यूपी के इस युवा के स्टार्टअप का कमाल, खुद के साथ दूसरों के लिए भी खोली रोजगार की राह

Yogesh Yadav पीलीभीत, संवाददाता
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उत्तर प्रदेश में बरेली के 31 वर्षीय सूरज सागर (राना) ने स्टार्टअप की दुनिया में मिसाल पेश की है। बीटेक करने के बाद 30 हजार की नौकरी छोड़कर उन्होंने अपना खुद का काम शुरू किया और आज आठ परिवारों का सहारा भी बने हुए हैं।

यूपी के इस युवा के स्टार्टअप का कमाल, खुद के साथ दूसरों के लिए भी खोली रोजगार की राह

कहते हैं कि जब मन में कुछ करने की इच्छा और दृढ़ विश्वास हो तो रास्ते खुद बनते चले जाते हैं। यूपी के बरेली में ऐसा ही एक वाक्या शहर के आवास विकास कॉलोनी निवासी 31 वर्षीय सूरज सागर (राना) के साथ हुआ है। सीमित संसाधनों में पले-बढ़े सूरज ने न केवल अपनी जिंदगी की दिशा बदली, बल्कि आज वे कई परिवारों के लिए रोजगार और उम्मीद का जरिया बन चुके हैं।

सूरज सागर ने आर्थिक तंगी के बावजूद चार साल पहले आईएफटीए से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्हें 30 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिली, लेकिन यह नौकरी उनके सपनों और आत्मसंतुष्टि के अनुरूप नहीं थी। कुछ समय बाद उन्होंने साहसिक निर्णय लेते हुए नौकरी छोड़ दी और खुद का काम शुरू करने का निश्चय किया। स्टार्टअप की राह आसान नहीं थी।

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संसाधनों की कमी और समाज की शंकाओं के बीच सूरज ने एक वाहन खरीदा और उसे मॉडिफाई कर मोबाइल फूड वैन में बदल दिया। शुरुआत में लोगों ने उनके इस कदम पर सवाल उठाए, लेकिन सूरज अपने फैसले पर अडिग रहे। उन्होंने अपनी जमा पूंजी लगाकर दाल, पाव भाजी, पनीर टिक्का चाप जैसे व्यंजन तैयार करने शुरू किए। धीरे-धीरे उनके स्वाद और गुणवत्ता की चर्चा पूरे शहर में होने लगी।

आज उनकी मोबाइल वैन के व्यंजन लोगों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। उनका एक स्लोगन भी लोगों के बीच खूब प्रचलित हो गया है- ‘किसी और से धोखा खाने से अच्छा है, बीटेक वाले की दाल और पाव भाजी खाओ।’ यह टैगलाइन उनके काम की पहचान बन चुकी है। सूरज का यह स्टार्टअप अपने स्वाद के लिए जाना जाता है। वे अलग-अलग स्थानों पर जाकर साफ-सुथरे और आकर्षक तरीके से भोजन तैयार कर ग्राहकों को परोसते हैं।

शिक्षित युवाओं के लिए बने प्रेरणा

सूरज सागर की यह कहानी केवल एक व्यापार शुरू करने की नहीं, बल्कि शिक्षित युवाओं की मानसिकता में बदलाव लाने की भी है। अक्सर इंजीनियरिंग या बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद युवा केवल व्हाइट-कॉलर जॉब या बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों के पीछे भागते हैं, लेकिन सूरज ने साबित किया कि अगर काम में ईमानदारी और गुणवत्ता हो तो कोई भी व्यवसाय छोटा नहीं होता। सूरज बताते हैं कि मोबाइल वैन होने के बावजूद वे खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले मसालों और तेल की गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं करते, यही वजह है कि उनकी पाव भाजी और दाल का स्वाद लोगों की जुबान पर चढ़ गया है।

आठ लोगों को दे रहे नियमित रोजगार

आज सूरज सागर अकेले नहीं हैं। उनके साथ आठ लोगों की टीम काम कर रही है, जिन्हें वे नियमित वेतन देते हैं। वे आयकर रिटर्न भी भरते हैं और सालाना पांच से सात लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं। सूरज बताते हैं कि शुरुआत में चुनौतियां बहुत थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अब उन्हें इस बात की खुशी है कि वे न केवल खुद आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं।

Yogesh Yadav

लेखक के बारे में

Yogesh Yadav

योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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