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क्या है अवैध खनन केस जिसकी फांस में फंसे अखिलेश, 5 साल बाद CBI ने क्यों किया तलब; क्या-क्या हैं आरोप?

Akhilesh Yadav summon in UP Illegal Mining Case : CBI इस मामले में अखिलेश और पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की भूमिका की जांच कर रही है। CBI की FIR पर ED मामले में कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच भी कर रही

क्या है अवैध खनन केस जिसकी फांस में फंसे अखिलेश, 5 साल बाद CBI ने क्यों किया तलब; क्या-क्या हैं आरोप?
Pramod Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 29 Feb 2024 10:18 AM
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Akhilesh Yadav summon in UP Illegal Mining Case : केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पांच साल पुराने अवैध खनन मामले में आज (गुरुवार को) पूछताछ के लिए दिल्ली दफ्तर में बुलाया है। यह मामला उस वक्त का है, जब अखिलेश यादव राज्य के मुख्यमंत्री थे। सीबीआई ने उन्हें इस मामले में आरोपी नहीं बनाया है बल्कि बतौर गवाह पूछताछ के लिए समन जारी किया है। सीबीआई ने अखिलेश यादव को यह समन तब जारी किया है, जब एक-दो महीने बाद लोकसभा चुनाव होने वाले हैं।

क्या है अवैध खनन का मामला
जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब यानी 2012 से 2016 के दौरान राज्य के फतेहपुर, देवरिया, शामली, कौशांबी, सहारनपुर, सिद्धार्थनगर और हमीरपुर जिलों में अवैध खनन के मामले सामने आए थे। उस दौरान गायत्री प्रजापति और उनकी बर्खास्तगी के बाद खुद अखिलेश यादव के पास खनन मंत्रालय का जिम्मा था। आरोप है कि उस दौरान खनन पट्टे जारी करने में ई-टेंडरिंग प्रक्रिया का कथित तौर पर उल्लंघन किया गया था। 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जुलाई 2016 में ही इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने 2 जनवरी, 2019 को इस मामले में 11 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। CBI इस मामले में अखिलेश और उनकी कैबिनेट के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की भूमिका की जांच कर रही है। सीबीआई की एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय भी इस मामले में कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहा है।

क्या-क्या हैं आरोप?
आरोप है कि अखिलेश यादव की सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के प्रतिबंधों के बावजूद अवैध खनन की अनुमति दी थी और अवैध लाइसेंस रिन्यू किए थे। इसके अलावा अखिलेश पर आरोप है कि उन्होंने ई-टेंडरिंग प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए एक ही दिन में 13 खनन परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। यह भी आरोप है कि उनके कार्यकाल में अधिकारियों ने खनिजों की चोरी होने दी, पट्टाधारकों और चालकों से पैसे वसूले।

सीबीआई ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया है कि पूर्व सीएम ने 17 फरवरी 2013 को एक ही दिन में 13 परियोजनाओं को मंजूरी दी थी जो कथित तौर पर ई-टेंडरिंग प्रक्रिया का उल्लंघन है। सीबीआई ने इस मुद्दे की जांच के लिए सात प्रारंभिक जांच रिपोर्टदर्ज की थी, जो एफआईआर की प्रस्तावना है। प्राथमिकी के अनुसार, 2012-13 के दौरान खनन विभाग यादव के पास ही था जिससे जाहिर तौर पर उनकी भूमिका संदेह के घेरे में आ गई। साल 2013 में उनकी जगह गायत्री प्रजापति ने खनन मंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था जिन्हें चित्रकूट निवासी एक महिला द्वारा बलात्कार का आरोप लगाए जाने के बाद 2017 में गिरफ्तार कर लिया गया था।

डीएम पर भी कसा था CBI का शिकंजा
केंद्रीय एजेंसी ने इस मामले में जनवरी 2019 में हमीरपुर की तत्कालीन डीएम बी चंद्रकला समेत 11 लोगों के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। सपा के विधान पार्षद रमेश मिश्रा और संजय दीक्षित के ठिकानों पर भी तब छापा मारा गया था ताकि अवैध खनन से जुड़े दस्तावेज ढूंढ़े जा सकें। सीबीआई ने इस मामले में रमेश मिश्रा, दिनेश कुमार मिश्रा, अंबिका तिवारी, सत्यदेव दीक्षित और उनके बेटे संजय दीक्षित, राम अवतार सिंह, करण सिंह और आदिल खान को भी आरोपी बनाया गया है। ये सभी खनन पट्टा धारक थे।

सपा के आरोप क्या?
समाजवादी पार्टी का आरोप है कि जब 2019 के लोकसभा चुनाव होने थे, तब सीबीआई का इस्तेमाल अखिलेश यादव के खिलाफ इस मामले में किया गया था और जब फिर पांच साल बाद लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं, तो फिर से उसी मामले में उसी एजेंसी द्वारा अखिलेश यादव को तलब किया गया है। सपा नेता इसे चुनावी और सियासी साजिश बता रहे हैं। 

अखिलेश यादव ने लखनऊ में एक निजी समाचार चैनल के कार्यक्रम में कहा, ''सपा सबसे ज्यादा निशाने पर है। साल 2019 में भी मुझे नोटिस मिला था, क्योंकि तब भी लोकसभा चुनाव था। अब जब चुनाव आ रहा है तो मुझे फिर से नोटिस मिल रहा है। मैं समझता हूं कि जब-जब चुनाव आएगा तो नोटिस भी आएगा। यह घबराहट क्यों है?''

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