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Hindi News उत्तर प्रदेशगंगा की सतह से तलहटी तक फैला माइक्रो प्लास्टिक का जहर, इन शहरों में खतरा

गंगा की सतह से तलहटी तक फैला माइक्रो प्लास्टिक का जहर, इन शहरों में खतरा

जर्नल ऑफ हैजर्डस मैटेरियल्स के मई अंक में प्रकाशित हुई रिपोर्ट के अनुसार गंगा की सतह से तलहटी तक माइक्रो प्लास्टिक का जहर मिला है। हरिद्वार, आगरा, प्रयागराज से पटना तक माइक्रो प्लास्टिक के अंश मिले।

गंगा की सतह से तलहटी तक फैला माइक्रो प्लास्टिक का जहर, इन शहरों में खतरा
Srishti Kunjसंजोग मिश्र,प्रयागराजTue, 11 Jun 2024 08:24 AM
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मोक्षदायिनी गंगा और यमुना में माइक्रो प्लास्टिक का जहर बढ़ता जा रहा है। चिंताजनक बात है कि प्लास्टिक के छोटे-बड़े टुकड़े और सूक्ष्म अंश न सिर्फ गंगा की सतह पर मिले हैं बल्कि जल के अंदर और तलहटी तक इससे प्रदूषित है। इससे इन नदियों के किनारे रहने वाली बड़ी आबादी के अलावा गंगा के मैदानी इलाकों के इकोसिस्टम पर भी खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता। राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान गोवा और राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद नई दिल्ली के वैज्ञानिकों की ओर से हरिद्वार, आगरा, प्रयागराज और पटना में किया गया अध्ययन जर्नल ऑफ हैजर्डस मैटेरियल्स के 5 मई 2024 के अंक में प्रकाशित हुआ है।

प्लास्टिक के छोटे-बड़े टुकड़े और सूक्ष्म अंश शुष्क मौसम की बजाय बारिश में अधिक पाए गए। दोनों नदियों के जल में मिले प्लास्टिक में सर्वाधिक टुकड़े 300 माइक्रोन से एक मिलीमीटर तक आकार के हैं। अधिकांश टुकड़े नीले और काले रंग के थे। सतही जल में बारिश के दौरान प्लास्टिक के सूक्ष्म कणों की मौजूदगी हरिद्वार में सर्वाधिक, जबकि पटना में सबसे कम पाई गई। वहीं शुष्क मौसम में आगरा में माइक्रोप्लास्टिक सबसे अधिक, जबकि पटना और हरिद्वार में कम था। यह अध्ययन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें यह समझने की कोशिश की गई है कि भारी वर्षा और जल की निकासी इन नदियों के भीतर प्लास्टिक की उपस्थिति को कैसे प्रभावित कर सकती हैं।

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समुद्र से तीन गुना अधिक प्लास्टिक कचरा नदियों में
आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन के एक अनुमान के मुताबिक दुनियाभर के समुद्रों में 30 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा पहुंच चुका है जबकि नदियों में इससे काफी बड़ी मात्रा (109 मिलियन टन) प्लास्टिक जमा हो चुकी है। माइक्रो प्लास्टिक प्रदूषण के लिहाज से गंगा विश्व की शीर्ष 20 नदियों में दूसरी सर्वाधिक प्रदूषित नदी है।

क्या होता है माइक्रोप्लास्टिक
प्लास्टिक के बड़े टुकड़े जब टूटकर छोटे-छोटे सूक्ष्य कणों में बदल जाते हैं, तो उन्हें माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है। इसके साथ ही कपड़ों और अन्य वस्तुओं के माइक्रोफाइबर के टूटने पर भी माइक्रोप्लास्टिक्स बनते हैं। आमतौर पर प्लास्टिक के एक माइक्रोमीटर से पांच मिलीमीटर के टुकड़े को माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है।

प्रदूषण कैसे कम होगा
- नाले-नालों की समय-समय पर सफाई
- लोगों को जागरूक करना, फाइन लगाना
- बड़े नालों को ढंकना ताकि लोग उसमें सीधे पॉलीथीन न डाल सकें