
आत्मसम्मान के लिए इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं, चीफ प्रॉक्टर ने VC को ऐसा क्यों लिखा?
पत्र में चीफ प्रॉक्टर ने लिखा है कि उनके व्यक्तित्व और स्वभाव पर टिप्पणियां की गईं। वह भी ऐसे तत्वों के दावों के आधार पर जो छात्र नहीं हैं और जिनकी गतिविधियां अक्सर अनुशासन भंग करने वाली होती हैं। उन्हें विश्वास था कि विश्वविद्यालय के अधिकारी उनके पक्ष में जवाब देंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में चार छात्रों के निलंबन और 20 नवंबर से शुरू हुआ छात्र आंदोलन मंगलवार को बिना शर्त निलंबन वापसी से थम तो गया लेकिन इस बीच प्रॉक्टर प्रो. राकेश सिंह के इस्तीफे से परिसर का माहौल गरम हो गया है। इसका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने अपने इस्तीफे का मुख्य कारण मंगलवार को विश्वविद्यालय, जिला और पुलिस प्रशासन की संयुक्त बैठक के दौरान की पुलिस आयुक्त की व्यक्तिगत टिप्पणी को बताया है। हालांकि ‘लाइव हिन्दुस्तान’ वायरल हो रहे वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।
कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव और विश्वविद्यालय प्रशासन के अफसरों की मौजूदगी में टिप्पणी से आहत प्रो. राकेश सिंह ने प्रॉक्टर पद से इस्तीफे को स्वीकार करने का अनुरोध कुलपति से किया है। पत्र में उन्होंने लिखा है कि उनके व्यक्तित्व और स्वभाव पर टिप्पणियां की गईं और वह भी ऐसे तत्वों के दावों के आधार पर जो छात्र नहीं हैं और जिनकी गतिविधियां अक्सर अनुशासन भंग करने वाली होती हैं। उन्हें यकीन था कि विश्वविद्यालय के अधिकारी उनके पक्ष में जवाब देंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका और अब आत्मसम्मान बनाए रखने के लिए इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने लिखा है कि शिक्षक के रूप में उनका मूल स्वभाव सहृदय और समझदार है पर प्रॉक्टर की जिम्मेदारी निभाते समय कठोरता का सहारा लेना इस पद की अनिवार्यता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कठोरता उनके शिक्षक व्यक्तित्व को नहीं बदल पाई, पर उन पर सवाल उठाने का तरीका असहज कर गया। उन्होंने इसे आत्मसम्मान पर आघात बताते हुए कहा कि किसी पुलिस अधिकारी द्वारा उनके व्यक्तित्व पर टिप्पणी सुनना दुर्भाग्यपूर्ण और असहनीय रहा। इस मामले में प्रॉक्टर प्रो. राकेश सिंह ने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
पुलिस कमिश्नर बोले-बेबुनियाद हैं आरोप
इस बारे में पुलिस कमिश्नर जोगेन्द्र कुमार ने कहा कि प्रॉक्टर के आरोप बेबुनियाद हैं। कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव के बुलाने पर हम गए थे। वहां कमिश्नर सौम्या अग्रवाल, जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, एडीशनल सीपी, सीओ एलआईयू, डीसीपी सिटी, एसीपी कर्नलगंज और प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे। हमारी जो रिपोर्ट थी उसमें छात्रों के प्रॉक्टर से नाराजगी की बात सामने आई थी। विवि में अनुशासन बनाए रखना प्रॉक्टर की जिम्मेदारी है। हमने बैठक में उनसे यही पूछा कि छात्र आपसे क्यों नाराज है, क्या कारण हैं बताएं तो हम समाधान करें। इस बात से सभी अफसर भी सहमत थे।
हुआ क्या था?
विवाद की शुरुआत फैज स्मृति दिवस पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम से जुड़ी है। आरोप है कि कार्यक्रम की सूचना देने पहुंचे चार छात्र कार्यकर्ताओं को प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने प्रॉक्टर कार्यालय में बिठाकर उनके साथ अभद्रता की। विरोध जताने पर सौम्या और संजय को तत्काल निलंबित करते हुए परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी गई। इसी के विरोध में छात्र गुरुवार से आंदोलनरत थे। सोमवार को अवकाश के बाद बड़ी संख्या में छात्र परिसर में जुटे और लाइब्रेरी गेट पर नारेबाजी शुरू कर दी। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के चारों विद्यार्थियों का निलंबन मंगलवार देर रात वापस ले लिया गया। इसके साथ ही पिछले कई दिनों से चल रहा छात्रों का धरना–प्रदर्शन और अनशन समाप्त हो गया। एडीएम सिटी ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने चारों विद्यार्थियों संजय, सौम्या, निधि और चंद्रप्रकाश का निलंबन समाप्त कर दिया है।





