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Hindi News उत्तर प्रदेशवक्फ बोर्ड का सुनवाई में प्रार्थना पत्र दाखिल न करना दुर्भाग्यपूर्ण, श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

वक्फ बोर्ड का सुनवाई में प्रार्थना पत्र दाखिल न करना दुर्भाग्यपूर्ण, श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद के मामले में चल रही सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकीलों के रवैए पर कड़ी टिप्पणी की है।

वक्फ बोर्ड का सुनवाई में प्रार्थना पत्र दाखिल न करना दुर्भाग्यपूर्ण, श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी
Dinesh Rathourविधि संवाददाता ,प्रयागराज।Thu, 16 May 2024 10:25 PM
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मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद के मामले में चल रही सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकीलों के रवैए पर कड़ी टिप्पणी की है। बोर्ड के अधिवक्ता ने कोर्ट से ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत प्रार्थनापत्र दाखिल करने के लिए समय की मांग की। जिस पर कोर्ट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि वाद ख़ारिज करने की मांग पर 22 फ़रवरी 2024 से लगातार सुनवाई चल रही है और लगभग पूरी हो चुकी है।अब इस स्तर पर बोर्ड के अधिवक्ता प्रार्थनापत्र दाखिल करना चाहते हैं। कोर्ट ने कहा प्रार्थनापत्र आज ही दाखिल किया जाए। इसके बाद और समय नहीं दिया जाएगा।

इससे पूर्व पहले की दलीलों को जारी रखते हुए गुरुवार को हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया कि विवादित संपत्ति के स्वामित्व के संबंध में प्रतिवादी सुन्नी सेंट्रल बोर्ड या ईदगाह की इंतजामिया कमेटी की ओर अब तक कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही पेश किया गया है। यह भी कहा गया कि विवादित संपत्ति में प्रतिवादी के नाम पर कोई बिजली कनेक्शन भी नहीं है। वे अवैध रूप से बिजली का उपयोग कर रहे हैं इसलिए बिजली विभाग ने बिजली के अवैध उपयोग के लिए उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई है।

समयाभाव के कारण कोर्ट ने आगे की सुनवाई के लिए 20 मई की तारीख लगा दी। यह आदेश न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन ने दिया है। हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया कि समझौते में देवता पक्षकार नहीं हैं। समझौता पूजा समिति ने  किया था। आगे कहा कि शाही ईदगाह की संरचना को हटाने के बाद कब्जे के साथ मंदिर की बहाली और स्थायी निषेधाज्ञा के लिए मुकदमा दायर किया गया है। मुकदमे में प्रार्थना से पता चलता है कि ईदगाह की संरचना वहां मौजूद है और प्रबंधन समिति का उस पर कब्जा है।

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