मेरठ में बनेगा देश का पहला ड्रोन रनवे; 406 करोड़ होंगे खर्च, जानें फायदे
मेरठ में भारत का पहला मानव रहित विमान व ड्रोन रनवे बनेगा। बीआरओ ने 406 करोड़ रुपये की परियोजना का टेंडर जारी किया है। 900 एकड़ में बनने वाला यह रनवे रक्षा, निगरानी, ड्रोन परीक्षण और प्रशिक्षण के लिए अहम होगा, जिससे सुरक्षा व आपदा प्रबंधन क्षमता बढ़ेगी।

देश की रक्षा और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में मेरठ जल्द ही एक नई पहचान बनाने जा रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद भारत सरकार अब देश का पहला समर्पित मानव रहित विमान (यूएवी) और ड्रोन रनवे मेरठ में विकसित करने की तैयारी कर रही है। यह परियोजना सामरिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसके जरिए देश की सीमाओं की निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और हवाई चौकसी को नई मजबूती मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने औपचारिक रूप से टेंडर जारी कर दिया है।
बीआरओ के मुख्य अभियंता द्वारा जारी टेंडर नोटिस के अनुसार ड्रोन रनवे के निर्माण पर करीब 406 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी। परियोजना के लिए लगभग 900 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है और इसे पूरा करने में करीब 85 महीने यानी लगभग सात वर्ष का समय लग सकता है। अधिकारियों का मानना है कि यह परियोजना पूरी होने के बाद देश की रक्षा क्षमताओं में बड़ा बदलाव लाएगी।
मेरठ को इस परियोजना के लिए चुनने के पीछे इसकी भौगोलिक और सामरिक स्थिति अहम मानी जा रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में स्थित होने के कारण यहां से संवेदनशील और सीमावर्ती क्षेत्रों पर निगरानी करना आसान होगा। इसके अलावा, यह क्षेत्र सैन्य गतिविधियों और लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और मानवरहित विमानों की भूमिका लगातार बढ़ रही है, इसलिए इस तरह का समर्पित रनवे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है।
ट्रेनिंग सेंटर के तौर पर भी होगा इस्तेमाल
अब तक देश में ड्रोन संचालन के लिए सामान्य हवाई पट्टियों या अस्थायी मैदानों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन पहली बार ऐसा होगा जब केवल ड्रोन और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट के लिए एक अत्याधुनिक और विशेष रूप से डिजाइन किया गया रनवे तैयार किया जाएगा। इससे भारी और उन्नत तकनीक वाले ड्रोन का सुरक्षित परीक्षण और संचालन संभव होगा। साथ ही यह क्षेत्र ड्रोन पायलटों और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र के रूप में भी विकसित हो सकता है।
ड्रोन रनवे से यह होगा फायदा
ड्रोन रनवे का उपयोग केवल सैन्य उद्देश्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन, निगरानी, राहत और बचाव कार्यों तथा दूरदराज के इलाकों में आवश्यक सामग्री पहुंचाने जैसे कार्यों में भी किया जा सकेगा। इससे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी।
रनवे की लंबाई-चौड़ाई
बीआरओ के अनुसार रनवे (14/32) की कुल लंबाई 2110 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर होगी। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि सी-295 और सी-130 जैसे परिवहन विमानों के साथ विभिन्न प्रकार के रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट भी यहां लैंडिंग और संचालन कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत की रक्षा तकनीक को नई दिशा देने के साथ-साथ ड्रोन उद्योग के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और मेरठ को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाएगी।


