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इंसानियत के मसीहा का नाम है हुसैन

सुलतानपुर, संवाददाता शनिवार को चांद निकलने के बाद रविवार को मोहर्रम का आगाज...

इंसानियत के मसीहा का नाम है हुसैन
Newswrapहिन्दुस्तान टीम,सुल्तानपुरMon, 01 Aug 2022 12:15 AM
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सुलतानपुर, संवाददाता

शनिवार को चांद निकलने के बाद रविवार को मोहर्रम का आगाज हो गया। शिया इलाकों में मजलिसों का दौर जारी है। मजलिसों में उलमा कुरआन ए मजीद की रौशनी में इस्लामी तारीख के हवाले से इस्लाम और इनसानियत पर प्रकाश डाल रहे हैं।

पहली मोहर्रम की मजलिस को हुसैनिया नौतामीर अमहट में मौलाना गजनफर अब्बास ने मजलिस को खेताब किया। उन्होंने कहा कि हजरत नूह अलैहिस्सलाम अल्लाह के नबी थे। जब दीन की तबलीग के लिए निकलते थे तो उनके दुश्मन उनपर इतना पत्थर मारते थे कि वे जमी हो जाते थे। जिब्रील अमीन (फरिश्ता) आकर उनके जख्म को साफ करके अपने परों को उनके शरीर पर रगड़ देते थे तो वह ठीक हो जाते थे। मगर जब हुसैन पैदा हुए तो खुदा ने आसमान के सारे फरिश्तों को हुक्म दिया कि तुम सब मोहम्मद साहब के पास जाकर मुबारकबाद पेश करो। उन्ही फरिश्तों में एक फरिश्ता था जो खुदा की तरफ से सजा पाया हुआ था। खुदा ने नाराज हो कर उसके बाल और पर को जला दिया था। वह एक वादी में पड़ा था। उसको फरिश्तों ने मोहम्मद साहब के सामने पेश किया तो मोहम्मद साहब ने उससे कहा तुम अपने को हुसैन के झूले को छुआ करो। उसका नाम फितरूस था। उसने जैसे ही गहवारे को छुआ उस पर जो ग्रह अजाब था हट गया। उसके बाल पर निकल आए। वह कहने लगा मेरे बराबर कौन है। अब मुझे हुसैन ने पर दिये हैं । अब इसे कोई नहीं ले सकता। हुसैन जिसे माफ कर दें उसे खुदा माफ कर देता है।

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