
जन्मदिन के दिन उठी बेटे की अर्थी, विधवा मां के सपनों पर टूटा पहाड़, रोया पूरा इलाका
यूपी के लखनऊ में जब कक्षा 7 के छात्र अंश का शव पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। घर में बुधवार को जन्मदिन का जश्न होना था, वहां रोने-बिलखने की आवाजें गूंज रहीं थीं। जन्मदिन के दिन बेटे की अर्थी उठी। विधवा मां पूनम के सपनों पर पहाड़ टूट पड़ा।
यूपी के लखनऊ में निगोहा के मस्तीपुर गांव में उस वक्त कोहराम मच गया, जब कक्षा 7 के छात्र अंश का शव पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचा। घर में बुधवार को जन्मदिन का जश्न होना था, वहां रोने-बिलखने की आवाजें गूंज रहीं थीं। विधवा मां पूनम हाथ में अपने बेटे के लिए खरीदे नए कपड़े थामे बार-बार बेहोश हो जा रही थी। वह रोते हुए कह रही थी - “आज तो अंश का जन्मदिन मनाना था, ऊपर वाले से उसकी लंबी उम्र की दुआ करनी थी... लेकिन आज तो उसी की अर्थी विदा करनी पड़ रही है।”यह दृश्य देखकर इलाके में हर किसी की आंखें नम हो गईं।

पति के बाद बेटे को भी खो दिया सहारा
मस्तीपुर गांव की पूनम के पति नरेश ने करीब ढाई साल पहले फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। तब से पूनम अपने दोनों बेटों 12 वर्षीय अंश और 8 वर्षीय आदर्श की परवरिश के लिए लखनऊ के पीजीआई इलाके में घरों में चौका-बर्तन कर मेहनत से जीवन चला रही थी। मंगलवार सुबह भी पूनम बच्चों को खाना बनाकर काम पर चली गई थी। शाम करीब चार बजे जब वह लौटी तो देखा कि घर का दरवाजा अंदर से बंद है। काफी देर तक आवाज देने पर जब कोई जवाब नहीं मिला तो ग्रामीणों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया। भीतर का दृश्य देखकर सबकी चीख निकल पड़ी अंश साड़ी के फंदे से लटक रहा था। पुलिस को सूचना दी गई और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
जन्मदिन के दिन चिता सजाई गई
ग्रामीणों ने बताया कि बुधवार को अंश का जन्मदिन था। पूनम ने तीन दिन पहले ही बेटे की पसंद के नए कपड़े 1400 रुपये में खरीदकर रखे थे और सबको बता रही थी कि इस बार वह जन्मदिन धूमधाम से मनाएगी। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था - जिस दिन केक काटने की तैयारी थी, उसी दिन बेटे की अर्थी सजी।
मेहनतकश मां के टूटे अरमान
पड़ोसियों के अनुसार पूनम अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और परवरिश देने के लिए रोज सुबह घर से निकलकर कई घरों में काम करती थी।वह चाहती थी कि उसके बेटे पढ़-लिखकर एक दिन बड़ा आदमी बनें।इसी कारण उसने अंश का दाखिला एक निजी स्कूल में कराया था।





