
यूजी-पीजी में RSS की गौरवगाथा पढ़ेंगे छात्र, इस यूनिवर्सिटी के सेलेबस में शामिल होगा इतिहास
प्रो. सत्यकाम ने कहा कि आरएसएस और भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच गहरा संबंध है। संघ की विचारधारा केवल धार्मिक या दार्शनिक चिंतन तक सीमित नहीं है। इसमें सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक मूल्यों का भी समावेश है। बकौल प्रो. सत्यकाम संघ वसुधैव कुटुम्बकम, सहिष्णुता, विविधता, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी पर बल देता है।
UPRTOU: उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (मुविवि) के पाठ्यक्रम में अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का इतिहास भी पढ़ाया जाएगा। कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह कदम भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण होगा। संघ के स्वयंसेवक आपदाओं के समय, चाहे वह कैसी भी परिस्थिति क्यों न रही हो, समाज में आगे की पंक्ति में खड़े रहे हैं।

प्रो. सत्यकाम ने बताया कि आरएसएस और भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच गहरा संबंध है। संघ की विचारधारा केवल धार्मिक या दार्शनिक चिंतन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक मूल्यों का भी समावेश है। बकौल प्रो. सत्यकाम संघ वसुधैव कुटुम्बकम, सहिष्णुता, विविधता, आत्मनिर्भरता और स्वदेशी पर बल देता है।
इसी भावना को प्रोत्साहन देने के लिए आरएसएस का इतिहास विश्वविद्यालय के यूजी-पीजी पाठ्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भरता की दिशा में यह प्रयास युवाओं के लिए प्रेरक होगा। भारतीय जीवनशैली परंपरागत मूल्यों, सामाजिक समरसता और आत्मीयता पर आधारित है, जो मानवीय मूल्यों के विकास में सहायक है।
युवाओं में राष्ट्रीयता और विकसित भारत का भाव होगा जागृत
कुलपति ने विश्वास जताया है कि इस निर्णय से छात्रों में राष्ट्रीयता की भावना और विकसित भारत की अवधारणा को नई ऊर्जा मिलेगी। भारतीय जीवनशैली परंपरागत मूल्यों, सामाजिक समरसता, परस्पर स्नेह एवं आत्मीयता पर आधारित है। मानवीय मूल्यों के विकास एवं आदर्श के उन्नयन में भारतीय जीवन शैली की महत्वपूर्ण उपादेयता है। बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना आज से सौ वर्ष पहले वर्ष 1925 में केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी।





