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3 जून, 2020|7:58|IST

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World Turtle Day: गोरखपुर के परगापुर ताल में बनेगा कछुआ संरक्षण केंद्र 

गोरखपुर वन प्रभाग के फरेंद्रा रेंज के परगापुर तालाब में मगरमच्छ और कछुआ संरक्षण केंद्र बनाया जाएगा। इसके लिए एक करोड़ रुपये की परियोजना बना कर डीएफओ अविनाश कुमार ने कैम्पा परियोजना के अंतर्गत शासन को मंजूरी के लिए भेजा है। उम्मीद है कि 50 लाख रुपये मौजूदा और 50 लाख अगले वित्त वर्ष में मिल जाएंगे। 

मुख्यालय लखनऊ भेजे प्रस्ताव के मुताबिक परगापुर तालाब 69 हेक्टेयर में है। लेकिन उचित रखरखाव के अभाव में काफी उथला हो गया है। परियोजना के मुताबिक के पांच हेक्टेयर के पैच को लेकर ड्रेजिंग कर दो मीटर गहराई में मिट्टी निकाली जाएगी। इसी मिट्टी से दो मीटर का बंधा और तालाब के बीच में माऊट बनाए जाएंगे। इन माऊंट पर यहां के पर्यावरण के अनुकूल बबूल के पौधे लगाए जाएंगे। माउंट पर मगरमच्छ और कछुए बाहर निकल कर बैठेंगे तो दर्शकों को दूर से दिखाई भी देंगे। बबूल के पौधे को पक्षी भी अपना बसेरा बनाने के लिए पसंद करते हैं। 

2.50-2.50 हेक्टेयर के दो हिस्सों के बीच जाली लगाई जाएगी। ताकि कुछए और मगरमच्छ एक दूसरे के हिस्से में न जा पाएं। लखनऊ के कुकरैली मगरमच्छ संक्षण एवं प्रजनन केंद्र से मगरमच्छ ला कर रखे जाएंगे। दूसरे हिस्से को कछुआ संरक्षण केंद्र बनाए जाएंगे जिसमें वाराणसी के चदौली जिले की टर्टल सेंचयुरी से साफ्ट सेल्ड टर्टल प्रजाति के कछुए लाए जाएंगे। इसके अलावा यहां वॉच टॉवर और इंटरपटेशन सेंटर का निर्माण भी होगा। भविष्य में यहां नौकायन केंद्र बनाने की योजना भी है।

इको टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
गोरखपुर-सोनौली मार्ग पर महराजगंज जिले की फरेंदा रेज में स्थित यह ताल इको-टूरिज्म के रूप में न केवल कुछ लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार की संभावना प्रदान करेगा। बल्कि वन्यजीव संरक्षण के विभाग के मूल काम को भी आगे बढ़ा पाएगा। इसकी सफलता कुछ और तालाबों के संरक्षण और उनमें भविष्य की योजनाएं बनाने के लिए प्रेरित करेंगी। प्रतिष्ठित दुर्गा मंदिर ‘लेहडा देवी मंदिर’ से सिर्फ 8 किलोमीटर की दूरी और सोनौली मार्ग से सिर्फ 10 मिनट की दूर स्थित यह ताल इको टूरिज्म का सेंटर बन सकेगा। 

स्थानीय पयर्टकों के साथ नेपाल से आने जाने वाले देशी विदेशी पयर्टकों को भी आकर्षित करेगा। परगापुर ताल में अवैध रुप के काटी गई लकड़ियां छिपाने के साथ अवैध शराब के कारोबार माफियाओं द्वारा किया जाता है। लोगों की आमदरफ्त बढ़ने से ऐसे कार्यो पर भी रोक लगेगी। बल्कि देशी-विदेशी पक्षियों के सहज आगमन को बढ़ावा मिलने के साथ ही इसे पक्षी बिहार के रूप में विकसित करने की संभावनाएं भी बलवती होंगी।

‘उच्चाधिकारियों से चर्चा के पश्चात कैम्पा योजना के अंतर्गत प्रोजेक्ट बना मंजूरी के लिए भेजा गया है। मुझे यकीन है कि इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ ही तालाब और वन्य जीव के संरक्षण के लिए इसे मंजूरी मिल जाएगी। इसके विकसित होने से स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार की संभावनाएं भी बलवती होंगी।’
अविनाश कुमार, डीएफओ गोरखपुर

150 साल तक जीते हैं कछुए 
दुनिया भर में 23 मई 2014 को विश्व कछुआ दिवस मनाया जा रहा है। लेकिन यह कम ही लोग जानते हैं कि कछुए पृथ्वी पर सबसे ज्यादा लम्बी उम्र तक जीवित रहने वाले प्राणी हैं। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ आर के सिंह कहते हैं कि 150 साल से अधिक उम्र तक कछुए जिंदा रहते हैं। 

विश्व कछुआ दिवस कछुओं की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करने एवं उनके संरक्षण के दृष्टि से विश्व भर में मनाया जाता है। अकेले भारत में कछुए की 29 प्रजातियां पाई जाती है जिनमें 14 अकेले गंगा में मिलती हैं। गंगा की सफाई में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है, इनके बगैर नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। 

विश्व कछुआ दिवस मनाने की शुरूआत 1990 में हुई थी। तब से यह हर साल मनाया जाता है। कछुआ दिवस पर डीएफओ अविनाश कुमार ने कहा कि लोगों को कछुए दुकान से नहीं खरीदना चाहिए। इससे उनके अवैध व्यापार को समर्थन मिलता है। बल्कि कछुए को उनके प्राकृतिक आवास स्थल पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने दुख जताया कि आज भी बड़ी संख्या में अलग अलग कारणों से कछुओं की तस्करी होती है। 

कछुओं की प्रजाति विश्व की सबसे पुरानी जीवित प्रजातियों (लगभग 200 मिलियन वर्ष) में से एक है। ये प्राचीन प्रजातियां स्तनधारियों, चिड़ियों ,सांपों और छिपकलियों से भी पहले धरती पर अस्तित्व में आ चुकी थीं कछुए इतने लंबे समय तक सिर्फ इसलिए खुद को बचा सके क्योंकि उनका कवच उन्हें सुरक्षा प्रदान करता है।

निर्माणाधीन प्राणि उद्यान में संरक्षित होंगे कछुए
निर्माणाधीन शहीद अशफाक उल्लाह खा प्राणि उद्यान में कछुओं के दो पाण्ड बनाए जा रहे हैं। इन पाण्ड में छोटे साइज के 30-30 और बड़े साइज के 7-7 कछुए रह सकते हैं। इन पाण्ड में कानपुर प्राणी उद्यान से रेयर कछुआ प्रजाति साल कछुआ या बाटागुर कछुआ भी लाए जाने की योजना है। इसके अलावा यहां स्पॉटेड पोंड टर्टल, एशियाई हिल टर्टल, कटहवा समेत अन्य प्रजाति के कछुए रखे जाएंगे।

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  • Web Title:World Turtle Day turtle protection center will be developed in pagrapur tal of gorakhpur