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Hindi News उत्तर प्रदेश30 साल पुराने कागजों में फरर्जीवाड़ा, वक्फ के नाम चढ़ाई सहारनपुर नगर निगम की 3 हेक्टेयर जमीन

30 साल पुराने कागजों में फरर्जीवाड़ा, वक्फ के नाम चढ़ाई सहारनपुर नगर निगम की 3 हेक्टेयर जमीन

सहारनपुर में 30 साल पहले फर्जीवाड़ा हुआ। नगर निगम की तीन हेक्टेयर जमीन वक्फ के नाम चढ़ा दी। मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर भूमि को पूर्व की भांति अभिलेखित करने के निर्देश दिए हैं।

30 साल पुराने कागजों में फरर्जीवाड़ा, वक्फ के नाम चढ़ाई सहारनपुर नगर निगम की 3 हेक्टेयर जमीन
Srishti Kunjप्रणव अग्रवाल,सहारनपुरThu, 16 May 2024 09:02 AM
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सहारनपुर में नगर निगम की तीन हेक्टेयर जमीन का दशकों पुराना बड़ा फर्जीवाड़ा अब सामने आया है। जांच में खुलासा होने के बाद कमिश्नर ने डीएम को पत्र लिखकर 1994 के आदेश को निरस्त कर भूमि को पूर्व की भांति अभिलेखित करने के आदेश जारी किए है। मंडलायुक्त के आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में खलबली मची है। इस खेल में पूर्व में तैनात रह चुके कई अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।  

जांच कमेटी ने सात मई को 11 पृष्ठों की तथ्यात्मक संयुक्त जांच आख्या मंडलायुक्त के समक्ष प्रस्तुत की। कमेटी की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद स्पष्ट हुआ कि उक्त भूमि वर्ष 1874 से नगर पालिका परिषद, सहारनपुर की संपत्ति के रूप में दर्ज है। वर्ष 1359 फसली की खतौनी के अनुसार प्रश्नगत भूमि कब्रिस्तान व मरघट के रूप में म्यूनिसिपल बोर्ड, सहारनपुर के नाम पर अंकित है। वर्ष 1373 फसली में चकबंदी हुई। आकार पुत्र-41 व आकार पत्र-45 के अनुसार भी प्रश्नगत भूमि म्यूनिसिपल बोर्ड, सहारनपुर श्रेणी 15 (3) कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। 

वर्ष 1993 में तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा इस भूमि को नगर पालिका परिषद की मानते हुए वानिकी प्रभाग को पार्कों एवं वृक्षारोपण करने हेतु अधिकृत किया गया था, लेकिन वर्ष 1994 में सचिव उप्र. सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के पत्र दिनांक 02.06.1994 के द्वारा संबंधित भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज करने के आदेश दे दिए गए। जिसके क्रम में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ने परवाना 19 जुलाई 1994 निर्गत करते हुए वक्फ बोर्ड के आदेश का अनुपालन किया। साथ ही पूर्व से दर्ज नगर पालिका परिषद को अपना पक्ष रखने का कोई भी अवसर भी नहीं दिया गया और न ही इस संपत्ति के विषय में कोई अभिलेखीय जांच ही की गयी।

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विधायक की शिकायत पर शासन तक मची थी खलबली 
जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2007 में इस संपत्ति पर किनारे-किनारे दुकान बनाकर, संपत्ति को विकसति किए जाने के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया। मामले में उस समय एक विधायक ने नगर पालिका परिषद, सहारनपुर की भूमि पर कब्जा करने एवं उसका दुरुपयोग करने के आरोप लगाते हुए प्रमुख सचिव, नगर विकास व मुख्यमंत्री को पत्र भेजा था। तत्कालीन आयुक्त ने भी डीएम को जांच कर कार्रवाई के आदेश दिये थे। लेकिन मामले में कोई कार्यवाही नहीं हुई। 

वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने अपने स्तर से कर दी वक्फ के रूप में दर्ज  
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि वर्ष 1976 में मुख्य सचिव उप्र शासन द्वारा प्रदेश की समस्त वक्फ संपत्तियों का सर्वे कराये जाने के निर्देश निर्गत किए गए थे। संबंधित भूमि वक्फ के रूप में जिलास्तरीय सर्वे करने पर नहीं पाई गई। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा स्वर्ग अपने स्तर से प्रश्नगत भूमि को 10 मार्च 1987 के द्वारा वक्फ के रूप में दर्ज किया गया। यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रश्नगत संपत्ति का गजट/अधिसूचना भी जारी नहीं हुई है। 

अब यह दिए गए आदेश 
मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी को निर्देश किया कि उपरोक्त तथ्यों के आधार पर संबंधित भूमि के विषय में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) द्वारा निर्गत परवाना 19 जुलाई 1994 एवं अमलदरामद पांच अगस्त 1994 को तत्काल निरस्त करते हुये प्रश्नगत भूमि को म्यूनिसिपल बोर्ड सहारनपुर/नगर निगम, सहारनपुर के नाम पूर्व की भॉति राजस्व अभिलेखों में यथावत रखा जाये।

जांच कमेटी में यह रहे शामिल 
-अपर आयुक्त (प्रशासन), सहारनपुर मंडल 
-अपर जिलाधिकारी (प्रशासन)
-नगर मजिस्ट्रेट, सहारनपुर 
-अपर नगर आयुक्त , नगर निगम 
-उप जिलाधिकारी, सहारनपुर 
-जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी 
-तहसीलदार, सदर

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