
प्रेम से युक्त भक्ति से रीझते हैं भगवान : धीरज कृष्ण शास्त्री
संक्षेप: Sultanpur News - कुड़वार में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन, आचार्य श्री धीरज कृष्ण शास्त्री ने रुक्मिणी विवाह का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि रुक्मिणी के प्रेम पत्र से प्रभावित होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें अपनी पत्नी मानकर विवाह किया। विवाह धूमधाम से संपन्न हुआ जिसमें कई श्रद्धालु उपस्थित थे।
कुड़वार, संवाददाता । प्रेम से युक्त भक्ति पर भगवान भक्त के वश में हो जाते हैं। उक्त बातें पूरे बंधन उपाध्याय खादर बसंतपुर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को आचार्य श्री धीरज कृष्ण शास्त्री अयोध्या ने कही। कथा के छठे दिन कथा व्यास ने गोपी उद्धव संवाद व रुक्मिणी विवाह का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण उद्धव को गोपियों का हालचाल लेने नंदगांव भेजा तो देखा कि गोपियां कृष्ण के वियोग में व्याकुल सी हो गयी हैं। वहां उद्धव को भक्ति में प्रेम का एहसास हुआ। रूक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि रुक्मिणी के भाई रुक्मि द्वारा उनकी शादी शिशुपाल से तय कर दी गयी थी।

जो रूक्मिणी को स्वीकार नहीं था। वह भगवान कृष्ण को अपना पति मान चुकी थी। रुक्मिणी के प्रेम पत्र से प्रभावित होकर कृष्ण भगवान ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने का निश्चय किया और गौरी पूजन के समय मंदिर के पास पहुंच कर रुक्मिणी को द्वारका ले गए। द्वारका पहुंचने के बाद श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विधि-विधान पूर्वक धूमधाम से विवाह संपन्न हुआ। कथा पंडाल में कृष्ण, रूक्मिणी की झांकी प्रस्तुत की गयी। मुख्य यजमान राम अक्षयवर उपाध्याय, अजय कुमार उपाध्याय, हनुमान प्रसाद, दिवाकर उपाध्याय, विनोद कुमार उपाध्याय, सुभाष उपाध्याय, ने विवाह में पांव पूजकर आरती उतारी। उक्त अवसर पर दयाराम अग्रहरी, विजय कुमार पाठक, सहित काफी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।

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