Hindi NewsUP NewsThere was no place in the village for Chhath Puja, so he single-handedly dug a 40-foot long pond
छठ पूजा के लिए गांव में नहीं था कोई घाट, अकेले ही खोद डाला 40 फीट लंबा-चौड़ा तालाब

छठ पूजा के लिए गांव में नहीं था कोई घाट, अकेले ही खोद डाला 40 फीट लंबा-चौड़ा तालाब

संक्षेप:

छठ पूजा पर अर्ध्य देने के लिए गांव में कोई स्थान नहीं था। ऐसे में छठ की आस्था को ही जुनून बनाते हुए अकेले ही 40 फीट लंबा-चौड़ा तालाब खोद डाला। हम बात कर रहे हैं सोनभद्र के इंद्र बहादुर की। इंद्र बहादुर ने दिन-रात फावड़ा चलाकर पांच माह में यह तालाब तैयार किया है।

Sun, 26 Oct 2025 10:27 PMYogesh Yadav वैनी (सोनभद्र), हिन्दुस्तान टीम
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डाला छठ की आस्था ने जब जुनून का रूप लिया तो सोनभद्र के एक शख्स ने असंभव को संभव कर दिखाया। चकयां गांव में जहां एक भी तालाब नहीं था, वहां इंद्रबहादुर ने अकेले अपने दम पर 40 फीट लंबा-चौड़ा और पांच फीट गहरा तालाब खोद डाला। उनकी जिद थी कि इस बार महिलाएं सूर्यदेव को अर्घ्य देने लंबी दूरी तय कर कर्मनाशा नदी तक न जाएं। पांच माह में इंद्रबहादुर ने दिन-रात अनथक मेहनत कर सपने जैसे दुरूह काम को साकार कर दिखाया।

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नगवां ब्लाक के ग्राम पंचायत चकयां के बिछिया गोसा गांव निवासी 45 वर्षीय इंद्रबहादुर बताते हैं कि लगभग दो हजार की आबादी वाले गांव में छठ पूजा के लिए एक भी तालाब नहीं था। हर साल छठ पर महिलाओं को गांव से दो किमी दूर कर्मनाशा नदी के किनारे अर्घ्य के लिए जाना पड़ता था। नदी में मगरमच्छ सहित अन्य जहरीले जंतुओं का भय बना रहता था। इंद्रबहादुर ने व्रतियों की सुविधा के लिए तालाब निर्माण की जिद ठान ली। मई 2025 से उन्होंने इस काम की शुरुआत कर दी।

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ग्राम समाज की जमीन पर वह तालाब की खोदाई करने लगे। प्रतिदिन वह आठ से 12 घंटे इस काम लगे रहे। दिन के साथ रात में जब भी नींद खुलती तो वे फावड़ा लेकर खोदाई में लग जाते। उनकी मेहनत रंग लाई। पांच में 40 फीट लंबा और इतना ही चौड़ा तालाब खोदकर तैयार कर दिया। पांच फीट गहरे तालाब में बोरिंग कराकर पानी की व्यवस्था की गई है। गांव की महिलाएं सोमवार को अस्ताचल सूर्य और मंगलवार को उगते सूर्य को अर्घ्य इस बार इसी तालाब से देंगी।

गांव वालों ने कहा, सोनभद्र के माझी हैं इंद्र बहादुर

इंद्रबहादुर के इस कार्य से पूरा गांव प्रभावित खुश। गांव के लोगों ने उन्हें सोनभद्र का मांझी बताया। कहा कि इंद्रबहादुर ने जो कार्य किया है, वह लोगों के लिए एक सीख है कि अगर ठान लिया जाए तो कोई भी काम कठिन नहीं होता है।

ब्लाक प्रमुख ने किया सम्मानित

इंद्रबहादुर के इस कार्य से प्रभावित होकर ब्लाक प्रमुख नगवां आलोक सिंह ने उन्हें सम्मानित किया है। प्रमुख ने कहा कि उन्होंने यह साबित कर दिया कि कोई काम नामुमकिन नहीं है। इनसे अन्य लोगों को भी सीख लेने की जरूरत है।