ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News उत्तर प्रदेशबढ़ा खतरा! समुद्री चट्टान के टुकड़े में मिली प्लास्टिक की परत, यूपी के वैज्ञानिकों ने ऐसे शोध कर किया खुलासा

बढ़ा खतरा! समुद्री चट्टान के टुकड़े में मिली प्लास्टिक की परत, यूपी के वैज्ञानिकों ने ऐसे शोध कर किया खुलासा

एक शोध में समुद्री चट्टान के टुकड़े में प्लास्टिक की परत मिली। प्रयागराज के वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. अजय सोनकर के शोध में ये खुलासा हुआ है। अंडमान-निकोबार के समुद्री सीप में मिले थे प्लास्टिक के कण।

बढ़ा खतरा! समुद्री चट्टान के टुकड़े में मिली प्लास्टिक की परत, यूपी के वैज्ञानिकों ने ऐसे शोध कर किया खुलासा
Srishti Kunjलाल रणविजय सिंह,प्रयागराजFri, 24 Nov 2023 05:57 AM
ऐप पर पढ़ें

प्लास्टिक हमारे पर्यावरण के लिए किस तरह खतरा बनता जा रहा है इसका एक और प्रमाण मिला है। समुद्री सीप से संगमनगरी स्थित लैब में बहुमूल्य मोती तैयार करने वाले प्रयागराज के मोती वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. अजय सोनकर ने अंडमान-निकोबार से मिले समुद्री चट्टान के टुकड़े की जांच की तो उसमें प्लास्टिक की परत पाई गई। उनके शोध में हुए इस खुलासे से खलबली मच गई है।  

मलेशिया से दुनिया के तमाम भाषाओं में प्रकाशित होने वाली जलजीव विज्ञान की पत्रिका ‘इन्फोफिश इंटरनेशनल’ ने अपने नवंबर-दिसंबर के अंक में डॉ. अजय सोनकर के इस खोज की जानकारी प्रमुखता से प्रकाशित की है। डॉ. सोनकर ने शोध के दौरान अंडमान के समुद्र से मिले मेंटल टिश्यू में पहली बार प्लास्टिक का नैनो हिस्सा देखा था। टिश्यू में प्लास्टिक के कण मिलने के बाद से डॉ. अजय पर्यावरण और समुद्र में प्लास्टिक के कण की खोज कर रहे थे। समुद्री जल, वनस्पति व जलीय जीवों पर गहन अध्ययन के दौरान अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के आसपास चट्टान का एक टुकड़ा मिला। जिसकी लैब में जांच की गई तो उस पर प्लास्टिक की परत मिली, जिसे प्लास्टिग्लोमरेट बताया जा रहा है।  

डॉ. अजय ने आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि भारत में पहली बार समुद्री चट्टान के टुकड़े में प्लास्टिक की परत मिलने की बात सामने आई है। बकौल डॉ. सोनकर चट्टान के टुकड़े पर प्लास्टिग्लोमरेट का मिलना दर्शाता है कि प्लास्टिक इंसान, जलीय जीवों के साथ पशु-पक्षियों के लिए कितना खतरनाक हो गया है। इसके बाद भी  प्लास्टिक का उपयोग बंद नहीं किया जा रहा है। पतले पेपर से बनने वाले टी बैग में भी 25 फीसदी प्लास्टिक के कण मिलाए जा रहे हैं, जो गर्म पानी के संपर्क आकर हमारे शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। डॉ. सोनकर कहते हैं कि देश में सिंगल यूज प्लास्टिक बंद करने की कोशिश हो रही है। हकीकत में बहुउपयोगी प्लास्टिक भी कम खतरनाक नहीं है। सभी तरह के प्लास्टिक का एक ही चरित्र है।

राजौरी आतंकी हमले में आगरा के कैप्टन शुभम के बाद अलीगढ़ के सचिन भी शहीद, आठ दिसंबर को निकलनी थी बारात

कई देशों के समुद्र चट्टानों में मिली है प्लास्टिक की परत
समुद्र की चट्टान पर प्लास्टिग्लोमरेट सिर्फ अंडमान-निकोबार नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों के समुद्रों में मिलने की जानकारी मिल रही है। डॉ. अजय सोनकर ने बताया कि इंडोनेशिया, अमेरिका, पुर्तगाल, कनाडा और पेरू में भी समुद्री चट्टानों पर प्लास्टिक की परत मिलने की बात हो रही है। जो वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें