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उत्तराखंड टनल हादसा: सुरंग से निकलते ही बेटे ने किया मां को फोन, बोला-मैं ठीक हूं, अस्पताल जा रहा हूं

17 दिनों से उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फंसे खीरी के भैरमपुर के मंजीत के परिवार के लिए मंगलवार का दिन ‘मंगल बेला’ लेकर आया। मंगलवार रात को सभी 41 मजदूर सुरंग से बाहर आ गए।

उत्तराखंड टनल हादसा: सुरंग से निकलते ही बेटे ने किया मां को फोन, बोला-मैं ठीक हूं, अस्पताल जा रहा हूं
Dinesh Rathourहिन्दुस्तान,बेलरायां (लखीमपुर खीरी)Tue, 28 Nov 2023 10:05 PM
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17 दिनों से उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फंसे खीरी के भैरमपुर के मंजीत के परिवार के लिए मंगलवार का दिन ‘मंगल बेला’ लेकर आया। मंगलवार रात को सभी 41 मजदूर सुरंग से बाहर आ गए और मंजीत भी सुरक्षित निकल आया। सुरंग से बाहर आते ही उसने अपनी मां को फोन कर अपनी सलामती की जानकारी दी। दो हफ्तों से मुरझाए चेहरे खिल गए। मां की आंखों में आंसू भर आए। मां बोलीं-बस अब बेटे की सूरत देखने को बेताबी है। दिल कर रहा है कि यहां से सीधे उत्तराखंड पहुंच जाएं और बेटे को गले लगाकर सब हसरतें पूरी कर लें। मां कभी सरकार को धन्यवाद देती हैं तो कभी भगवान की तस्वीरों के आगे माथा टेकती हैं। उम्मीद है कि एक-दो दिन में बेटा घर आ जाएगा, तब वह उससे जी भरकर बातें करेगी।

उत्तराखंड की सुरंग में फंसे 41 मजदूरों के लिए मंगलवार का दिन बेहद खास रहा। रात को टनल में फंसे अन्य मजदूरों के साथ मंजीत भी बाहर आ गया। मंजीत की मां कमला चौधरी ने बताया की टनल से निकलते ही मंजीत ने एंबुलेंस से उसको फोन किया और बताया कि वह पूरी तरह सुरक्षित है और अस्पताल जा रहा है। जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। दोपहर बाद सुरंग में फंसे सभी मजदूरों के बाहर निकलने की तैयारियों की खबरें आने लगीं। भैरमपुर गांव के मंजीत के घर और पड़ोस के लोग टीवी देख रहे थे। इस बीच मंजीत की मां कमला ने अपने पति चौधरी से संपर्क किया। चौधरी ने उनको जो बताया, उसके बाद उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। चौधरी बेटे की तलाश में उत्तराखंड में मौजूद हैं। मंजीत के चाचा शत्रोहन लाल ने बताया कि मंगलवार सुबह दिल्ली से किसी ने उनके मोबाइल पर कॉल करके कहा था कि आज सुरंग से सारे मजदूर बाहर आ जाएंगे। इस पल से उनका परिवार इंतजार की घड़ियां गिन रहा था।

खुशी की खबर पर झूमा परिवार

17 दिनों से सुरंग में कैद बेटे की सकुशल वापसी की जानकारी के बाद परिवार खुशी से झूम उठा। अब परिवार को बेटे का चेहरा देखने की उम्मीद जग गई है। मंजीत के बिना परिवार के लोगों को रात-दिन नींद और चैन नहीं मिल रहा था। मंजीत की मां ने सरकार और बेटे को निकालने का प्रयास करने वाले इंजीनियरों और अन्य लोगों का शुक्रिया अदा किया है। 

हमारे लिए तो आज ही दिवाली

मंजीत की मां कमला ने कहा कि दिवाली से बेटे के सुरंग में फंसे होने की वजह से न त्योहार मनाया और न मन में कोई खुशी रही। दिवाली की भोर में यह मनहूस खबर आई तो दिवाली काली हो गई। उनके लिए तो आज ही दिवाली है। कई दिनों से दिन-रात सभी मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकल आने की भगवान से दुआ मांगते थे।

पिता ने कहा, वापस मिल गया पौधा

मंजीत के पिता चौधरी उत्तराखंड में ही हैं। उन्होंने बताया कि उनको सुरंग से कुछ दूरी पर रोका गया है। सुरंग के अंदर पूरी तैयारी रखी गई और कई एम्बुलेंस खड़ी थीं। चौधरी का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर आया। इसमें वह प्रतिक्रिया देते हुए कहते हैं कि बेटे को देखकर कहेंगे कि हमारा पौधा हमको वापस मिल गया। मंजीत के बाबा विंद्रा प्रसाद ने बताया कि 17 दिनों से सुरंग में फंसे पोते की सूरत याद कर दिल में हूक उठती थी। 

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