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Hindi News उत्तर प्रदेशकौन हैं केएल शर्मा जिनको कांग्रेस ने अमेठी में स्मृति ईरानी से लड़ा दिया, गांधी परिवार से कैसा रिश्ता?

कौन हैं केएल शर्मा जिनको कांग्रेस ने अमेठी में स्मृति ईरानी से लड़ा दिया, गांधी परिवार से कैसा रिश्ता?

UP Lok Sabha Election 2024: कांग्रेस ने अमेठी लोकसभा सीट पर राहुल गांधी की जगह नए प्रत्याशी को दे दी है। आज केएल शर्मा का नाम घोषित किया। शर्मा गांधी परिवार के बेहद करीबी हैं। पढ़ें

कौन हैं केएल शर्मा जिनको कांग्रेस ने अमेठी में स्मृति ईरानी से लड़ा दिया, गांधी परिवार से कैसा रिश्ता?
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,अमेठीFri, 03 May 2024 01:28 PM
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कांग्रेस ने अमेठी लोकसभा सीट पर भी प्रत्याशी का ऐलान कर दिया है। इस बार अमेठी में गांधी परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ रहा है। पिछली बार यहां से उतरे राहुल गांधी को रायबरेली से उतार दिया गया है। अमेठी से कांग्रेस ने केएल शर्मा को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा ने यहां से मौजूदा सांसद स्मृति ईरानी का बहुत पहले ही ऐलान कर दिया था। केएल शर्मा को गांधी परिवार का बेहद करीबी माना जाता है। उनका रिश्ता न सिर्फ अमेठी बल्कि रायबरेली से भी है। रायबरेली में सोनिया गांधी के प्रतिनिधि के रूप में लंबे समय से केएल शर्मा ही कामकाज देख रहे है। 

केएल शर्मा का पूरा नाम किशोरी लाल शर्मा है। मूल रूप से पंजाब के लुधियाना के रहने वाले किशोरी लाल शर्मा ने 1983 में राजीव गांधी के साथ रायबरेली और अमेठी में कदम रखा था। राजीव गांधी की मौत के बाद गांधी परिवार से उनके रिश्ते पारिवारिक हो गए। इसके बाद वह गांधी परिवार के ही हो कर रह गए। 1991 में राजीव गांधी की मौत के बाद कभी शीला कौल के काम को देखते तो कभी सतीश शर्मा के कार्यों को देखने रायबरेली और अमेठी आते जाते रहते थे। 

जब पहली बार सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति में अमेठी गईं तो केएल शर्मा उनके साथ-साथ अमेठी आ गए। जब सोनिया गांधी ने राहुल गांधी के लिए अमेठी सीट छोड़ दी और खुद रायबरेली आ गईं तो केएल शर्मा ने रायबरेली और अमेठी दोनों ही सीटों की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। 

केएल शर्मा रायबरेली और अमेठी दोनों ही सीटों पर कार्यों की देखरेख करने लगे। वक्त के साथ लोग कांग्रेस को छोड़ने लगे लेकिन केएल शर्मा की निष्ठा और वफादारी में कभी कोई कमी नहीं आई। कभी केएल शर्मा बिहार के प्रभारी रहे तो कभी पंजाब कमेटी के सदस्य भी बने। एआईसीसी के मेंबर रहे तो कभी चुनावी बागडोर उनके हाथों में रही।