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12 अगस्त, 2020|1:53|IST

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विकास दुबे ने 7 दिन में 17 बदले ठिकाने, कोटा होते हुए पहुंचा उज्जैन, दो बार गाड़ी भी बदली

यूपी में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मुख्य गुनाहगार और शातिर अपराधी विकास दुबे भले ही एनकाउंटर में मारा गया हो पर वह सात दिन तक कई राज्यों की पुलिस को छकाए रहा। कानपुर पुलिस और यूपी एसटीएफ सीधे तौर पर उसके पीछे लगी थी लेकिन दूसरे राज्यों की पुलिस भी नजर बनाए थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक तीन से 9 जुलाई के बीच विकास ने 17 ठिकाने बदले। पांच जुलाई तक तो वह कानपुर देहात के एक गांव से पुलिस कार्रवाई पर नजर गड़ाए हुए थे। खाकी के आक्रामक रुख देख पांच जुलाई की सुबह अपने तीन साथियों के साथ विकास निकल भागा।

विकास की ट्रैकिंग कर रहे पुलिस अफसरों के मुताबिक 6 जुलाई तक उसकी कोई लोकेशन ट्रेस नहीं हो पाई। फरीदाबाद में जब उसके तीन साथी पकड़े गए तो पता चला कि कानपुर देहात में प्रभात और अंकुर के साथ दो दिन तक छिपा रहा। वहां से वह एक वैन से दिल्ली के लिए निकला। उसका इरादा नोएडा जाने का था लेकिन हर जगह नाकेबंदी थी। बीच रास्ते में उसने वैन छोड़ दी। इसके बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल किया। कहीं टैक्सी पकड़ी तो कहीं सवारी बस से निकला। दिल्ली से टैक्सी लेकर वह फरीदाबाद पहुंचा था।

शातिर दिमाग चलता रहा
विकास का शातिर दिमाग चलता रहा। उसे आशंका थी कि पुलिस पीछे लगी हुई है। कड़ी से कड़ी जोड़ने की कोशिश कर रही है। यदि किसी से संपर्क किया तो लोकेशन ट्रेस हो जाएगी। एक बात यह भी सामने आई कि उसने दूसरे के जरिए अपना मैसेज तीसरे व्यक्ति तक पहुंचाया। फरारी के दौरान उसने किसी से सीधे बात नहीं की। दूसरे नंबरों, कॉन्फ्रेंसिंग आदि का इस्तेमाल किया। इसके चलते सही लोकेशन ट्रेस करने में दिक्कत आ रही थी।

साथियों से कोई जानकारी साझा नहीं की
फरीदाबाद में जब उसके तीन साथी पकड़े गए तो कई जानकारियां हासिल हुईं। पकड़े गए लोगों को भी यह नहीं पता था कि विकास का फरीदाबाद के बाद अगला ठिकाना क्या होगा। विकास ने अपने साथियों को कभी सही लोकेशन नहीं बताई। उसके पीछे लगे पुलिस अफसरों के मुताबिक इस बात की आशंका नहीं थी कि वह दिल्ली,  गुरुग्राम, चंडीगढ़ जाने के बजाय उल्टा उज्जैन चला जाएगा। इसका फायदा उसे मिला और फरीदाबाद से जयपुर होते हुए वह कोटा की ओर निकल गया। कोटा तक किसी ने अपनी गाड़ी से छोड़ा। इसके बाद यह नहीं पता चल पाया कि विकास ने उज्जैन पहुंचने के लिए किस वाहन का इस्तेमाल किया। कयास लगाया जा रहा है कि कोटा से उसने निजी बस का इस्तेमाल किया। उज्जैन पहुंचने के बाद 9 जुलाई की सुबह करीब 8:30 बजे महाकाल का दर्शन करने पहुंचा और दबोच लिया गया। कहा जा रहा है कि उसने खुद की कहा कि मैं विकास कानपुर वाला। इसके बाद पूरे देश में हलचल मच गई। उज्जैन पुलिस भी सक्रिय हुई। हिरासत में ले लिया गया तो यूपी एसटीएफ और कानपुर एसएसपी ने उज्जैन के एसपी से संपर्क साधा।

उज्जैन में 8 घंटे पूछताछ
उज्जैन पुलिस ने आठ घंटे तक विकास से पूछताछ की। यूपी एसटीएफ से घटना का विस्तृत ब्योरा लिया और इंट्रोगेट किया। ऐसा उज्जैन के एसपी मनोज कुमार सिंह ने शाम की प्रेस कान्फ्रेंस में जानकारी दी। उज्जैन पुलिस ने यह भी बताया कि इंट्रोगेशन में आई सूचनाएं कानपुर पुलिस से साझा की जा रही हैं। तब तक कानपुर एसएसपी का पत्र पहुंच गया और एसटीएफ भी पहुंच गई। उज्जैन पुलिस ने विकास को एसटीएफ के हवाले कर दिया।

सुबह हो गई मुठभेड़
9 जुलाई की रात में ही एसटीएफ और पुलिस विकास को लेकर कानपुर के लिए रवाना हो गई। रातभर सफर करते हुए पुलिस टीम 10 जुलाई सुबह 6:21 बजे बारा टोल प्लाजा से पास हुई। करीब करीब 20 मिनट के अंतराल में गाड़ी पलटी और विकास ने पुलिस की पिस्टल लेकर भागने की कोशिश की। पुलिस का दावा है कि जवाबी फायरिंग में उसे गोली लगी और हैलट अस्पताल में मृत घोषित कर दिया।

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  • Web Title:Vikas Dubey changed 17 hideouts within 7 days Ujjain reached via Kota also changed car twice kanpur encounter