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Hindi News उत्तर प्रदेशयूपी के मेडिकल कॉलेजों में जल्द भरे जाएंगे शिक्षकों के खाली पद, वॉक इन इंटरव्यू के जरिए होगा चयन

यूपी के मेडिकल कॉलेजों में जल्द भरे जाएंगे शिक्षकों के खाली पद, वॉक इन इंटरव्यू के जरिए होगा चयन

राजकीय मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़े चिकित्सा शिक्षकों के रिक्त पद अब जल्द भरे जा सकेंगे। खाली पदों पर भरने का रास्ता साफ हो गया है। ऐसे पदों की संख्या ढाई हजार से अधिक है।

यूपी के मेडिकल कॉलेजों में जल्द भरे जाएंगे शिक्षकों के खाली पद, वॉक इन इंटरव्यू के जरिए होगा चयन
Pawan Kumar Sharmaहिन्दुस्तान,लखनऊSat, 15 Jun 2024 08:12 PM
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यूपी के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़े चिकित्सा शिक्षकों के रिक्त पद अब जल्द भरे जा सकेंगे। इन रिक्त पदों को भरने का रास्ता साफ हो गया है। ऐसे पदों की संख्या ढाई हजार से अधिक है। शासन ने इन सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को नियुक्ति के लिए अधिकृत कर दिया है। अब वे वॉक इन इंटरव्यू के माध्यम से इन पदों को भर सकेंगे। मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी बड़ा मुद्दा है। हाल ही में एनएमसी ने मानक पूरे न करने वाले प्रदेश के सरकारी और गैर सरकारी मेडिकल कॉलेजों से करोड़ों रुपये का जुर्माना वसूला है।

महानिदेशालय की ओर से शासन को राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेजों में रिक्त पदों को संविदा पर भरे जाने का अधिकार वहां के प्रधानाचार्यों को दिए जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। शासन ने इसे मंजूरी दे दी है। विभाग के प्रमुख सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने गत दिवस इसे लेकर आदेश जारी कर दिया। आदेश में कहा गया है कि छात्र हित एवं रोगी हित में तथा एनएमसी के मानकों की पूर्ति के लिए चिकित्सा शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए संविधा के आधार पर वॉक इन इंटरव्यू के माध्यम से चयन मामलों में नियुक्ति व तैनाती तथा चयनित अभ्यर्थियों को तत्काल कार्यभार ग्रहण कराने के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को अधिकृत किया जाता है। सभी प्रधानाचार्यों को संविदा पर नियुक्ति संबंधी शासनादेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। यदि चिकित्सा शिक्षकों के चयन में कोई अनियमितता मिली तो इसके लिए संबंधित प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे।

चिकित्सा शिक्षा व इलाज दोनों पर पड़ रहा असर

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के मानकों के हिसाब से प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षक नहीं हैं। उनकी खासी कमी है। इसका सीधा असर चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेजों में पड़ने वाले छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा डॉक्टरों की कमी के कारण रोगियों को उपचार भी नहीं मिल पा रहा। मगर अब ऐसा नहीं होगा। इसे लेकर एनएमसी के कड़े रुख के बाद अब चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय हरकत में आया है। एनएमसी ने हाल ही में प्रदेश के 42 से अधिक मेडिकल कॉलेजों पर जुर्माना लगाया था।

अभी यह है प्रक्रिया

मौजूदा समय में संविदा नियुक्ति की प्रक्रिया काफी लंबी है। मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों की अध्यक्षता वाली कमेटी नियुक्ति करके महानिदेशालय को भेजती है। वहां से स्वीकृति के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा जाता है। शासन से फिर महानिदेशालय लौटता है और तब उसे कॉलेज लौटता है। इस प्रक्रिया में दो से तीन माह का समय लग जाता है। इस बीच इंटरव्यू देने वाले डॉक्टर को दूसरे विकल्प मिल जाते हैं। ऐसे में मंजूरी मिलने के बाद तमाम लोग ज्वाइन ही नहीं करते। अब प्रधानाचार्य स्तर से नियुक्ति के बाद तत्काल ज्वाइनिंग भी हो सकेगी।

होम्योपैथिक फार्मासिस्ट के 397 पदों पर भर्ती के लिए 20 से आवेदन

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने होम्योपैथिक फार्मासिस्ट के 397 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन 20 जून से 19 जुलाई तक लेगा। लोकसभा चुनाव के बाद आयोग ने भर्ती को लेकर यह पहला विज्ञापन निकाला है। इसमें किसी भी तरह का संशोधन 26 जुलाई तक किया जा सकेगा।

होम्योपैथी निदेशालय के अधीन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट के 397 पदों पर भर्ती होनी है। इसके लिए प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी-2023) वाले पात्र होंगे। भर्ती के लिए आयोग की वेबसाइट https://upsssc.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। सभी वर्गों के लिए 25 रुपये ऑनलाइन आवेदन शुल्क रखा गया है। मुख्य परीक्षा के लिए चयनित होने वालों से अलग से शुल्क लिया जाएगा।

आयोग के सचिव अवनीश सक्सेना की ओर से शनिवार को जारी विज्ञप्ति के मुताबिक कुल पदों में अनारक्षित वर्ग के 161, अनुसूचित जाति 83, अनुसूचित जनजाति सात, अन्य पिछड़ा वर्ग 107 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 39 पद हैं। इस पद पर भर्ती के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद की इंटरमीडिएट परीक्षा गणित या जीव विज्ञान या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त उसके समकक्ष कोई परीक्षा उत्तीर्ण करने वाला पात्र होगा। इसके अलावा मान्यता प्राप्त किसी संस्था से दो वर्षीय होम्योपैथिक फार्मासिस्ट डिप्लोमा प्राप्त होना चाहिए या किसी संस्था से तीन महीने का प्रशिक्षण प्राप्त किया हो। उसे होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड उत्तर प्रदेश में पंजीकृत होना चाहिए।

उत्तर प्रदेश होम्योपैथिक फार्मासिस्ट सेवा नियमावली 1991 यथासंशोधित (प्रथम संशोधन-2015) में दी गई व्यवस्था के मुताबिक छूट का प्रावधान होगा। प्रादेशिक सेना में दो साल की न्यूनतम सेवा हो या राष्ट्रीय कैडेट कोर का बी प्रमाण पत्र प्राप्त किया हो। भर्ती के लिए 21 से 40 वर्ष की आयु वाले पात्र होंगे।