
आतंक के डॉक्टरों ने खड़ा किया स्लीपर मॉड्यूल, खुफिया एजेंसियों ने यूपी में डाला डेरा
जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में श्रीनगर में पोस्टर लगाने वाले डॉ. आदिल का सहारनपुर, श्रीनगर पुलिस, एटीएस सहारनपुर से श्रीनगर तक कनेक्शन खंगालने में लगी हैं। यूपी के सहानपुर के जिस अस्पताल में डॉ. अदील तैनात था, वहां सोमवार सुबह से ही कई राज्यों की पुलिस व खुफिया एजेंसियों ने डेरा डाल रखा था।
जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में श्रीनगर में पोस्टर लगाने वाले डॉ. आदिल का सहारनपुर, श्रीनगर पुलिस, एटीएस सहारनपुर से श्रीनगर तक कनेक्शन खंगालने में लगी हैं। यूपी के सहानपुर के जिस अस्पताल में डॉ. अदील तैनात था, वहां सोमवार सुबह से ही कई राज्यों की पुलिस व खुफिया एजेंसियों ने डेरा डाल रखा था। अस्पताल के प्रबंधन, वहां तैनात चिकित्सकों व स्टाफ से बारी बारी से घंटों तक पूछताछ की। सोमवार सुबह अस्पताल में जम्मू कश्मीर पुलिस पहुंची। आतंक के डॉक्टरों ने मिलकर अपना स्लीपर मॉड्यूल खड़ा किया था। यह स्लीपर मॉड्यूल पिछले पांच साल से लगातार काम कर रहा था। खुफिया तरीके से आतंकी संगठनों के लिए भर्ती की गई और आतंक फैलाने के नए-नए तरीके निकाले गए। फिलहाल ये सभी जैश ए मोहम्मद और अंसार गजवत उल हिंद के लिए काम कर रहे थे।
श्रीनगर पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने जब श्रीनगर में ही जैश के समर्थन में पोस्टर लगाने वाले आरिफ को दबोचा तो पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ। इसके बाद फरीदाबाद के डॉ. मुजाहिल शकील उर्फ मुजम्मिल शकील और सहारनपुर में डॉक्टर अदील अहमद को पकड़ा गया। एक के बाद एक सात गिरफ्तारियां हुईं और एके-47 समेत विस्फोटक, टाइमर, कारतूस और काफी सामान बरामद किया गया। खुलासा हुआ कि ये सभी आरोपी आगे चलकर जैश, अलकायदा और लश्कर की तरह खुद का आतंकी संगठन खड़ा करना चाहते थे।
जम्मू कश्मीर के श्रीनगर स्थित नौगाम में जैश ए मोहम्मद के धमकी वाले कुछ पोस्टर 19 अक्बूतर को लगाए गए थे। इसमें स्थानीय लोगों को जांच एजेंसियों से संपर्क नहीं करने के साथ सुरक्षा बलों को भी धमकी दी गई थी। इस मामले में श्रीनगर पुलिस और कई खुफिया एजेंसियां खुलासे के लिए लगी थीं। नौगाम थाने में यूएपीए समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया और जांच शुरू हुई।
इसी जांच के दौरान कुछ कट्टरपंथी और डिग्रीधारी डॉक्टरों के नाम सामने आए। सीसीटीवी फुटेज से साक्ष्य भी मिल गए। सबसे पहले एक आरोपी आरिफ की गिरफ्तारी हुई और खुलासा हुआ कि एक स्लीपर मॉड्यूल आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद और अलकायदा के समर्थन से काम कर रहा है। डॉक्टर, छात्र और मौलाना समेत कई पेशेवर लोगों ने मिलकर यह स्लीपर मॉड्यूल बनाया है और बड़ी वारदात की तैयारी की जा रही है।
इसके बाद श्रीनगर पुलिस ने अनंतनाग, गंदेरबल, शोपियां, फरीदाबाद और सहारनपुर में अलग अलग जगहों पर टीम बनाकर ऑपरेशन शुरू किया। श्रीनगर पुलिस और बाकी एजेंसियों की जांच में अभी तक खुलासा हुआ कि ये सभी आरोपी एक स्लीपर मॉड्यूल की तरह काम कर रहे थे।
दो दिन पहले की डायलिसिस
अस्पताल के एमडी मनोज मिश्रा ने बताया कि डॉ. अदील की गिरफ्तारी से दो दिन पहले एक मरीज की डायलिसिस की थी। स्टाफ के कहने के बावजूद उसने मरीज के साथ सेल्फी नहीं कराई थी। जबकि हर डायलिसिस पर सब सेल्फी लेते हैं
अदील की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
डॉक्टर अदील की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां कई राज्यों में जांच-पड़ताल कर रही है। सोमवार को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में तलाशी अभियान चलाया गया। सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसियों ने कुछ संदिग्धों से भी पूछताछ की है। दूसरी ओर, दिल्ली-एनसीआर में भी कई स्थानों पर जांच की गई।
पाकिस्तानी और विदेशी हैंडलर दे रहे थे रकम
मेरठ। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरफ्तार आरोपियों को विदेश में बैठे हैंडलर निर्देश देते थे और बाहर से रकम भी उपलब्ध कराई जा रही थी। आपस में बातचीत के लिए टेलीग्राम समेत कई गेमिंग एप्लीकेशन और चैट एप्लीकेशन का इस्तेमाल किया जा रहा था। रकम जुटाकर धार्मिक कार्यों की आड़ में मदरसों में युवकों को संगठन के लिए भर्ती करने की साजिश की जा रही थी।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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