औद्योगिक- आवासीय क्षेत्रों में 3000 वर्गमीटर से ज्यादा निर्माण पर ये काम जरूरी, जानें नया नियम
यूपी में 3000 वर्गमीटर से अधिक के आवासीय और गैर-आवासीय औद्योगिक प्लॉट पर पार्क या खुला क्षेत्र छोड़ना अनिवार्य होगा। नए बिल्डिंग बॉयलॉज में ग्रीनबेल्ट और खुले स्थान की सीमा तय की गई है। 3000 वर्गमीटर से कम प्लॉट पर यह अनिवार्यता नहीं होगी।

यूपी में औद्योगिक क्षेत्रों में 3000 वर्गमीटर से अधिक निर्माण पर पार्क या खुला क्षेत्र छोड़ना जरूरी होगा। यह व्यवस्था आवासीय तथा गैर-आवासीय क्षेत्रों के लिए लागू होगी। औद्योगिक क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित एकीकृत भवन विकास उपविधि (बिल्डिंग बॉयलॉज) में ऐसे ही कई प्रावधान किए गए है। यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि कितने हिस्से में ग्रीनबेल्ट होगी तथा कितने हिस्से में खुला स्थान छोड़ना होगा। एकीकृत भवन विकास उपविधि का अंतिम प्रारूप तैयार कर लिया गया है। नए प्रारूप में 3000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले लेआउट के लिए खुले स्थान की गणना टेलीस्कोपिक आधार पर होगी। 3000 वर्गमीटर से कम के आवासीय तथा औद्योगिक प्लॉट में पार्क या खुला क्षेत्र छोड़ना जरूरी नहीं होगा लेकिन इससे अधिक के प्लॉट के लिए सीमा तय कर दी गई है।
औद्योगिक क्षेत्रों 10% जमीन पार्क के लिए छोड़नी होगी
आवासीय क्षेत्रों में 15 प्रतिशत तथा औद्योगिक क्षेत्रों में कुल क्षेत्रफल का 10 प्रतिशत हिस्सा पार्क या खुले स्थान के रूप में छोड़ना होगा। यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि 6000 वर्गमीटर का कोई आवासीय प्लॉट है तो खुले एरिया की गणना 3000 वर्गमीटर को छोड़कर की जाएगी यानी 3000 वर्गमीटर क्षेत्रफल का 15 प्रतिशत (450) वर्ग मीटर) पार्क के लिए सुरक्षित करना होगा। ऐसे ही औद्योगिक क्षेत्र के लिए इतने ही क्षेत्रफल पर 300 वर्गमीटर ही खुला स्थान आरक्षित करना होगा।
बिल्डिंग बॉयलॉज में दोहरी व्यवस्था से राहत
खुले स्थान की न्यूनतम चौड़ाई 6 मीटर और न्यूनतम क्षेत्रफल 200 वर्ग मीटर होना जरूरी है। प्लॉट की सीमा से 3 मीटर का स्थान पाथवे के लिए रखा जाएगा। इसका निर्माण इंटरलॉकिंग रोड जैसा ही किया जा सकेगा ताकि पानी जमीन सोख सके। बिल्डिंग बॉयलॉज में दोहरी व्यवस्था से राहत दी गई है। यदि किसी योजना के लेआउट में मानकों के अनुरूप पार्क और खुली जगह आरक्षित है, तो उसी योजना के ग्रुप हाउसिंग प्लॉट में अलग से पार्क के लिए प्रावधान करना अनिवार्य नहीं होगा।
नक्शा मंजूरी के लिए लैंडस्पेक का प्लान जरूरी
सड़कों के किनारे और औद्योगिक क्षेत्रों में पौधरोपण के मानक भी तय किए गए हैं। मानचित्र स्वीकृति तथा कंप्लीशन सर्टिफिकेट तभी जारी किया जाएगा जब लैंडस्केप का पालन होगा। 9 से 12 मीटर चौड़ी सड़कों के एक तरफ तथा 12 मीटर से अधिक चौड़ी सड़क के दोनों ओर अधिकतम 10-10 मीटर दूरी पर पौधे लगाने होंगे। औद्योगिक योजनाओं में कुल खुले क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर कम से कम 125 पौधे लगाने अनिवार्य होंगे।
आवासीय क्षेत्र में ग्रीनबेल्ट
प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को आवासीय क्षेत्रों से अलग रखने के लिए बीच में हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) बनाई जाएगी। यह कुल औद्योगिक क्षेत्रफल का 15 प्रतिशत होगी। वाणिज्यक योजनाओं में कुल खुले क्षेत्रफल के न्यूनतम 20 प्रतिशत हिस्से में प्रति हेक्टेयर 50 पेड़ लगाने अनिवार्य होंगे। संस्थागत परिसरों, सामुदायिक सुविधाओं, खेल के मैदानों और पार्कों में भी वृक्षारोपण निर्धारित मानक के अनुरूप करना होगा।


