेकर चिंतित डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों ने बड़ी राहत महसूस की है।

अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष की ओर से मंगलवार को जारी आदेश में कहा गया है कि मुख्य चिकित्साधिकारी और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी यदि किसी जिले में तीन वर्ष तथा मंडल में पांच वर्ष से अधिक समय से तैनात हैं तो उनका तबादला किया जाएगा। इसी तरह संयुक्त निदेशक, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और चिकित्सा अधीक्षक यदि किसी जिले या मंडल में पांच वर्ष से अधिक समय से तैनात हैं तो उन्हें भी स्थानांतरित किया जाएगा। नई व्यवस्था में चिकित्सीय सेवाओं को प्रभावित न होने देने पर विशेष जोर दिया गया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि चिकित्सीय कार्यों में लगे डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों को सिर्फ सेवाकाल के आधार पर अनिवार्य रूप से बाहर भेजने की बाध्यता नहीं होगी। इससे तबादले को लेकर सशंकित डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को राहत मिल गई है।

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इन जिलों में विशेष व्यवस्था

सरकार ने आकांक्षी जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए विशेष व्यवस्था की है। चित्रकूट, चंदौली, सोनभद्र, फतेहपुर, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, श्रावस्ती और बहराइच समेत आठ आकांक्षी जिलों तथा 100 आकांक्षी विकासखंडों में सभी पदों पर तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन क्षेत्रों में तैनात कार्मिकों को दो वर्ष बाद विकल्प लेकर स्थानांतरित किया जाएगा। शासनादेश में यह भी कहा गया है कि मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन तैनात अधीक्षक और एमओआईसी को तीन वर्ष पूरा होने पर उसी जिले में अन्य स्थान पर तैनात किया जा सकेगा।

पूर्व तैनाती स्थल पर दोबारा तैनाती सिर्फ इस केस में संभव

वहीं गंभीर बीमारी की स्थिति में ही लिपिकीय और नर्सिंग स्टाफ को पूर्व तैनाती स्थल पर दोबारा तैनाती देने पर विचार किया जाएगा। सरकार ने प्रशासनिक आवश्यकता होने पर किसी भी समय तबादले करने का अधिकार सुरक्षित रखा है, लेकिन इसके लिए सक्षम स्तर से अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। बिना सक्षम स्तर से अनुमति लिए ऐसे तबादले नहीं होंगे। शासन ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को नई व्यवस्था का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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लेखक के बारे में

Ajay Singh

अजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।

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