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कब्र से निकाली लाश की गवाही पर पत्‍नी और साले को हुई उम्रकैद, प्रॉपर्टी के लिए जहर देकर किया गया था कत्‍ल 

संपत्ति के लालच में ट्रांसपोर्टर पति की जहर देकर हत्या करने वाली पत्नी और साले को जिला जज की कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों ने वारदात के बाद जौनपुर ले जाकर पति का शव दफना दिया था।

कब्र से निकाली लाश की गवाही पर पत्‍नी और साले को हुई उम्रकैद, प्रॉपर्टी के लिए जहर देकर किया गया था कत्‍ल 
Ajay Singhप्रमुख संवाददाता,कानपुरWed, 21 Feb 2024 09:59 AM
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Life imprisonment to wife for murder of husband: संपत्ति के लालच में ट्रांसपोर्टर पति की जहर देकर हत्या करने वाली पत्नी और साले को जिला जज की कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों ने वारदात के बाद जौनपुर जाकर पति का शव दफना दिया था। कब्र से शव निकालकर पोस्टमार्टम में विसरे की फॉरेंसिक जांच हुई। उसको काफी समय तक सुरक्षित रखा गया। फिर जांच रिपोर्ट में जहर देकर मारने की पुष्टि हुई। इसी आधार उन्हें सजा मिली। अदालत ने दोनों पर 35-35 हजार का अर्थदंड लगाया है। जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा काटनी होगी। आरोपी साला जीजा के साथ ही ट्रांसपोर्ट कंपनी में काम करता था।

डीजीसी क्रिमिनल दिलीप अवस्थी और अपर जिला शासकीय अधिवक्ता ओंकार नाथ वर्मा ने बताया कि जौनपुर कोतवाली निवासी सैय्यद सरदार हुसैन ने नौबस्ता थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। उनके मुताबिक 20 जून 2015 को उनके न्यू सरदार ट्रांसपोर्ट के मालिक बेटे सैय्यद जफर अब्बास उर्फ आबिद हुसैन को उसकी पत्नी प्रयागराज के करेली निवासी नफीस फातिमा उर्फ शमा और साले फराज ने मछरिया में जहर देकर मार दिया है। साला बेटे के साथ ट्रांसपोर्ट का काम ही करता था। आनन-फानन में ससुरालियों ने शव को जौनपुर के सदर इमामबाड़े में दफना भी दिया। मामले में नौबस्ता पुलिस ने पत्नी और साले के खिलाफ चार्जशीट भेजी। कोर्ट के समक्ष मृतक ट्रांसपोर्टर के भाई आरिफ अब्बास और मोहम्मद अब्बास समेत 15 लोगों ने गवाही दी। इसमें संपत्ति की लालच में आए दिन लड़ाई झगड़ा करने की बात भी सामने आई। नौबस्ता पुलिस ने जौनपुर जाकर शव को कब्र से निकाला। फिर उसका पोस्टमार्टम कराया। रिपोर्ट में जहर की पुष्टि भी हो गई। कोर्ट ने सबूतों और गवाह के आधार पर सजा सुनाई। हत्यारे भाई-बहन पर जुर्माना भी लगाया।

पिता और भाइयों की पैरवी से सजा, मिटाएं साक्ष्य
जफर की हत्या का खुलासा पिता और भाइयों की पैरवी से ही हुआ है। जफर के नाम पर कई ट्रक और संपत्ति थी। इसलिए साला व पत्नी को लालच आ गया। वह जफर को रास्ते से हटाकर सब अपने नाम करना चाहते थे। हत्या करने के बाद परिजनों को बिना बताए उन्होंने जफर को दफना दिया था। बिना किसी बीमारी के अचानक जफर की मौत समेत अन्य बिन्दु हत्या को साबित करने में मजबूत आधार बने। इसी पर उन्होंने पैरवी शुरू की।

मौत से एक दिन पहले मृत्यु प्रमाण-पत्र का आवेदन
जफर की मौत 20 जून 2015 को हुई। 21 जून को शव जौनपुर में दफनाया गया। नगर पालिका परिषद जौनपुर में मृत्यु प्रमाण-पत्र लेने के लिए 19 जून को ही आवेदन दे दिया गया था। इस मामले में भी साले व पत्नी के खिलाफ जौनपुर में कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का मुकदमा चल रहा है।

डीजीपी और आईजी के आदेश पर हुई थी रिपोर्ट
परिवार वालों ने तत्कालीन डीजीपी जावेद अहमद और आईजी आशुतोष पांडे से फरियाद लगाई थी। आईजी के आदेश पर तत्कालीन सीओ कन्नौज रणवीर सिंह ने जांच की। उनकी जांच में हत्या की पुष्टि हुई। उनके आदेश पर पत्नी व साले पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज हुई।

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