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Hindi News उत्तर प्रदेशआजादी के 75 साल बाद भी लव मैरिज क्यों स्वीकार नहीं? पुलिस और निचली अदालत पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

आजादी के 75 साल बाद भी लव मैरिज क्यों स्वीकार नहीं? पुलिस और निचली अदालत पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बालिग युगल के प्रेम विवाह पर मुश्किलें पैदा करने वालों को आड़े हाथ लिया है। जालौन के मामले में कोर्ट ने कहा कि आजादी के 75 साल बाद भी प्रेम विवाह की स्वीकार्यता क्यों नहीं है।

आजादी के 75 साल बाद भी लव मैरिज क्यों स्वीकार नहीं? पुलिस और निचली अदालत पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
Yogesh Yadavविधि संवाददाता,प्रयागराजThu, 08 Feb 2024 09:02 PM
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रेम विवाह करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के मामले में कहा कि देश की आजादी के 75 वर्ष बाद भी समाज में ऐसे विवाह की स्वीकार्यता नहीं बन सकी है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कई बार कहा है कि बालिग युगल को वैयक्तिक स्वतंत्रता है। वह अपनी मर्जी से अपना जीवन जी सकते हैं।
कोर्ट ने कहा याची पति-पत्नी की तरह राजी-खुशी से साथ रह रहे हैं। उनके बच्चा भी है। ऐसे में विवाह स्वीकार करने में कोई अवरोध नहीं है। परिवार ने नाबालिग लड़की के अपहरण का केस दर्ज कराया है। पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट पर अदालत ने सम्मन भी जारी किया है। ऐसा मुकदमा चलाने का कोई औचित्य नहीं है।

यह आदेश न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार ने सागर सबिता व अन्य की याचिका पर दिया है। इसी के साथ कोर्ट ने जालौन जिले के नदी गांव थाने में दर्ज एफआईआर के तहत विशेष अदालत पाक्सो एक्ट में विचाराधीन आपराधिक मुकदमे को रद्द कर दिया है। याची का कहना था कि उसने प्रेम विवाह किया है।

इससे लड़की के पिता खुश नहीं थे तो उन्होंने अपहरण करने के आरोप में एफआईआर दर्ज करा दी। याची और उसकी पत्नी अब खुशहाल जीवन जी रहे हैं। ऐसे में आपराधिक मुकदमा चलाने का औचित्य नहीं है। इस पर कोर्ट ने याचिका मंजूर कर ली और आपराधिक मुकदमा रद्द कर दिया।

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