
कफ सिरप का दूसरा मास्टरमाइंड निकला सौरभ त्यागी, शुभम जायसवाल के समानांतर चलाया गिरोह
कफ सिरप तस्करी कांड में शुभम जायसवाल की तरह सौरभ त्यागी में मास्टरमाइंड ही निकला है। शुभम जायसवाल के समानांतर सौरभ त्यागी गिरोह चला रहा था। सौरभ की दवा कम्पनी आरएस फार्मा समेत पांच कम्पनियों के खातों से बड़े लेन-देन के सबूत मिले हैं।
कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी में शुभम जायसवाल के समानान्तर गाजियाबाद के सौरभ त्यागी ने भी अपना गिरोह चलाया। वह इस नेटवर्क का दूसरा मास्टरमाइंड निकला। उसने अपनी आरएस फार्मा समेत पांच दवा कम्पनियों के जरिए 180 करोड़ रुपये से अधिक की सिरप बोतलें सप्लाई कर डाली। कुछ समय के लिए सौरभ त्यागी और शुभम साथ-साथ भी काम किए थे। इस तस्करी के तूल पकड़ते ही शुभम तो भाग निकला था लेकिन सौरभ गाजियाबाद पुलिस के हत्थे चढ़ गया था। एसआईटी ने अपनी जांच में गाजियाबाद के इस मुकदमे का ब्योरा भी लिया है।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी सौरभ त्यागी ने अपने साथियों धर्मेन्द्र सिंह, दीपू यादव, सुशील यादव,अम्बुज कुमार,शिवकांत उर्फ शिव,शादाब,संतोष भडाना,पप्पन यादव,आसिफ, वसीम उर्फ नानू और अभिषेक शर्मा के साथ इस गिरोह को चलाया। इसमें वान्या इंटरप्राइजेज के विशाल उपाध्याय, सुमित राणा, कमल मौर्या और सोनू ने भी अहम भूमिका निभाई। इन सभी के बारे में एसटीएफ ने भी पड़ताल की थी। इस गिरोह ने मुख्य रूप से पांच कम्पनियों आरएस फार्मा, एवी फार्मा,मेडेरॉन हेल्थ केयर,वान्या इंटरप्राइजेज और एसबी ट्रेडर्स के जरिए गिरोह ने करोड़ों की कमाई की।
बांग्लादेश तक उसका अलग नेटवर्क रहा
जांच में सामने आया कि सौरभ त्यागी ने भी बांग्लादेश तक अपना अलग नेटवर्क फैला रखा था। उसने भी कोडीन युक्त सिरप की सप्लाई की। गाजियाबाद पुलिस ने जब उसके ट्रकों को पकड़ा था तो उसमें 20 लाख रुपये नगद के अलावा एक लाख 57 हजार 350 शीशियां सिरप की बरामद हुई थी। सौरभ त्यागी ने इस गिरोह का पूरा नेटवर्क बताया था। उस समय ज्यादा जानकारी इस गिरोह से नहीं सामने आई थी। पर, जब विभोर राणा व विशाल ने पकड़े जाने पर एसटीएफ के सामने गिरोह का पूरा सच बताया तो सब हैरान रह गए थे। इसके बाद ही जेल में सौरभ के बयान हुए।
एसआईटी ने जांच का पूरा ब्योरा लिया
एसआईटी का नेतृत्व कर रहे आईजी कानून-व्यवस्था एलआर कुमार ने कुछ दिन पहले लखनऊ, गाजियाबाद, सोनभद्र और वाराणसी में दर्ज मुकदमों के सम्बन्ध में वहां के कप्तान-कमिश्नर और विवेचकों से वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए कई जानकारियां ली। इसमें सबसे ज्यादा ब्योरा गाजियाबाद से लिया गया था।
ईडी ने भी नजर गड़ाई सौरभ के नेटवर्क पर
सौरभ त्यागी और उसके गिरोह से जुड़े कई राज सामने आ गए है। दावा किया जा रहा है कि 180 करोड़ रुपये का हिसाब सामने आया है। अभी कई और दस्तावेजों का मिलान बाकी है। यही वजह है कि ईडी ने भी उसके बारे में जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। ईडी सूत्रों के मुताबिक जल्दी ही सौरभ और उसके साथियों के खिलाफ भी मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
ईडी ने दवा कंपनियों के खातों से मिलान शुरू किया
सिरप की तस्करी के मामले में ईडी ने बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह और अमित टाटा के संपर्क वाली दवा कंपनियों के खातों का मिलान शुरू कर दिया है। इनके खातों से दवा बिक्री की रकम का भी ब्योरा लिया जा रहा है।
ईडी इस मामले के आरोपियों के खिलाफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत जांच कर रही है। सबसे पहले ईडी ने आलोक और अमित के यहां छापा मारकर कई दस्तावेज बरामद किए थे। फिर आलोक की कोठी का मूल्यांकन भी कराया। अब आलोक और अमित की संपत्ति का एक एक हिसाब देख रही है।
ईडी सूत्रों के मुताबिक तस्करी से मिली रकम आलोक ने कोठी निर्माण में भी लगायी है। आलोक की ये कोठी उसकी पत्नी के नाम है और इसके लिए उसने कोई लोन भी नहीं लिया था। इसलिए ईडी उसके और परिवार के सभी सदस्यों के बैंक खातों की जांच कर रही है। अगर कोठी में लगी रकम का हिसाब आय के हिसाब से नहीं मिला तो कोठी को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसी कड़ी में शुभम की संपत्ति का भी ब्योरा जुटा लिया गया है। शुभम दुबई में छिपा हुआ है। एसआईटी उसके और अन्य आरोपियों के प्रत्यर्पण के लिए प्रयास कर रही है।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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