World Haemophilia Day whatsapp Group stopping bleeding from injury - विश्व हीमोफीलिया दिवस: चोट से खून बहना रोक रहा व्हाट्सएप ग्रुप DA Image

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विश्व हीमोफीलिया दिवस: चोट से खून बहना रोक रहा व्हाट्सएप ग्रुप

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व्हॉट्सएप पर आप न जाने कितने ग्रुप से जुड़े होंगे जिनमें आने वाले कई मैसेज आपको अजीबोगरीब और गैर जरूरी लगते होंगे। लेकिन, इस ग्रुप के बारे में जानकर आपको अच्छा लगेगा। यह सभी को व्हॉट्सएप ग्रुप को जिन्दगी के लिए उपयोगी बनाने को प्रेरित भी करेगा। ये हीमोफीलिया सोसाइटी का व्हॉट्सएप ग्रुप है जिसके सदस्य इससे जुड़े किसी भी मरीज को चोट लगने का मैसेज मिलते ही उसे जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचवाने में जुट जाते हैं।

इस ग्रुप के सदस्य हीमोफीलिया की बीमारी से पीड़ित मरीज और उनके अभिभावक हैं। मुरादाबाद में अभी तक, इस ग्रुप से अस्सी सदस्य जुड़ चुके हैं। ग्रुप की शुरुआत करने वाले डॉ.आलोक कुमार मिश्रा ने बताया कि इसमें हीमोफीलिया से पीड़ित मरीज अपनी पीड़ा, अनुभव दूसरों के साथ साझा करके सहयोग कर रहे हैं। मुरादाबाद के जिला अस्पताल में नोडल अधिकारी हीमोफीलिया डॉ.सतीश कुमार सक्सेना ने बताया कि व्हॉट्सएप ग्रुप पर मरीजों के बीच अनुभवों को साझा करने से इस बीमारी से जुड़ी कई भ्रांतियां दूर करने में मदद मिल रही है।

फैक्टर चढ़ने तक बहता जाता है खून
सामान्य लोगों को शरीर में चोट लगने पर खून बहता है, लेकिन थोड़ी ही देर में थक्का बनने पर खून बहना रुक जाता है। लेकिन, हीमोफीलिया के मरीज में खून बहना नहीं रुकता। अस्पताल में पहुंचकर फैक्टर चढ़वाने पर ही खून बहना बंद होता है। दरअसल, हीमोफीलिया की बीमारी खून में फैक्टर की कमी से होती है। किसी में फैक्टर सात, किसी में आठ और किसी में फैक्टर नौ की कमी होती है।   

कोशिशें रंग लाईं, मुमकिन हुआ इलाज़
सोसाइटी के संस्थापक डॉ.आलोक कुमार मिश्रा ने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के साथ ही कुछ जिला अस्पतालों में इसकी सुविधा होने का हवाला देकर इसे मुरादाबाद के जिला अस्पताल में शुरू कराने के लिए शासन से गुहार लगाई। हिन्दुस्तान ने इस मुद्दे को प्रमुखता से आवाज दी। डॉ.मिश्रा का बेटा हीमोफीलिया से पीड़ित है। जिसे हफ्ते में एक बार फैक्टर चढ़ाने की जरूरत पड़ जाती है। 

सावधान...लाइलाज भी हो सकती है बीमारी
जिला अस्पताल के बालरोग विशेषज्ञ एवं नोडल अधिकारी हीमोफीलिया डॉ.सतीश कुमार सक्सेना ने बताया कि हीमोफीलिया के मरीज को चोट लगना खतरनाक है। क्योंकि, खून बहने पर अपने आप नहीं रुकता। बार बार चोट लगना और फिर बार बार फैक्टर चढ़वाना...यह स्थिति कुछ मरीजों को लाइलाज कर सकती है क्योंकि, बहुत ज्यादा फैक्टर चढ़ाने से शरीर में इसके विरुद्ध एंटीबॉडीज बन जाते हैं और फिर फैक्टर असर करना बंद कर देते हैं।

निशुल्क मिल रहा बेहद महंगा इलाज
जिला अस्पताल में हीमोफीलिया के मरीजों को फैक्टर चढ़ाने की सुविधा निशुल्क दी जा रही है। फैक्टर को देश में पाउडर के रूप में इंपोर्ट किया जा रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक हीमोफीलिया से पीड़ित एक वयस्क मरीज में जिसको फैक्टर आठ एक बार में चढ़ाने का खर्च इसकी कीमत के हिसाब से बीस हजार रुपए पड़ता है, जबकि एक बार में फैक्टर नौ चढ़ाने का खर्च 45 हजार रुपए तक पड़ जाता है। जिला अस्पताल में मरीजों को यह निशुल्क लगाया जा रहा है।

जुड़ते चले गए जरूरतमंद मरीज
मुरादाबाद में हीमोफीलिया सोसाइटी की स्थापना करने वाले डॉ.आलोक कुमार मिश्रा ने इससे पीड़ित मरीजों को ढूंढ ढूंढकर उनका निशुल्क इलाज सुनिश्चित कराने की जो मुहिम शुरू की वह अभी तक जारी है। डॉ.मिश्रा बताते हैं कि हीमोफीलिया से पीड़ित मरीज सोसाइटी से लगातार जुड़ रहे हैं और वह व्हॉट्सएप ग्रुप में भी शामिल हो रहे हैं।
 

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