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राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने अखिलेश को दी बड़ी मात, क्रॉस वोटिंग से सभी कैंडिडेट जीते, सपा के आलोक रंजन हारे

यूपी में राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने सपा को मात देते हुए अपने सभी प्रत्याशियों को जीत दिलाने में सफलता हासिल कर ली है। बीजेपी ने सपा में बड़ी सेंध लगाई है। सपा के सात विधायकों ने क्रास वोटिंग की है।

राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने अखिलेश को दी बड़ी मात, क्रॉस वोटिंग से सभी कैंडिडेट जीते, सपा के आलोक रंजन हारे
Yogesh Yadavलाइव हिन्दुस्तान,लखनऊWed, 28 Feb 2024 12:10 AM
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यूपी में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने राज्यसभा के चुनाव में अखिलेश यादव को बड़ी मात दी है। सपा विधायकों की क्रास वोटिंग से भाजपा के सभी आठ प्रत्याशी जीत गए हैं। समाजवादी पार्टी के तीन में से दो ही प्रत्याशी जीत सके हैं। तीसरे प्रत्याशी आलोक रंजन हार गए हैं। सपा के सात विधायकों ने क्रास वोटिंग करते हुए भाजपा के पक्ष में वोट दिया है। सपा के पक्ष में भी एनडीए के एक विधायक ने क्रास वोटिंग की है। बसपा के एक मात्र विधायक ने भाजपा को वोट दिया। मतदान के तुरंत बाद मतगणना शुरू हुई लेकिन बीच में रोकनी भी पड़ी। सपा ने भाजपा के एक विधायक का वोट किसी और से डलवाने का आरोप लगाते हुए आपत्ति की।  सुभासपा ने भी अपने विधायक का वोट रद कराने की मांग की। कहा कि बिना दिखाए ही वोट डाला है। दोनों मामलों को निबटाने के बाद दोबारा गिनती शुरू हुई और भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशियों को विजयी घोषित कर दिया गया।

यूपी में नामांकन के अंतिम दिन से ही राज्यसभा का चुनाव रोचक हो गया था।  दस सीटों पर पहले भाजपा के सात और सपा के तीन कुल दस ही प्रत्याशी थे। नामांकन के अंतिम दिन भाजपा ने अपना आठवां प्रत्याशी उतारकर चुनाव को रोचक बना दिया था। भाजपा की मंशा लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सपा में सेंधमारी करना था। भाजपा  अपनी रणनीति में सफल भी हो गई है। प्रथम वरीयता के मतों में सबसे ज्यादा जया बच्चन को 41 वोट मिले हैं। लाल जी सुमन को 40 वोट मिले। तीसरे प्रत्याशी आलोक रंजन को प्रथम वरीयता के केवल 19 वोट मिले हैं। इसके अलावा भाजपा के अमर पाल, सुधांशु त्रिवेदी, चौधरी तेजवीर, नवीन जैन, साधना सिंह और संगीता बलवंत सभी को 38-38 वोट मिले। आरपीएन सिंह को 37 वोट मिले हैं। संजय सेठ को प्रथम वरीयता के 29 वोट मिले हैं।

भाजपा की रणनीति का ही असर है कि  सपा के मुख्य सचेतक मनोज पांडेय भी बीजेपी के पाले में चले गए। उनके अलावा विधायक मुकेश वर्मा, पूजा पाल, राकेश पांडे, विनोद चतुर्वेदी, राकेश प्रताप सिंह और अभय सिंह ने भाजपा के पक्ष में वोट डाला। सपा के चर्चित पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की पत्नी विधायक महाराजी प्रजापति वोट देने नहीं पहुंचीं।

संजय सेठ जीते, आलोक रंजन हारे
भाजपा के आठवें प्रत्याशी संजय सेठ की जीत ने पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन का राज्यसभा जाने का सपना धराशायी कर दिया है। सपा विधायकों की क्रास वोटिंग के कारण आलोक रंजन हार गए हैं। भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह, पूर्व सांसद चौधरी तेजवीर सिंह, पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के महासचिव अमरपाल मौर्य, पूर्व राज्य मंत्री संगीता बलवंत, पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी, पूर्व विधायक साधना सिंह, आगरा के पूर्व महापौर नवीन जैन के साथ ही आठवें प्रत्याशी के रूप में संजय सेठ को मैदान में उतारा था। सपा ने अभिनेत्री सांसद जया बच्चन, दलित नेता रामजी लाल सुमन और पूर्व मुख्‍य सचिव आलोक रंजन को प्रत्याशी बनाया था।

