
युगों तक श्रीकृष्ण, सुदामा की मित्रता से लोगों को मिलेगी प्रेरणा : पं घनश्याम
संक्षेप: Sultanpur News - मोतिगरपुर में श्रीमद्भागवत कथा में पं घनश्याम द्विवेदी ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का मार्मिक प्रसंग सुनाया। सुदामा ने विपत्ति में अपने मित्र श्रीकृष्ण का साथ दिया और उनके लिए कठिनाइयों का सामना किया। कथा में सुदामा की समर्पण और मित्रता से प्रेरणा लेने की बात की गई।
मोतिगरपुर, संवाददाता। मित्रता भगवान श्रीकृष्ण सुदामा जैसी होनी चाहिए। बचपन में गुरुकुल आश्रम ऋषि संदीपन महाराज से शिक्षा ग्रहण के समय जगंल में लकड़ी काटने के दौरान मिले श्रापित के चने को स्वयं खाकर सुदामा निर्धन हो गए। लेकिन अपने मित्र श्रीकृष्ण को बचा लिया। युगांतर तक उनकी मित्रता से लोगों की प्रेरणा मिलती रहेगी। श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास पं घनश्याम द्विवेदी ने भक्तों को भगवान कृष्ण सुदामा के कथा का मार्मिक प्रसंग प्रस्तुत रसास्वादन करते हुए कहा कि मित्र वही है जो विपदा में भी मित्र का साथ निभाए। उन्होंने कहा पत्नी सुशीला के कहने पर सुदामा अपने बाल सखा द्वारिकाधीश से मिलने पहुंच गए।

वादक यंत्र पर घनश्याम द्विवेदी ने भगवान कृष्ण ने मित्र सुदामा मिलन पर मार्मिक भजन, पानी परात को हाथ छुयो नहीं, नयन के जल से पग धोए सुनाकर भक्तों को भाव व्हील कर दिया। सुदामा का पुटकी से चावल लेकर भगवान कृष्ण ने मित्र सुदामा को धन- वैभव से परिपूर्ण कर दिया। भगवान कृष्ण सुदामा की मित्रता से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। अंत में सूर्यनाथ त्रिपाठी सपत्नीक व्यास पीठ की आरती उतारी। कथा में पूर्व मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्र के पुत्र प्रमोद मिश्र, पूर्व कैबिनेट मंत्री पंडित जय नारायण तिवारी के पुत्र डॉ मुकेश तिवारी, पूर्व विधानसभा प्रत्याशी लक्ष्मीकांत मिश्र, अपूर्व मंगलम तिवारी, बैजनाथ त्रिपाठी, दूधनाथ त्रिपाठी, प्रशांत त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

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