सूखा पड़ा तालाब, प्यास से तड़प रहे पशु-पक्षी
Sultanpur News - करौंदीकला के विकास खंड क्षेत्र के गांवों में तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं। बारिश का पानी तालाबों में नहीं पहुंच रहा है, जिससे जल संकट बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तालाबों की गहरी खुदाई और जल संरक्षण की मांग की है। विशेषज्ञों के अनुसार, जल जागरूकता और वर्षा जल संचयन से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

करौंदीकला, संवाददाता। विकास खंड क्षेत्र के अधिकांश गांवों में तालाब अब पूरी तरह सूख चुके हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि जहां कभी सालभर पानी लबालब भरा रहता था, वहीं अब फटी हुई धरती, सूखी घास और धूल का गुबार जल संकट की भयावह तस्वीर बयां कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि तालाबों का निर्माण और रखरखाव इस प्रकार किया गया है कि बारिश का पानी उनमें पहुंच ही नहीं पाता। नतीजतन, थोड़ी बहुत वर्षा होने के बावजूद तालाब सूखे के शिकार हो गए हैं। जिम्मेदारों की उदासीनता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यह तालाब कभी गांव के पशुओं, पक्षियों और किसानों के लिए जीवनरेखा हुआ करता था।
यहां से न केवल मवेशियों की प्यास बुझती थी, बल्कि किसानों को सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी मिल जाता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। पानी के अभाव में पशु इधर-उधर भटक रहे हैं और पक्षियों की चहचहाहट भी मानो थम सी गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कम वर्षा, गिरता भूजल स्तर और तालाबों की नियमित सफाई व संरक्षण का अभाव इस संकट की प्रमुख वजह हैं। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह समस्या और विकराल रूप लेती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि तालाबों की गहरी खुदाई कराई जाए, वर्षा जल संचयन की समुचित व्यवस्था की जाए और आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में जल संकट भयावह स्थिति में पहुंच सकता है।जल संरक्षण ही एकमात्र विकल्प : विशेषज्ञों का मानना है कि गांव स्तर पर तालाबों का संरक्षण, वर्षा जल संचयन और जल के प्रति जनजागरूकता ही इस समस्या का स्थायी समाधान है। यह केवल एक तालाब का मामला नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के अस्तित्व से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है।
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