
बच्चों को पढ़ाएं या..., हर टीचर के मोबाइल में 40 से ज्यादा ऐप, सभी पर रिपोर्टिंग जरूरी होने से बढ़ी परेशानी
एक तरफ पूरी दुनिया डिजिटल हो रही है। दूसरी तरफ यही डिजिटल अभियान प्राइमरी टीचरों के सामने मुसीबत बन गया है। हर टीचर के मोबाइल में 40 से ज्यादा ऐप लोड कराए गए हैं। सभी पर रोजाना रिपोर्टिंग करना जरूरी है।
सुबह के आठ बजते ही परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की चहक और मासूम हंसी गूंज उठती है। कहीं प्रार्थना की ध्वनि, तो कहीं बच्चों की गुड मॉर्निंग, सर की सामूहिक पुकार वातावरण में गूंजती है, लेकिन इस खुशनुमा माहौल के बीच प्रधानाध्यापक और शिक्षक मोबाइल स्क्रीन में उलझे रहते हैं। कोई प्रेरणा ऐप न खुलने से परेशान है, तो कोई निपुण लक्ष्य ऐप पर छात्रों की प्रगति रिपोर्ट भरने में जूझ रहा है। कभी नेटवर्क कमजोर पड़ता है, तो कभी डेटा अपलोड अधूरा रह जाता है। डिजिटल युग की यह तस्वीर अब शिक्षण व्यवस्था की नई हकीकत बन चुकी है, जहां बच्चों के बीच खड़ा शिक्षक अब किताबों से ज्यादा ऐप्स में व्यस्त दिखाई देता है।
शिक्षकों का कहना है कि उनके फोन में अब तक 40 से अधिक ऐप इंस्टॉल हैं। निपुण लक्ष्य, प्रेरणा, दीक्षा, कर्मयोगी भारत, पीएफएमएस, ई-कवच, यू-डायस, शारदा, समर्थ, खेलो इंडिया, फिट इंडिया, निष्ठा, परख, प्रेरणा डीबीटी, ज्ञान समीक्षा, किताब वितरण, स्वच्छ विद्यालय, हरितिमा अमृत वन और कई अन्य ऐप इन सभी पर हर दिन रिपोर्टिंग करनी होती है।
बिल्ड थान प्रतियोगिता बनी नई चुनौती
वर्तमान में शिक्षकों के लिए चुनौती ‘बिल्डथान प्रतियोगिता’ बन गई है। इसके तहत कक्षा छह से आठ तक के सभी छात्रों को 24 अंग्रेजी वीडियो दिखाने हैं। वीडियो देखने के बाद क्विज कराना, 60 प्रतिशत पासिंग के बाद उनके इनोवेशन आइडिया लेना, फिर उस आइडिया का मॉडल बनवाना, उसका वीडियो तैयार कर यूट्यूब पर अपलोड करना यह सब शिक्षकों को ही करना पड़ता है। एक शिक्षक ने कहा कि छात्रों के पास मोबाइल नहीं होते, इसलिए हमें अपने फोन से वीडियो चलाकर दिखाने पड़ते हैं।
डिजिटल सुधार की मंशा, पर उलझन में शिक्षक
शिक्षा विभाग का कहना है कि ये सभी ऐप शिक्षण व्यवस्था को पारदर्शी और परिणाममूलक बनाने के लिए बनाए गए हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। शिक्षक कहते हैं कि ऐप्स की अधिकता से शिक्षण और प्रशिक्षण दोनों प्रभावित हुए हैं। अब तो दीक्षा ऐप के दो संस्करण हो गए हैं, प्रेरणा और निपुण लक्ष्य अलग हैं, कर्मयोगी ऐप पर ट्रेनिंग लेनी है और अब नया टीचर ऐप भी आ गया है।

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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