ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News उत्तर प्रदेशअयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर स्थित मंदिर ही था विष्णु हरि मंदिर, तोड़ने को सदियों तक चला विवाद

अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर स्थित मंदिर ही था विष्णु हरि मंदिर, तोड़ने को सदियों तक चला विवाद

दावा है कि 11 वीं सदी में निर्मित विष्णुहरि मंदिर रामजन्मभूमि पर स्थित था। इसी मंदिर को तोड़े जाने को लेकर सदियों तक विवाद चला। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद का पटाक्षेप कर दिया है।

अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर स्थित मंदिर ही था विष्णु हरि मंदिर, तोड़ने को सदियों तक चला विवाद
Srishti Kunjकमलाकांत सुंदरम,अयोध्याThu, 20 Apr 2023 06:53 AM
ऐप पर पढ़ें

वैष्णव नगरी, अयोध्या में मंदिरों की शृंखला के मध्य सप्त हरियों का भी स्थान है जिनमें विष्णुहरि, चक्रहरि, चन्द्रहरि, धर्महरि, गुप्त हरि, बिल्वहरि व पुण्यहरि शामिल हैं। दावा है कि 11 वीं सदी में निर्मित विष्णुहरि मंदिर रामजन्मभूमि पर स्थित था। इसी मंदिर को तोड़े जाने को लेकर सदियों तक विवाद चला। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद का पटाक्षेप कर दिया है। अयोध्या रीविजिटेड पुस्तक के लेखक एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी आचार्य किशोर कुणाल बताते है विष्णुहरि का शिलालेख एएसआई के कब्जे में है और राज्य संग्रहालय लखनऊ में संरक्षित है। उन्होंने बताया कि  सम्बन्धित शिलालेख के श्लोकों को पढ़ने का अवसर मिला था जिसके अनुसार राम जन्मभूमि पर विष्णुहरि मंदिर था, जिसका निर्माण 11 वीं सदी में गढ़वाल नरेश ने कराया था।

स्कन्द पुराण में सप्त ऋषियों के नामों का है उल्लेख
अलग-अलग कालखंडों में निर्मित सप्त हरियों की संरचना आकाश में स्थित सप्त ऋषि तारामंडल के सदृश्य है। इसकी पुष्टि अमेरिकी वैज्ञानिक संस्था नासा की रिपोर्ट के आधार पर भारतीय भूगर्भीय वैज्ञानिकों ने की है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय विवि गोरखपुर के प्रो. सर्वेश कुमार ने सप्तहरियों को लेकर शोध किया है। वह अपनी इस रिपोर्ट को एशियन कल्चरल लैंड स्केप एशोसिएशन के इंटरनेशनल सेमिनार में प्रस्तुत भी कर चुके हैं। इंडियन कल्चरल लैंड स्केप एशोसिएशन के सचिव प्रो. कुमार का कहना है कि श्रीमदभागवत के आठवें स्कन्द में सप्त ऋषियों कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि व भारद्वाज के नामों का उल्लेख किया गया है।

आकाश में इन्हीं के नाम पर सप्त तारामंडल स्थापित है। वह बताते हैं कि नासा ने सेटेलाइट के जरिए सप्त तारामंडल की संरचना का चित्र लिया था। इन चित्रों के रेखांकन के आधार पर अयोध्या के सप्तहरियों की संरचना का भौतिक सत्यापन कर ड्रोन कैमरे के  चित्रों से मिलान किया तो हूबहू वही संरचना सामने आयी।  

बुलडोजर कार्रवाई: अतीक के करीबी बिल्डर की अवैध इमारतें तलाश रहा एलडीए

1902 में एडवर्ड तीर्थ विवेचनी सभा ने लगवाया था शिलालेख
रामनगरी के प्राचीन स्थलों की पहचान में एडवर्ड तीर्थ विवेचनी सभा की बड़ी भूमिका रही है। इस सभा के प्रयासों से ही सैकड़ों सालों से जीर्ण-शीर्ण ही सही स्थल अभी सुरक्षित हैं अन्यथा भूमाफिया ने इनके अस्तित्व को बहुत पहले ही निगल लिया होता। वर्ष 1902 में दशरथ राजमहल के तत्कालीन विदुगद्याचार्य स्वामी राममनोहर दास महाराज के नेतृत्व में स्कन्द पुराण के आधार पर तीर्थों की पहचान कर शिलालेख लगाने का निर्णय लिया। इसके विरोध के फलस्वरूप मामला सिविल कोर्ट पहुंच गया।

तत्कालीन ब्रिटिश जिला जज एडवर्ड ने अपने आदेश से एडवर्ड विवेचनी सभा का निर्माण कराकर शिलालेख लगवाया। इसके साथ यह आदेश भी दिया कि शिलालेख को नष्ट करने वाले को तीन वर्ष का सश्रम कारावास व जुर्माना भुगतना पड़ेगा। इस सभा ने चौरासी कोस के परिक्रमा क्षेत्र में 184 शिलालेख लगवाए गये जिनमें पहला शिलालेख रामजन्मभूमि पर ही लगवाया गया था। यही शिला लेख शेष हरियों के स्थल पर भी लगाया गया है।

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें