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यूपी: योगी सरकार ने बढ़ाई हिंदी संस्थान के पुरस्कारों की धनराशि, अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर नए पुरस्‍कार की शुरुआत

मुख्‍य संवाददाता ,गोरखपुर Published By: Ajay Singh
Sat, 19 Jun 2021 05:53 PM
यूपी: योगी सरकार ने बढ़ाई हिंदी संस्थान के पुरस्कारों की धनराशि, अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर नए पुरस्‍कार की शुरुआत

उत्‍तर प्रदेश की योगी सरकार ने साहित्य और साहित्यकारों का मान बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के पुरस्कारों की धनराशि में भारी वृद्धि की है। साथ ही, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में अटल बिहारी वाजपेयी साहित्य सम्मान नामक नया पुरस्कार भी शुरू किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में यह दूसरी बार है, जब हिंदी साहित्य के क्षेत्र में पुरस्कारों की संख्या और पुरस्कार की धनराशि में बढ़ोत्तरी की गई है। 

उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने इस वर्ष से पुरस्कारों की संख्या 21 से बढ़ा कर 22 कर दी है। अटल बिहारी वाजपेयी की याद में शुरू नया पुरस्कार 5 लाख रुपये का होगा। यही नहीं, संस्थान ने प्रचलित पुरस्कारों की धनराशि में भी 50 हजार से लेकर 3 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी की है। इससे राज्य सरकार के खजाने पर 37 लाख 50 हजार रुपये का अतिरिक्त व्यय भार आया है। पूर्व में 21 पुरस्कारों के लिए 01 करोड़ 25 लाख रुपये की धनराशि खर्च होती थी जो अब 22 पुरस्कारों के लिए 01 करोड़ 62 लाख 50 हजार रुपये हो जाएगी। नए पुरस्कार के अलावा सरकार ने सबसे अधिक वृद्धि भारत भारती सम्मान की धनराशि में की है। इस पुरस्कार की धनराशि 05 लाख से बढ़ाकर 08 लाख कर दी गई है।

हिंदी गौरव सम्मान, लोहिया साहित्य सम्मान, महात्मा गांधी साहित्य सम्मान, पं दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान, अवंतीबाई साहित्य सम्मान व राजर्षि टण्डन सम्मान के लिए पुरस्कार राशि 04 लाख रुपये से 05 लाख और अन्य 13 अन्य पुरस्कारों की धनराशि 02 लाख से बढ़ाकर 2.50  लाख की गई है। इन पुरस्कारों में साहित्य भूषण सम्मान 20 साहित्यकारों को, हिंदी विदेश प्रसार सम्मान 02, सौहार्द सम्मान 15 और विश्वविद्यालय स्तरीय सम्मान 02 लोगों को मिलता है। 

पुरस्कार                पूर्व की धनराशि  नई धनराशि     
भारत भारती सम्मान -5 लाख -8 लाख
हिंदी गौरव सम्मान-4 लाख-5 लाख
लोहिया साहित्य सम्मान-4 लाख-5 लाख
महात्मा गांधी साहित्य सम्मान-4 लाख-5 लाख
पं दीनदयाल उपाध्याय साहित्य सम्मान-4 लाख-5 लाख
अवंतीबाई साहित्य सम्मान-4 लाख-5 लाख
राजर्षि टण्डन सम्मान-4 लाख-5 लाख
साहित्य भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाख
लोक भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाख
कला भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाख
विद्या भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाख
विज्ञान भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाख
पत्रकारिता भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाख
प्रवासी भारतीय हिंदी भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाख
हिंदी विदेश प्रसार सम्मान-2 लाख-2.5 लाख
बाल साहित्य भारती सम्मान-2 लाख-2.5 लाख
मधु लिमये साहित्य सम्मान-2 लाख-2.5 लाख
पं श्रीनारायण चतुर्वेदी साहित्य सम्मान-2 लाख-2.5 लाख
विधि भूषण सम्मान-2 लाख-2.5 लाख
सौहार्द सम्मान-2 लाख-2.5 लाख
विश्वविद्यालय स्तरीय सम्मान-2 लाख-2 लाख

‘‘सीएम योगी आदित्यनाथ का कला एवं साहित्य के प्रति अनुराग, साहित्यकारों के प्रति उनका सम्मान और सह्दयता किसी से छुपी नहीं है। वे पदने संस्थान के मुखिया भी है। उन्होंने कार्यकाल में दो बार न केवल पुरस्कार की संख्या बढ़ाई, पुरस्कार की धनराशि में इजाफा भी किया। संस्थान की ओर से दिए एक प्रस्ताव पर विचार करते हुए नए पुरस्कार भी शुरू किए। यह साहित्य एवं साहित्यकारों के प्रति उनकी संवेदनशीलता ही है। साहित्य जगत एवं हिन्दी संस्थान की बड़ी उपलब्धि है जिसके लिए हम सब उनके आभारी हैं। 
डॉ सदानंद गुप्त, कार्यकारी अध्यक्ष हिन्दी साहित्य संस्थान उत्तर प्रदेश

‘‘साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में बढ़ोत्तरी के लिए सरकार के इस प्रयासों की सराहना करनी चाहिए। ऐसे पुरस्कार इन क्षेत्रों में कर्म कर रहे लोगों को और कर्म करने की प्रेरणा देते हैं। उनके मन में यह भाव भी रहता है कि वे साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में अच्छा कार्य करेंगे तो उन्हें भी ऐसे पुरस्कार मिलेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह पहल स्वागत योग्य है।’’
डॉ विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, साहित्यकार, पूर्व अध्यक्ष साहित्य अकादमी

‘‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने कार्यकाल में संस्थान के पुरस्कारों की संख्या में इजाफा किया। अब पुरस्कार की धनराशि भी बढ़ा दी है, स्पष्ट है कि वे प्रदेश में कला एवं साहित्य के संरक्षण के साथ उसके लिए प्रेरक माहौल भी देना चाहते हैं। इन कदमों से रचनाधर्मिता और मौलिकता का विकास होगा। युवा साहित्य सृजन के प्रति उत्साहित होंगे। ’’
डॉ अनिता अग्रवाल, साहित्यकार

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