
आज जमानत, कल घर छिनेगा फिर मार दिया जाएगा, कुलदीप सेंगर पर रेप पीड़िता का छलका दर्द
भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर की दरिंदगी का शिकार हुई पीड़िता ने लड़खड़ाती आवाज में रोते हुए कहा कि आज जमानत मिली है। कल घर छीन लिया जाएगा और फिर मार दिया जाएगा। कहा कि आदेश के वक्त वह मां के साथ कोर्ट में थी, विरोध किया पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को हाईकोर्ट से जमानत के बाद उन्नाव रेप कांड एक बार फिर चर्चा में है। फैसले के बाद पीड़िता और उसका परिवार बुरी तरह डरा हुआ है। फैसले के खिलाफ धरना देने की कोशिश भी की लेकिन पुलिस ने जबरिया उठा दिया। दिल्ली हाईकोर्ट के निर्णय के बाद रेप पीड़िता ने आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ से फोन पर बात की है। लड़खड़ाती आवाज में रोते हुए बोली-आज जमानत मिली है। कल घर छीन लिया जाएगा और फिर मार दिया जाएगा। आदेश के वक्त वह मां के साथ कोर्ट में थी, विरोध किया पर कोई सुनवाई नहीं हुई। कहा कि खुदकुशी करना चाहती हूं लेकिन बच्चों के लिए यह हिम्मत भी नहीं जुटा पाती हूं। मैं मर गई तो बच्चों का क्या होगा।
रेप पीड़िता ने बताया कि दिन में करीब ढाई बजे कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया। उस वक्त मां के साथ वह कोर्ट में मौजूद थी। कोर्ट के निर्णय का उन्होंने मां के साथ विरोध किया। बोली- हमारी कोई बात ही नहीं सुनी गई। पहले परिवार, पैरोकार और गवाहों की सुरक्षा हटाई गई, अब यह निर्णय हमारे लिए काल से कम नहीं है। पीड़िता ने बताया कि कुलदीप सेंगर और उसके परिवार से छिपकर साल 2023 में आजमगढ़ के युवक से शादी की।
बताया कि दिल्ली में पति के साथ रहती हूं। दो साल की बेटी और एक साल का बेटा है। दिव्यांग सास साथ रहती हैं। ससुर गांव में हैं। जहां कहीं जाती हूं, सुरक्षा साथ रहती है। परिवार की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। कुलदीप सेंगर के सलाखों से बाहर आने पर जीना हराम हो जाएगा। यहां तक कहा कि खुले में नहीं रह पाएंगे। सुरक्षा के लिए जेल में शरण लेंगे।
मार्च में आया था सुरक्षा हटाने का फैसला
रेप कांड मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पीड़िता, उसके परिजनों, गवाहों और वकील को सीआरपीएफ सुरक्षा मिली थी। केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सुरक्षा हटाए जाने की मांग की थी। केंद्र की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने दलीलें दी थीं कि मुकदमे का निर्णय हो चुका है। आरोपी पर दोष सिद्ध है। ऐसे में सीआरपीएफ सुरक्षा की जरूरत नहीं रह गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि दोषसिद्ध हो चुका है। सीआरपीएफ सुरक्षा हटाने का फैसला इसी साल मार्च में आया था।
दिल्ली में धरने पर बैठी पीड़िता को हटाया
उन्नाव दुष्कर्म कांड में हाईकोर्ट के फैसले के बाद महिला अधिकार कार्यकर्ता योगिता भयाना मंगलवार रात को इंडिया गेट के सामने धरने पर बैठ गईं। हालांकि कर्तव्य पथ पुलिस ने योगिता भयाना के साथ बैठीं दो अन्य महिलाओं को जबरन धरना स्थल से उठा दिया। इसके बाद उन्हें थाने ले जाने के बाद छोड़ दिया गया।
प्रधानी चुनाव के दौरान हुई रंजिश ने हंसते खेलते परिवार को तबाह किया
न्याय के लिए रेप पीड़िता की जंग सिर्फ अस्पताल के बेड तक ही सीमित नहीं रही। तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर से रंजिश ने हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद कर डाला। इसकी कीमत पीड़िता ने परिवार के चार अपनों की जान देकर चुकाई। हालात ऐसे हैं कि आज खौफ से रिश्तेदारों ने भी उसका साथ छोड़ दिया है।
माखी गांव के सराय थोक मोहल्ले में कुलदीप सिंह सेंगर और पीड़िता का घर अगल-बगल में है। जनचर्चाओं के मुताबिक, साल 2002 में प्रधानी के चुनाव से दोनों परिवारों में तकरार का बीज पड़ा। प्रधानी चुनाव में पीड़िता के ताऊ मैदान में उतरे। दूसरी ओर कुलदीप सेंगर की मां चुन्नी देवी चुनाव लड़ रही थीं। आरोप है कि कुलदीप ने पीड़िता के ताऊ के खिलाफ दर्ज पुराने मुकदमों को हथियार बनाकर उनकी उम्मीदवारी खारिज करवा दी। इसके बाद ताऊ ने अपने करीबी देवेंद्र सिंह की मां को चुनाव मैदान में उतारा। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों परिवारों में पहली बार खुलेआम हिंसा हुई। हथियार और गोलियां चलीं। कई लोग घायल हुए।
पुलिस ने कुलदीप के पक्ष के दबाव में पीड़िता के चाचा के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज कर दिया। इसी के बाद परिवार पर पहला कहर टूटा। पीड़िता के ताऊ की गांव में ही ईंट-पत्थरों से कूचकर हत्या कर दी गई। परिजनों ने तब भी हत्या का आरोप विधायक पर लगाया, पर कार्रवाई नहीं हुई। डर और दबाव से पीड़िता का चाचा फरार हो गया, जिसे 17 वर्ष बाद 2017 में दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था।
2017 में रंजिश ने खौफनाक मोड़ लिया : चार जून 2017 को पीड़िता ने आरोप लगाया कि कुलदीप सेंगर ने उसके साथ अपने घर में रेप किया। इसके बाद परिवार पर कहर टूट पड़ा। आरोप है कि कुलदीप के भाई अतुल सिंह ने साथियों के साथ मिलकर पीड़िता के पिता की बेरहमी से पिटाई की और उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने भी कुलदीप सेंगर का साथ दिया और पिता को आर्म्स एक्ट में जेल भेज दिया। दो दिन बाद जिला अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी। इस हादसे में पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई। चाची रेप केस में सीबीआई की अहम गवाह थीं। हादसे में पीड़िता भी गंभीर घायल हुई। डर के चलते कोई रिश्तेदार साथ देने को तैयार नहीं है।
तत्कालीन माखी एसओ व दरोगा हुए थे गिरफ्तार
पीड़िता के पिता की जेल में हत्या के मामले में गिरफ्तार कुलदीप सिंह सेंगर की अप्रत्यक्ष रूप से मदद करने वाले माखी के तत्कालीन थानेदार अशोक सिंह भदौरिया और दरोगा कामता प्रताप सिंह को सीबीआई ने 16 मई 2018 को गिरफ्तार किया था। उस वक्त सीबीआई के आईजी जीएन गोस्वामी ने प्रेस नोट जारी कर बताया था कि दोनों पर कार्रवाई की गई है। वहीं, दोनों आरोपितों सहित माखी थाने के छह पुलिसकर्मियों को एसआइटी की जांच के बाद निलंबित कर दिया गया था।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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