
आरओ-एआरओ पेपर लीक केस: नकल माफिया जंगी एप से आपस में करते थे बातचीत, नहीं होती ट्रेस
आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षा का पेपर लीक करने वाले आरोपी आपस में नेटवर्किंग का जाल बनाए हुए थे। पुलिस भी उसे ट्रेस नहीं कर सकी। आरओ-एआरओ परीक्षा का पेपर लीक के लिए कभी भी मोबाइल पर संपर्क नहीं किया।
आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षा का पेपर लीक करने वाले आरोपी डॉ. शरद सिंह पटेल, इंजीनियर राजीव नयन मिश्र और रवि खत्री ने आपस में नेटवर्किंग का ऐसा जाल बनाया था कि पुलिस भी उसे ट्रैप नहीं कर सकी। तीनों मास्टर माइंड सिपाही भर्ती परीक्षा से लेकर लोकसेवा आयोग की ओर से आयोजित आरओ-एआरओ परीक्षा का पेपर लीक कराने तक कभी भी मोबाइल या व्हाट्सएप पर संपर्क नहीं किया।
शातिरों ने पुलिस से बचने के लिए एक विशेष मोबाइल एप जंगी का प्रयोग किया। इसी एप के माध्यम से तीनों हमेशा बातचीत करते थे। लखनऊ और मेरठ एसटीएफ की संयुक्त टीम ने सिपाही भर्ती और आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षा के पेपर लीक का खुलासा किया। इस खेल में मेजा के राजीव नयन और लखनऊ के डॉ. शरद सिंह का मुख्य रोल सामने आया। पुलिस आईफोन मोबाइल बरामद नहीं कर सकी। तीनों ने मोबाइल के बारे में पुलिस को गुमराह किया।
पुलिस ने मोबाइल नंबरों की जांच की, लेकिन उससे भी मदद नहीं मिली। पूछताछ में खुलासा हुआ कि तीनों शातिर पुलिस से बचने के लिए जंगी मोबाइल एप से जुड़े थे। उसी से बातचीत करते थे। कोई रिकॉर्ड पुलिस और एसटीएफ को नहीं मिला। इस गैंग से जुड़े कमलेश समेत अन्य के मोबाइल का डेटा रिकवरी कराकर एसटीएफ आगे की तफ्तीश में लगी है।
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जंगी एप के नेटवर्क ट्रेस नहीं होते
पुलिस की मानें तो अपराधी का मोबाइल नेटवर्क पुलिस का सबसे बड़ा मददगार होता है। लेकिन कुछ ऐसे मोबाइल एप हैं जिसकी मदद से अपराधी पुलिस को चकमा देने में कामयाब होने लगे हैं। इसे ट्रेस करना काफी मुश्किल है। ऐसा ही एक एप है जंगी। अभी तक इस एप का उपयोग उग्रवादी संगठन, ड्रग्स डीलर और संगठित अपराधी आपस में बातचीत करने के लिए करते थे।
दरअसल, यह एप आपके मोबाइल में 10 डिजिट का एक यूनिक नंबर उपलब्ध करवाता है। इसी नंबर की मदद से अपराधी अपने साथियों के साथ बात करते हैं। जंगी एप एक मैसेंजर एप है जो सर्वर लेस होता है। इसके द्वारा की गई बातचीत का डेटा सिर्फ यूजर के मोबाइल पर ही स्टोर होता है। इसलिए शातिर अपराधियों की तरह राजीव नयन और डॉ. शरद इस मोबाइल एप से आपस में जुड़े थे।





