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यूपी के कॉलेजों में अब मनमानी नहीं, संसाधनों के हिसाब से तय होगी फीस

यूपी के कॉलेजों में अब मनमानी नहीं, संसाधनों के हिसाब से तय होगी फीस

संक्षेप:

अभी बीए, बीएससी और बीकॉम की प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों की तरह मानक फीस निर्धारित न होने से कॉलेज मनमाने ढंग से फीस वसूलते हैं। राजकीय, एडेड और सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में फीस को लेकर काफी असमानता है। कहीं बीए और बीएससी की फीस तीन हजार से लेकर आठ हजार रुपये है तो कहीं 15-20 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर तक है।

Wed, 17 Sep 2025 05:35 AMAjay Singh आशीष द्विवेदी, लखनऊ
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अब मेडिकल, इंजीनियरिंग की तर्ज पर परंपरागत पाठ्यक्रमों की भी मानक फीस निर्धारित की जाएगी। बीए, बीएससी और बीकॉम के सामान्य और ऑनर्स पाठ्यक्रमों का शुल्क निर्धारण प्रोफेशनल कोर्सों की तर्ज पर किया जाएगा। उपलब्ध संसाधनों और सुविधाओं के अनुसार एक निश्चित शुल्क से अधिक कॉलेज नहीं वसूल सकेंगे। उच्च शिक्षा विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है।

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अभी बीए, बीएससी और बीकॉम की प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों की तरह मानक फीस निर्धारित न होने से कॉलेज मनमाने ढंग से फीस वसूलते हैं। राजकीय, एडेड व सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में फीस को लेकर काफी असमानता है। किसी कॉलेज में बीए व बीएससी की फीस तीन हजार से लेकर आठ हजार रुपये है तो कहीं यह 15-20 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर तक है। यही नहीं कई एडेड कॉलेजों में इतनी कम फीस आ रही है कि कक्षाओं के लिए संसाधन जुटाना मुश्किल हो गया है।

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वर्ष 1996 में नियमित पाठ्यक्रमों की फीस निर्धारित की गई और उसके बाद वर्ष 2000 में महंगाई ,प्रयोगशाला शुल्क को साढ़े तीन रुपये से बढ़ाकर 20-20 रुपये किया गया। सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों में मनमाने ढंग से फीस ली जा रही है। ऐसे में दोनों में काफी असमानता है। फीस नियमन कमेटी के मानक फीस निर्धारित करने पर यह असमानता दूर होगी। ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग छात्रों को बड़ी राहत देगा।

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पारदर्शिता बढ़ेगी

अभी सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में मनमानी फीस वसूली के कारण पाठ्यक्रम बंद भी होते हैं। यही नहीं एडेड डिग्री कॉलेजों में सेल्फ फाइनेंस कोर्स की आय से ही संसाधन जुटाए जाते हैं। फिर भी इनका संचालन मनमाने ढंग से होता है। कई बार कोर्स बंद भी हो जाते हैं। अब आगे मानक फीस निर्धारण होने से छात्रों की शिकायतें घटेंगी।

इतने छात्र पढ़ रहे हैं डिग्री कॉलेजों में

यूपी के 7925 डिग्री कॉलेजों में 54.76 लाख छात्र पढ़ रहे हैं। अब कॉलेज इनसे फीस लेने अपनी मनमानी कर सकेंगे बल्कि कॉलेज में उपलब्ध संसाधनों, सुविधाओं के हिसाब से ही फीस तय होगी। इसका सीधा लाभ छात्रों को मिलेगा।

Ajay Singh

लेखक के बारे में

Ajay Singh
अजय कुमार सिंह दो दशक से अधिक अनुभव वाले वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और टीवी होते हुए अब डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ीं खबरों को गहराई से कवर किया है। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं। और पढ़ें
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