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यूपी के सरकारी स्कूलों में टीचरों का भी ड्रेस कोड, इस जिले के डीएम ने जारी किया आदेश

यूपी के सरकारी स्कूलों में टीचरों का भी ड्रेस कोड, इस जिले के डीएम ने जारी किया आदेश

संक्षेप:

उत्तर प्रदेश के सीतापुर में सरकारी परिषदीय स्कूलों के टीचरों के लिए भी ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है। डीएम ने इस बारे में शुक्रवार को आदेश जारी किया। कोई भी टीचर अब जींस और टीशर्ट में स्कूल नहीं आएगा। 

Dec 13, 2025 06:29 am ISTYogesh Yadav सीतापुर, संवाददाता
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उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों के लिए अब ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है। पिसवां ब्लॉक के सभी शिक्षक अब जींस और टी-शर्ट पहनकर स्कूल नहीं जा सकेंगे। उन्हें फॉर्मल ड्रेस में ही शिक्षण कार्य करना होगा। शुक्रवार को खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) पिसवां, अवनीश कुमार ने इस संबंध में एक पत्र जारी किया है। आदेश जारी होते ही शिक्षकों के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

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दरअसल, जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर. ने गुरुवार को परसेंडी ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय बेदौरा का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कई खामियां सामने आईं, जिन पर डीएम ने नाराजगी जताई। उन्होंने पाया कि शिक्षकों की पोशाक भी स्कूल के माहौल के अनुरूप नहीं है। इस पर उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी अखिलेश प्रताप सिंह को निर्देश दिए कि सभी शिक्षक फॉर्मल ड्रेस में ही स्कूल आएं और शिक्षण कार्य करें। डीएम का मानना है कि शिक्षक बच्चों के लिए आदर्श होते हैं, इसलिए उनकी वेशभूषा भी अनुशासित और पेशेवर होनी चाहिए।

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डीएम के निर्देश के बाद बीईओ अवनीश कुमार ने आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि अब परिषदीय स्कूलों में जींस, टी-शर्ट या अन्य कैजुअल कपड़े पहनना प्रतिबंधित रहेगा। शिक्षकों को शर्ट-पैंट या साड़ी जैसे औपचारिक कपड़े पहनकर ही स्कूल आना होगा। इस कदम का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और पेशेवर माहौल को बढ़ावा देना है।

हालांकि, इस आदेश को लेकर शिक्षकों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ शिक्षक इसे सकारात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि ड्रेस कोड लागू करने से उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित होगी। वहीं, शिक्षा विभाग का तर्क है कि सरकारी स्कूलों की छवि सुधारने और बच्चों में अनुशासन की भावना जगाने के लिए यह जरूरी है।

गौरतलब है कि परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की भूमिका सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे बच्चों के लिए आदर्श भी होते हैं। ऐसे में उनकी वेशभूषा का प्रभाव बच्चों पर पड़ता है। प्रशासन का मानना है कि फॉर्मल ड्रेस से शिक्षकों की गंभीरता और पेशेवर छवि मजबूत होगी। आदेश के पालन की निगरानी भी की जाएगी, ताकि नियमों का सख्ती से अनुपालन हो सके।