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29 नवंबर, 2020|4:05|IST

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यूपी: कोरोना की दूसरी लहर में मौतें रोकने के लिए इटली मॉडल पर रिहर्सल

कोरोना की सेकेंड पीक से आम लोग भले ही बेखौफ हैं लेकिन डॉक्टर बेचैन हैं। खासतौर से सर्दी में मौतें रोकने के लिए कोरोना से लड़ने की जद्दोजेहद में जुट गए हैं। सेकेंड पीक में विभिन्न देशों में किए गए इलाज प्रबंधन और अपने शहर की मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से इलाज की व्यवस्था की जा रही है। इटली में सेकेंड पीक के प्रबंधन का रिहर्सल शुरू कर दिया गया है।

दूसरे लहर में देखभाल-इलाज प्रबंधन कैसे और क्या होगा? पहले के अनुभव किस तरह इस्तेमाल होंगे और उनमें क्या संशोधन किया जा सकता है? इस पर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक सेकेंड पीक में इटली में मौतों को रोकने में कुछ हद तक सफलता मिल रही है। इस लिहाज से इटली मॉडल पर भी गौर किया जा रहा है। 22 अक्तूबर से जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों ने उस पर रिर्हसल भी शुरू कर दिया है। 

मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौरभ अग्रवाल का कहना है कि हम लोगों ने मरीजों की देखभाल में कुछ बदलाव किया है। हालांकि आईसीएमआर की पूरी गाइडलाइन का पालन करते रहेंगे मगर अपनी ओर से भी किए प्रयासों को सूचीबद्ध करेंगे। वैसे भी अब तक दी गई एंटीवायरल दवाओं, प्लाज्मा थेरेपी, इम्युनोग्नोबिन थेरेपी के रिजल्ट पर भी मिलकर चर्चा कर रहे हैं।

मौत की दर हरहाल में करना है कम 
डॉ. सौरभ अग्रवाल का कहना है कि हम लोगों का मकसद मौतों की दर हरहाल में कम करना है। मरीजों की देखरेख में टेक्नोलॉजी का प्रयोग बढ़ाया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक डॉक्टर एक मरीज को रोज देख सकें। आठ डॉक्टरों की टीम है जो कोविड वार्डों में भर्ती मरीजों को जूम एप के जरिए देख रही है। मरीज के डॉक्टर इस टीम को इलाज और मरीज की स्थिति के बारे में बताते हैं। उस हिसाब से सभी लोग मिलकर मरीज के लिए आगे प्लान करते हैं। माइक्रो लेवल पर चर्चा की जाती है, जिसका फायदा मिल रहा है। डॉ. सौरभ अग्रवाल के मुताबिक इलाज में और बेहतर क्या कर सकते हैं, इसे डेथ ऑडिट में पकड़ सकते हैं।

इलाज का नया अप्रोच बनाने की कोशिश
मेडिकल कॉलेज के एक अन्य विशेषज्ञ डॉ. एसके गौतम का कहना है कि जैसे कि देखा जा रहा है कि कुछ देशों में सेकेंड पीक काफी खतरनाक स्थिति में कुछ देशों में है। इसलिए तैयारी रखनी होगी। आईसीएमआर की गाइडलाइन फॉलो करते हुए मरीजों की स्थिति के अनुसार हम लोगों ने कुछ नई चीजें भी जोड़ी हैं। इससे मरीजों को बचाने में सफलता मिली है। मसलन कुछ एंटीवायरल दवाओं और स्टेरायड के डोज को लेकर नए प्रयोग किए हैं। वैसे भी मरने वालों में अधिकतर कोमार्विड हैं इसलिए इलाज क्या दिया गया है? आगे क्या करना है? यह समझना बेहद अहम है। इससे निश्चित तौर पर मौतों को रोकने में मदद मिलेगी।

यह है इटली मॉडल
मृत्युदर कम करने के लिए मरीजों के इलाज में फिजिशियन, पल्मोनरी रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट की टीम होती है। इस टीम में सभी अनुभवी वरिष्ठ डॉक्टर होते हैं। एक से अधिक बार आईसीयू का जूम राउंड किया जाता है यानी टेक्नोलॉजी के प्रयोग से मरीजों की निगरानी बढ़ा दी जाती है। पूरी तरह टीम के सदस्य जब सहमत होते हैं तभी इलाज के प्लान में किसी तरह बदलाव किया जाता है।

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  • Web Title:UP: Rehearsal on Italy model to prevent deaths in second wave of Corona