मुख्य निर्वाचन आयोग तक पहुंचा मामला

मंगलवार को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक विधान भवन के तिलक हॉल में राज्यसभा की इन 10 रिक्त सीटों के लिए मतदान हुआ। शाम पांच बजे से मतगणना शुरू हुई। मतगणना के दौरान सपा के शरजिल इस्लाम के वोट को रद्द करने की भाजपा मतगणना एजेण्ट की मांग पर विवाद हुआ। मतगणना थोड़ी देर के लिए रोकी गयी। इसके बाद भाजपा ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी सुभासपा के दो मतों पर एतराज उठाया और उन्हें अपने पक्ष में बताया जबकि सपा ने इन दो मतों पर अपनी दावेदारी ठोंकी। मतगणना फिर रोकी गई।

मामला मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय सदंर्भित किया गया। मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय ने केन्द्रीय चुनाव आयोग से सलाह मशविरा किया। उसके बाद सभी वोट वैध घोषित किए गए। शाम 6 बजकर 54 मिनट से फिर मतगणना शुरू हुई और रात साढ़े आठ बजे मतगणना शीट में अंकित ब्यौरे के अनुसार भाजपा के आठ और सपा दो उम्मीदवार चुनाव जीते।

399 में 395 ने डाले वोट

विधानसभा में मौजूदा संख्या बल 399 में 395 ने विधायकों ने वोट किया। जेल में बंद सपा के दो विधायक इरफान सोलंकी व आजमगढ़ के रमाकांत यादव और सुभासपा के विधायक अब्बास अंसारी को वोट डालने की अनुमति नहीं मिली। मतदान के एक घंटे बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू हुई। मतदान के दौरान सपा के 108 वोट थे लेकिन उसके दो विधायकों के जेल में होने और आठ विधायकों द्वारा वोट न देने के चलते सपा के 98 और कांग्रेस के दो व सुभासपा के एक बागी समेत कुल 101 मत मिले। उसके तीनों सदस्यों को जीतने के लिए 108 वोटों की जरूरत पड़ती। एक प्रत्याशी को जीतने के लिए 36 वोट चाहिए थे। नतीजतन, सपा को कुल जरूरी मतों से सात वोट कम मिले। उसके पास तीसरे प्रत्याशी के लिए 27 वोट अतिरिक्त बचे थे लेकिन वह 9 वोटों का इंतजाम नहीं कर सकी।

सच साबित हुई तोड़फोड़ की अशंका
राज्यसभा चुनाव के लिए रिक्त 10 सीटों पर चुनाव के लिए भाजपा ने आठ और सपा ने तीन उम्मीदवार उतारे थे। भाजपा द्वारा जैसे ही 8वें उम्मीदवार के रूप में संजय सेठ को उतारा गया वैसे ही तोड़फोड़ के साथ क्रास वोटिंग की संभावना जताई जाने लगी थी। हालांकि एक दिन पहले तक सपा दावा करती रही कि उसके सभी विधायक एकजुट हैं लेकिन मतदान शुरू होने के साथ ही यह दावा हवा-हवाई साबित हुआ।  

सुभासपा को भी लगा झटका
सपा से गठबंधन कर विधानसभा चुनाव लड़ने वाली सुभासपा के छह विधायक हैं। सपा से नाता तोड़कर सुभासपा भाजपा के साथ हो गई है। मौजूदा समय उसका एक विधायक जेल में है। सुभासपा मुखिया ओम प्रकाश दावा कर रहे थे कि उनके सभी विधायक एकजुट हैं, लेकिन जब वह वोट करने आए तो उनके साथ चार ही विधायक आए। वह अपने विधायक जगदीश नारायण राय द्वारा सपा को वोट देने और साथ न होने के सवाल पर भी साथ होने का दावा करते रहे।

यह रहा सपा का गणित
-सपा के पास कुल 108 विधायकों के मत थे।
-दो विधायक जेल से नहीं आ पाए यानी कुल 106 बचे।
-आठ विधायक टूटे यानी 106-8= 98 बचे
-सुभासपा का एक विधायक साथ आया यानी कुल 99 हुए।
-कांग्रेस के दो विधायकों ने वोट किया यानी 99+2=101 विधायकों के वोट मिले।
-तीसरे प्रत्याशी के लिए चाहिए थे 36 वोट लेकिन सपा के पास कुल 27 ही वोट बचे 
-सपा को विद्रोह की वजह से अपने तीसरे प्रत्याशी को जिताने में नौ प्रत्याशी कम पड़ गए।

भाजपा का ये रहा गणित
-भाजपा के पास 252 विधायकों के वोट थे। आठ प्रत्याशियों को जिताने के लिए कुल 288 मत चाहिए थे।
-अपना दल के 13, सुभासपा के चार, निषाद पार्टी के छह, रालोद के नौ, जनसत्ता दल के दो, बसपा के उमाशंकर सिंह ने दिया वोट यानी भाजपा के पास कुल 287 मत हो गए।
-सपा के सात सदस्यों ने की क्रास वोटिंग इससे भाजपा के पक्ष में कुल 294 मत हो गए।
-भाजपा को अपने आठ प्रत्याशियों को जिताने के लिए चाहिए थे कुल 288 लेकिन उसे 6 मत ज्यादा मिले।
 

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