
सुप्रीम कोर्ट ने यूपी में तैनात DIG को आवाज का नमूना देने का दिया आदेश, होगी फोरेंसिक जांच; जानें मामला
कोर्ट ने आवाज का नमूना देने का आदेश बस्ती रेंज के DIG संजीव त्यागी को दिया है। यह मामला 2020 का है। तब वह बिजनौर में एसपी थे। देहरादून निवासी इस्लामुद्दीन अंसारी की याचिका पर यह आदेश जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और के विनोद चंद्रन की पीठ ने दिया है।
सु्प्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में डीआईजी के पद पर तैनात एक अधिकारी को अपनी आवाज का नमूना जांच के लिए देने का आदेश दिया है, ताकि इसकी जांच और मिलान एक विवादित ऑडियो क्लिप से की जा सके। इस क्लिप में विवादित टिप्पणी किए जाने का आरोप है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने विवादित टिप्पणी वाली ऑडियो क्लिप उजाकर करने वाले व्यक्ति के खिलाफ दर्ज केस को रद्द भी कर दिया है।
कोर्ट ने आवाज का नमूना देने का आदेश बस्ती रेंज के डीआईजी संजीव त्यागी को दिया है। यह मामला 2020 का है। तब वह बिजनौर में एसपी थे। देहरादून निवासी इस्लामुद्दीन अंसारी (उम्र 73 वर्ष) की याचिका पर यह आदेश जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और के विनोद चंद्रन की पीठ ने दिया है। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक पीठ ने अंसारी को तीन हफ़्तों के भीतर संबंधित एफएसएल को संबंधित ऑडियो क्लिप/लिंक उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने तेलंगाना एफएसएल निदेशक को अपनी प्रत्यक्ष निगरानी में जांच करवाने और 31 जनवरी, 2026 तक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी, 2026 को करेगा।
इस्लामुद्दीन ने हाईकोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर उनके खिलाफ बिजनौर की सदर कोतवाली में दर्ज मामला रद्द करने की मांग की थी। उनका कहना था कि उनके खिलाफ गलत ढंग से यह मामला दर्ज किया गया है। उनका कहना था उन्होंने तत्कालीन एसपी के एक वर्ग विशेष के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी के ऑडियो क्लिप पर कानूनी कार्रवाई की बात की थी। पूछा था कि क्या विवादित क्लिप में आवाज उन्हीं की है। इसी पर उनके खिलाफ केस हो गया।
‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश के वकील ने पीठ को बताया कि राज्य ने अंसारी के खिलाफ मामला वापस लेने के लिए संबंधित अदालत में एक याचिका दायर की है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस द्वारा कार्यवाही करने का ये मामला अधिकार और अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग है। 7 जुलाई, 2020 को एक मजिस्ट्रेट अदालत में आरोपपत्र दायर किया गया, जिसमें अंसारी का नाम शामिल था। आरोप पत्र में दावा किया गया था कि कोतवाली पुलिस स्टेशन में अंसारी के फ़ोन नंबर के ख़िलाफ़ एक शिकायत प्राप्त हुई थी जिसमें संदेश/पोस्ट भेजकर धार्मिक भावनाएं भड़काकर विद्रोह फैलाने की बात कही गई थी। अदालत ने संज्ञान लिया और 30 सितंबर, 2021 को समन जारी किया। इसके बाद अंसारी इलाहाबाद उच्च न्यायालय गए, जहां उन्होंने समन को चुनौती दी और मामले को रद्द करने की मांग की। इस साल 13 अगस्त को, उच्च न्यायालय ने अंसारी की याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया।
क्या बोले डीआईजी
बस्ती के डीआईजी संजीव त्यागी ने इस बारे में कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में है। प्रकरण कोर्ट में चल रहा है। हमें जो भी बात रखनी होगी, माननीय न्यायालय में रखेंगे। इस संबंध में कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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