class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

फर्जी शस्त्र लाइसेंस के गैंग से जुड़ा शातिर बिहार से गिरफ्तार

प्रतीक फोटो।

नक्सलियों तक फैले शस्त्र रैकेट में शामिल एक शातिर उपेंद्र सिंह गिरफ्तार कर लिया गया। एटीएस टीम ने उपेंद्र को बिहार एसटीएफ की मदद से मंगलवार को मुंगेर से दबोच लिया। उपेंद्र शहर में पकड़े गए फर्जी लाइसेंस से शस्त्रों की बिक्री के मामले में छह माह से फरार चल रहा था। फर्जी शस्त्र लाइसेंस पर खरीदे गए शस्त्र नक्सलियों और अपराधियों को बेचे जाते थे। 
एटीएस यूपी और बिहार एसटीएफ की संयुक्त टीम ने उपेंद्र को बिहार के मुंगेर जिले के पोलो मैदान के पास से गिरफ्तार किया है। कानपुर यूनिट ने छह माह पहले कूट रचित शस्त्र लाइसेंस पर कानपुर से हथियार खरीदने का भंडाफोड़ किया था। इस कड़ी में ही उपेंद्र की तलाश की जा रही थी। उपेंद्र पर फर्जी लाइसेंस के जरिए कानपुर से कई शस्त्र खरीद कर बिहार में बेचने का आरोप है। आईजी एटीएस असीम अरुण ने बताया कि उपेंद्र ने कानपुर से हथियार खरीदना स्वीकार किया है। उसने पूछताछ में बताया कि साथी राज किशोर राय और कानपुर के शस्त्र विक्रेताओं के नेटवर्क के साथ उसने कई हथियार फर्जी लाइसेंस खरीदे और बिहार में आपूर्ति किए हैं। शस्त्र फर्जी लाइसेंस पर खरीदे गए हथियारों को अपराधियों या नक्सलियों को बेचा जाता था।
यहां पकड़े गए थे शस्त्र विक्रेता 
एटीएस कानपुर यूनिट ने 24 मई 2017 को इस जालसाजी का खुलासा कर लखनऊ में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस कड़ी में 25 जुलाई 2017 को कानपुर में छापेमारी की गई। खन्ना आर्मरी के मालिक विजय खन्ना, एके नियोगी एंड कंपनी के मालिक अमर जीत नियोगी, पूर्वांचल गन हाउस के मालिक जैनुल आब्दीन, जय जवान आर्म्स डीलर के प्रबंधक राजीव शुक्ला को गिरफ्तार किया गया था। इस धरपकड़ में बिहार के जिलों के नाम से बने ट्रांजिट प्रक्रिया के तहत फर्जी लाइसेंस से हथियार बेचने के गोरखधंधा के सबूत भी मिले। असलहा दुकानों के रजिस्टर भी जब्त किए गए। जिलाधिकारी के नेतृत्व में बनी टीम ने इसकी छानबीन भी की गई। आरोप सच पाए गए। 
एटीएस की टीम ने दुकानों की छापेमारी में मिले अभिलेखों की सत्यता की भी पड़ताल की। कानपुर शस्त्र कार्यालय में छानबीन में भी यह पाया गया कि यहां से ट्रांजिस्ट लाइसेंस पर शस्त्र चढ़ाए गए। इस बात की पुष्टि जय जवान आर्म्स के रजिस्टर और अन्य शस्त्र विक्रेताओं के अभिलेखों से भी हुई। एटीएस की छानबीन में आया है कि 2014-2016 के बीच हुए फर्जी बाड़ा में उपेंद्र और मुंगेर जिले के बेलन बाजार निवासी उसके साथी राज किशोर राय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों मुंगेर ही नहीं खगड़िया समेत कई जिलों के फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार करते थे। इन लोगों के पास फर्जी मोहर, अधिकारियों के हस्ताक्षर के नमूने संबंधी साक्ष्य भी एटीएस को मिले हैं।
बिना टीएल के बेचते थे शस्त्र
उपेंद्र और राजकिशोर शस्त्र विक्रेताओं की मदद से फर्जी कागजात के जरिए बिना ट्रांजिट लाइसेंस (टीएल) के शस्त्र बेचते थे। यहां तक कि असलहा खरीदने वाले की आईडी तक नहीं ली जाती थी। फर्जी आईडी लगाकर अधिकार पत्र तक तैयार किया जाता था। 
मूलगंज के होटल में रुकते थे 
छानबीन में यह भी आया है कि पकड़ा गया उपेंद्र मूलगंज चौराहा के पास ही एक होटल में आकर रुकता था। वह यहां राजकिशोर के साथ कई बार रुका। यह होटल एक आर्म्स विक्रेता का ही है। होटल में ठहर कर ही दोनों शातिर दुकानदारों और दलालों की मदद से शस्त्र कार्यालय से टीएल तैयार कराते थे। राजकिशोर को 3 जुलाई 2016 में सिवान में साथियों के साथ दबोचा गया था। 
ट्रांजिट रिमांड पर लाया जाएगा
आईजी एटीएस का कहना है कि उपेंद्र को बिहार से ट्रांजिट रिमांड पर यहां लाया जाएगा। उससे पूछताछ में कई और राज सामने आएंगे। अपराधियों और हथियार की तस्करी से जुड़े नेटवर्क का भी सुराग लगने की उम्मीद है। उपेंद्र को गिफ्तार करने गई में एटीएस एसपी मनीष चंद्र सोनकर, कानपुर इंस्पेक्टर हरीशंकर मिश्रा, उप निरीक्षक उपेंद्र सिंह, अनिरुद्ध दुबे, अन्य पुलिस कर्मचारी संजय सिंह, रवि कुमार, विजय कुमार सचान शामिल थे। 
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Voter associated with gang of fake arms license arrested from Bihar
हिन्दुस्तान शिखर समागम: गृहमंत्री राजनाथ सिंह का स्पेशल इंटरव्यू1984 सिख दंगा : दिल्ली पुलिस को कानपुर में नहीं मिला 15 हत्याओं का रिकार्ड