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Hindi News उत्तर प्रदेशनारद राय क्‍यों हुए बागी? अखिलेश यादव की सभा में नाम न लिए जाने से नाराज या बात कुछ और

नारद राय क्‍यों हुए बागी? अखिलेश यादव की सभा में नाम न लिए जाने से नाराज या बात कुछ और

पूर्व मंत्री नारद राय को लेकर पूर्वांचल की सियासत में चर्चाएं गर्म हैं। हर कोई यह जानने को उत्‍सुक है कि आखिर एक समय में पार्टी में खासा रसूख रखने वाले नारद राय अचानक किस बात पर खफा हो गए।

नारद राय क्‍यों हुए बागी? अखिलेश यादव की सभा में नाम न लिए जाने से नाराज या बात कुछ और
Ajay Singhलाइव हिन्‍दुस्‍तान,बलियाTue, 28 May 2024 04:42 PM
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Narad Rai: सातवें चरण के मतदान से चंद रोज पहले समाजवादी पार्टी का साथ छोड़ भाजपा खेमे में जाते दिख रहे पूर्व मंत्री नारद राय को लेकर पूर्वांचल की सियासत में चर्चाएं गर्म हैं। हर कोई यह जानने को उत्‍सुक है कि आखिर सपा संस्‍थापक मुलायम सिंह के यादव के समय में पार्टी के रसूखदार नेता के तौर पर मशहूर नारद राय अचानक किस बात पर खफा हो गए। जाहिर तौर पर उनका गुस्‍सा बलिया के फेफना के कटारिया में पार्टी अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने जनसभा के दौरान दिखा। तब मंच से उनका नाम नहीं लिया गया। जिसका नारद राय बुरा माना। सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ उनकी मुलाकात की तस्‍वीरें सामने आने के बाद माना जा रहा है कि वह जल्‍द ही भाजपा ज्‍वाइन कर सकते हैं। इस मुलाकात के दौरान सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्‍यक्ष ओम प्रकाश राजभर भी मौजूद रहे। 

इस जनसभा के बाद ही नारद राय पार्टी में अपने खिलाफ साजिश की बात करने लगे। बाद में अपने सोशल मीडिया प्‍लेटफार्म 'एक्‍स' पर उन्‍होंने लिखा-'नेताजी ने कहा था अगर अपने लोगों के सम्मान पर आंच आए तो किसी के बगावत कर जाना पर झुकना मत।'  इसके बाद सोमवार को नारद राय ने बलिया में अपने समर्थकों के साथ एक तरह का शक्ति प्रदर्शन किया। उन्‍होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के मंच पर मेरा अपमान हुआ। मैं इसे भूल जाना चाहता था लेकिन जनता ने मुझे कोसा। कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आपका नाम तक नहीं लिया। नारद राय ने कहा, ' मैंने बलिया में विकास के कई काम करवाए। क्या अखिलेश यादव जी मंच से यह नहीं बता सकते थे, कि वे काम नारद राय ने करवाए हैं। पहले भी हमारा अपमान हुआ है। तब अखिलेश यादव ने हमें टिकट दिया और हमें हराने का इंतजाम भी कर दिया था।'

उधर, बलिया में समाजवादी पार्टी की राजनीति पर नज़र रखने वालों का कहना है कि नारद राय अंदर ही अंदर काफी दिनों से नाराज चल रहे थे। उन्‍होंने  प्रचार से भी खुद को दूर रखा था। कहा जा रहा है कि लोकल यूनिट से वह बहुत सहज नहीं थे। इसके बाद जब फेफना में राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने उनका नाम नहीं लिया तो उनका गुस्‍सा भड़क गया। उन्‍हें लगा कि मंच वाली लिस्ट से साजिशन जानबूझकर उनका नाम काटा गया है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि नारद राय खुद चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन पार्टी ने बलिया से सनातन पांडेय को उतार दिया। नारद तभी से कुछ खिन्‍न थे। 

क्‍या पड़ेगा असर 
बलिया से दो बार विधायक रहे नारद राय की भूमिहार समाज में अच्‍छी पकड़ मानी जाती है। ऐन चुनाव के बीच सपा छोड़ भाजपा की ओर जाने को समाजवादी पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी ने बलिया से सनातन पांडेय को अपना उम्‍मीदवार बनाया है। जबकि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के पुत्र नीरज शेखर भाजपा के टिकट पर इस सीट से मैदान में हैं।