
टीचरों को कापी गलत जांचना अब पड़ेगा बहुत भारी, परीक्षा नियमावली में बदलाव की तैयारी
यूपी के विश्वविद्यालयों में कापी गलत जांचना टीचरों को अब महंगा पड़ेगा। नियमावली में बदलाव होने जा रहा है। इसे आगामी सत्र से प्रभावी रूप से लागू करने की तैयारी है। इस फैसले से लाखों छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है
यूपी में अब शिक्षकों की 'मनमानी' और मूल्यांकन में लापरवाही के दिन खत्म होने वाले हैं। राजभवन के कड़े रुख के बाद विश्वविद्यालयों की परीक्षा नियमावली (Examination Bye-laws) में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। नए नियमों के तहत, यदि किसी शिक्षक ने मूल्यांकन में गंभीर त्रुटि की तो उन पर न केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी, बल्कि भारी अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया जाएगा। उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और प्राविधिक शिक्षा संस्थानों में इसे लेकर कवायद शुरू हो गई है।
वर्तमान व्यवस्था में अक्सर देखा जाता है कि छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं होते और उन्हें 'चैलेंज इवैल्यूएशन' का सहारा लेना पड़ता है। कई बार पुनर्मूल्यांकन में अंकों का अंतर इतना अधिक होता है कि शिक्षक की योग्यता और ईमानदारी पर सवाल खड़े हो जाते हैं। उत्तर प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों में तो अभी चैलेंज इवैल्यूएशन की सुविधा भी नहीं है। इसी विसंगति को दूर करने के लिए परीक्षकों पर सख्ती की जा रही है ताकि वे कॉपियां जांचते समय पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी बरतें।
पीजी और एमटेक के छात्र भी जांचेंगे कॉपियां
इस सुधार प्रक्रिया में सबसे चौंकाने वाला बदलाव मूल्यांकन कार्य में स्नातकोत्तर (PG) के छात्रों को शामिल करना है। शिक्षक और शोध छात्रों (Research Scholars) की कमी के कारण अक्सर परीक्षा परिणाम घोषित होने में महीनों की देरी होती है। इस कमी को दूर करने के लिए अब मेधावी पीजी छात्रों को भी मूल्यांकन कार्य का अवसर दिया जाएगा।
प्रायोगिक तौर पर शुरुआत: प्राविधिक विश्वविद्यालयों (जैसे AKTU) में एमटेक के छात्रों को पहले प्रयोग के तौर पर शिक्षकों द्वारा जांची गई कॉपियां दी जाएंगी।
गुणवत्ता की जांच: एमटेक छात्रों द्वारा किए गए पुनर्मूल्यांकन और शिक्षकों के अंकों के बीच के अंतर का विश्लेषण किया जाएगा। यदि शिक्षक की लापरवाही सामने आती है, तो कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
समय पर आएंगे परिणाम, बढ़ेगी पारदर्शिता
अक्सर कई शिक्षक विभिन्न व्यक्तिगत कारणों या कार्यभार का हवाला देकर कॉपियां जांचने से बचते हैं। पीजी के मेधावी छात्रों को इस प्रक्रिया में शामिल करने से मूल्यांकन समय पर पूरा होगा और शैक्षणिक सत्र पटरी पर बना रहेगा। राजभवन का स्पष्ट निर्देश है कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाई जाए और छात्रों के भविष्य के साथ होने वाले खिलवाड़ को रोका जाए।
विश्वविद्यालयों द्वारा अपनी नियमावली में सुधार करने के बाद इसे आगामी सत्र से प्रभावी रूप से लागू करने की तैयारी है। इस फैसले से लाखों छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अक्सर शिक्षकों की मानवीय भूल के कारण अंक सुधार के लिए भटकना पड़ता था।
बदलाव के मुख्य बिंदु:
अर्थदंड का प्रावधान: गलत मूल्यांकन पर शिक्षकों की जेब ढीली होगी।
पीजी छात्रों की भूमिका: मेधावी छात्रों को मूल्यांकन का मानदेय और अनुभव मिलेगा।
समयसीमा की बाध्यता: मूल्यांकन कार्य में देरी करने वाले विभागों की जवाबदेही तय होगी।
डिजिटल ट्रैकिंग: कॉपियों के मूल्यांकन की निगरानी अब डिजिटल माध्यम से करने पर भी विचार हो रहा है।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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