यूपी में दारोगा से 35 मिनट में 7 लाख की ठगी; बर्थडे पर तगड़ा झटका, 3 खातों से उड़ी रकम
बहराइच में साइबर ठगों ने मोतीपुर थाने के दरोगा संजीत कुमार सिंह के जन्मदिन पर उनके मोबाइल को हैक कर 35 मिनट में तीन खातों से करीब 6.93 लाख रुपये उड़ा दिए। दरोगा ने ओटीपी साझा करने या संदिग्ध ऐप डाउनलोड से इनकार किया। बैंक हेल्पलाइन से रकम होल्ड कराने की कोशिश नाकाम रही।

यूपी के बहराइच में साइबर ठगों ने मोतीपुर थाने में तैनात दरोगा संजीत कुमार सिंह को उनके जन्मदिन पर ही अपना शिकार बना लिया। ठगों ने मोबाइल हैक कर महज 35 मिनट में उनके तीन खातों से करीब सात लाख रुपये पार कर दिए। पीड़ित ने समय रहते संबंधित बैंकों की हेल्पलाइन पर संपर्क कर रकम होल्ड करने की गुहार लगाई, लेकिन खाते फ्रीज नहीं हो सके। इससे बैंकिंग व्यवस्था के उन दावों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, जिनमें संदिग्ध लेनदेन पर तत्काल कार्रवाई की बात कही जाती है दरोगा के मुताबिक अज्ञात साइबर ठगों ने महाराजगंज स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते से 35 मिनट में 11 बार में कुल 6,92,550 रुपये निकाल लिए। रकम सिटी बैंक और यस बैंक के खातों में ट्रांसफर की गई।
मोबाइल हैक करके दारोगा से 7 लाख ठगे
दारोगा का कहना है कि उन्होंने न तो कोई संदिग्ध ऐप डाउनलोड किया और न ही किसी को ओटीपी बताया। इसके बावजूद खाते से रकम निकल गई। ठगी का पता चलते ही उन्होंने सिटी बैंक की हेल्पलाइन पर फोन कर ट्रांजैक्शन रोकने और रकम होल्ड करने को कहा। आरोप है कि बैंक की ओर से बैंक खुलने के बाद कार्रवाई की बात कही गई। इसी तरह यस बैंक के मैनेजर से भी संपर्क किया गया, लेकिन समय रहते रकम होल्ड नहीं की जा सकी। देखते ही देखते पूरी रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर हो गई। मामले में दरोगा की तहरीर पर मोतीपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल मोबाइल नंबर को भी जांच के दायरे में लिया है। साइबर सेल बैंक खातों की डिटेल, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और रकम जिन खातों में गई, उनका ब्योरा खंगाल रही है।
साइबर ठग नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे
साइबर अपराधी नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर बिना ओटीपी साझा किए भी खातों से रकम निकालने में सफल हो रहे हैं। साइबर थाने में औसतन रोज करीब दस पीड़ित शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। जिले में पिछले छह माह में करीब 50 मामलों में ही पीड़ितों की रकम वापस हो सकी है। फखरपुर थाने में 20 मार्च को साइबर ठगी के मामले में एक शिक्षक समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। मामला हाईप्रोफाइल होने के चलते इसकी जांच एसआईटी को सौंपी गई है। हालांकि अभी तक जांच किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। पीड़ित शिक्षक कार्रवाई के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है।
नहीं थम रहे साइबर ठगी के मामले
इस मामले में बड़ा सवाल है कि खातों से अचानक बड़ी रकम ट्रांसफर होने के बावजूद संबंधित बैंकों की ओर से तत्काल सतर्कता क्यों नहीं बरती गई। पीड़ित का आरोप है कि सूचना देने के बाद भी रकम होल्ड नहीं की गई। खास बात यह है कि कम समय में बड़ी रकम ट्रांसफर होने के बावजूद संदिग्ध लेनदेन पर तत्काल रोक नहीं लग सकी।


