प्राइवेट स्कूल में 3 साल की बच्ची से गंदी हरकत, नाबालिग डांस टीचर पर रेप केस दर्ज
प्रयागराज के एक प्ले स्कूल में तीन साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न की घटना सामने आई है। बच्ची द्वारा प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत किए जाने पर मां ने जांच की तो वहां चोट देखकर सन्न रह गई। इस घटना का शक प्ले वे के एक नाबालिग डांस टीचर पर है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां कैंट क्षेत्र स्थित एक निजी प्ले स्कूल में तीन साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न की शिकायत उसके परिवार ने की है। आरोप स्कूल के नाबालिग डांस टीचर पर है। बच्ची की मां की तहरीर पर नाबालिग डांस टीचर के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज किया गया है। सोमवार को बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा।
कैंट थाना क्षेत्र स्थित एक निजी प्ले स्कूल में तीन साल की बच्ची जाती है। शनिवार को स्कूल से घर लौटने पर उसने मां से निजी अंग में दर्द की शिकायत की। मां ने जांच की तो बेटी की हालत देख सन्न रह गई। बच्ची के निजी अंग में चोट थी। वह परिजनों के साथ पहले स्कूल और फिर थाने पहुंची। शिकायत पर पुलिस स्कूल पहुंची और स्टाफ से पूछताछ के साथ सीसीटीवी कैमरे की फुटेज चेक कराई। बच्ची की बताई बातों और जांच में मिले साक्ष्यों से स्कूल का डांस टीचर शक के घेरे में आया।
डांस टीचर भी नाबालिग बताया जा रहा है। पुलिस ने बच्ची की मां से तहरीर लेकर उस डांस टीचर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। एसीपी सिविल लाइंस विद्युत गोयल ने बताया कि यौन उत्पीड़न की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। मेडिकल परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि हकीकत क्या है, बच्ची के निजी अंग में चोट कैसे पहुंची।
परिवार सन्न
तीन साल की मासूम बच्ची के साथ उसके ही प्ले स्कूल में यौन उत्पीड़न की बात सामने आने पर परिवार सन्न रह गया है। बच्ची भी इस घटना से हैरान और परेशान है। परिवार का कहना है कि उन्होंने विश्वास करके अपनी मासूम बच्ची को स्कूल में भेजा था लेकिन वहां उसके साथ इस तरह की घटना हो गई। परिवार चाहता है कि पुलिस इस मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई करे। इसके साथ ही परिवार अपनी बच्ची पर इस घटना के पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंतित है।
बच्चों को लेकर रहें सावधान
मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता की जागरूकता बढ़ी है लेकिन फिर भी यह एक ऐसा पहलू है कि हर वक्त सतर्क रहना जरूरी है। जानकारों का कहना है कि बच्चों को अपनी सुरक्षा और अधिकारों के बारे में उम्र के हिसाब से जानकारी देना जरूरी है। उन्हें यह भी सिखाना चाहिए कि माता-पिता से हर बात बताएं। खासकर वे बातें जो उन्हें असहज करती हैं। बच्चों के व्यवहार में परिवर्तन पर भी ध्यान देना चाहिए और इसकी वजह पता लगाने की कोशिश करनी चाहिए।


