यूपी के इन सहायक अध्यापकों की फिर से होगी जांच, एक महीने के भीतर मांगी गई रिपोर्ट
यूपी में संदेश के घेरे में आए फर्जी दस्तावेजों पर नियुक्त सहायक अध्यापकों की फिर से जांच की जाएगी। इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। शासन ने एक माह के भीतर ऐसे अध्यापकों को चिन्हित कर एक़ माह के भीतर उसकी रिपोर्ट मांगी है।

UP News : यूपी में संदेश के घेरे में आए फर्जी दस्तावेजों पर नियुक्त सहायक अध्यापकों की फिर से जांच होगी। शासन ने एक माह के भीतर ऐसे अध्यापकों को चिन्हित कर एक़ माह के भीतर उसकी रिपोर्ट मांगी है। हाईकोर्ट के आदेश पर अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शुक्रवार को बेसिक शिक्षा निदेशक सहित सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों व बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव के नाम इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।
आदेश में एक प्रोफार्मा भी संलग्न किया गया है जिसमें संदिग्ध अध्यापक के नाम, उनकी नियुक्ति तिथि, उनके फर्जी पाए गए अभिलेखों के अलावा फर्जी पाए गए अभिलेख किस संस्था द्वारा निर्गत किए गए हैं तथा उस अध्यापक के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई है और उसकी अध्यतन स्थिति क्या है इसका पूरा विवरण प्रोफार्मा में भरकर भेजने को कहा गया है।
अपने आदेश में अपर मुख्य सचिव ने कहा है कि पूर्व में शासन द्वारा फर्जी अभिलेखों के आधार पर सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त हो गए अध्यापकों के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही किए जाने के आदेश दिए गए थे जिनके संबंध में पूर्व में जांच भी की गई है। फिर भी वर्तमान में फर्जी अभिलेखों के आधार पर सहायक अध्यापकों के पद पर नियुक्ति के प्रकरण संज्ञान में आ रहें है। ऐसे में सभी मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (मण्डल) को निर्देशित किया जाता है कि वे फर्जी अभिलेखों के आधार पर नियुक्त अध्यापकों के संदेहास्पद अभिलेखों की जांच कर लें तथा पूर्व में फर्जी अभिलेखों के आधार पर नियुक्ति पाए अध्यापकों एवं वर्तमान में फर्जी अभिलेखों के आधार पर नियुक्त संदिग्ध अध्यापकों की एक समेकित सूची निर्धारित प्रारूप (प्रोफार्मा) पर शासन को एक माह में अनिवार्य रूप से उपलब्ध करा दें। ताकि उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 22.01.2026 के अनुपालन में नियमानुसार कार्यवाही की जा सके।
विदित हो कि फर्जी अभिलेखों पर नौकरी पाए प्राइमरी स्कूलों के अध्यापकों की एसटीएफ द्वारा जांच की जा रही है जिसमें विभिन्न जिलों में अब तक पकड़े जा चुके 200 से अधिक शिक्षकों को बर्खास्त किया जा चुका है। कई जिलों में अभी भी जांच चल रही है।
लेखक के बारे में
Deep Pandeyदीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।
और पढ़ें

