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Hindi News उत्तर प्रदेशमैकेनिकल इंजीनियर बना मास्टर माइंड, सउदी अरब में तैयार एप से 250 करोड़ की ठगी

मैकेनिकल इंजीनियर बना मास्टर माइंड, सउदी अरब में तैयार एप से 250 करोड़ की ठगी

मुरादाबाद में साइबर क्राइम थाना ने अहमदाबाद के दो शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार करके ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। शातिरों में एक मैकेनिकल इंजीनियर भी है। इन्होंने 250 करोड़ लूटे।

मैकेनिकल इंजीनियर बना मास्टर माइंड, सउदी अरब में तैयार एप से 250 करोड़ की ठगी
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Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,मुरादाबादThu, 20 Jun 2024 02:21 PM
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बुधवार को मुरादाबाद में साइबर क्राइम थाना ने अहमदाबाद के दो शातिर साइबर ठगों को गिरफ्तार करके ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। शातिरों में एक मैकेनिकल इंजीनियर भी है। जालसाजों ने चीन के आईपी एड्रेस से सउदी अरब में एप बनवाए और इसके जरिए रुपये दोगुना करने के नाम पर आम लोगों से निवेश कराके करीब ढाई सौ करोड़ रुपये हड़प लिए। गिरोह के सात सदस्यों को पुलिस पूर्व में ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। साइबर ठगों को पुलिस ने कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया।

बुधवार को पुलिस लाइन में एसपी ट्रैफिक सुभाष चंद्र गंगवार ने मीडिया को बताया कि गिरोह का सरगना पीयूष ठक्कर गरीबों को लालच देकर उनके प्रपत्र ले लेता था। वह इनके जरिए फर्जी तरीके से एमएसएमई योजना के तहत फर्म का पंजीकरण कराकर लोगों के खाते खुलवाता था। ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले अधिकतर खाते गुजरात में बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से खुलवाए गए। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की राशि मंगाने के लिए किया जाता था । खाताधारकों को भी बिना कुछ किए मोटी कमाई का लालच दिया गया। साइबर ठग प्रतिदिन इन खातों से विभिन्न बैंकों के जरिए 40 से 48 लाख रुपये निकाल रहे थे।

पुलिस के मुताबिक रामपुर की चेतना नामक की महिला ने साइबर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। चेतना के पास टेलीग्राम एप्लीकेशन पर आदर्श नाम के यूजर ने घर बैठे दो घंटे काम करने पर खेल-खेल में दो से 10 हजार रुपए प्रतिदिन कमाने का लालच देते हुए विज्ञापन भेजा। इस पर विश्वास करके महिला ने फ्री में एप्लीकेशन को चेक किया। जिसमें महिला को 698 रुपये का लाभ हो गया। इसके पश्चात ठगों ने दस हजार रुपये का टास्क दिया। जिसके रिवार्ड में 17 हजार 824 प्राप्त हुए। इसके बाद महिला ने 10 और 25 हजार का निवेश किया। इससे 47 हजार 945 रुपए मिले। इसके बाद महिला ने छह अक्टूबर 2023 से 10 अक्टूबर के बीच 15 लाख 26212 रुपए निवेश किए, लेकिन इस बार कुछ नहीं मिला। इसी शिकायत के आधार पर साइबर थाने की टीम ने जांच की तो ठगी करने वालों की परतें खुलती गईं।

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पता लगा कि गिरोह ने चीन से लेकर सऊदी अरब तक अपना नेटवर्क बना रखा है। आईपी एड्रेस तो चीन के थे लेकिन ऐप सऊदी अरब में बनाए गए थे। एप पर लोगों को गेम्स खेलकर रकम कमाने का लालच देकर फंसाया जाता था। साइबर थाने की टीम ने गुजरात के अहमदाबाद की जय जगन्नाथ कालोनी के रहने वाला नेटवर्क के मुखिया मैकेनिकल इंजीनियर सादरिया मिलन और अहमदाबाद के ही अर्जुन सिंह को गिरफ्तार किया है।

नीलेश और विपुल शाह हैं इस गिरोह के मास्टर माइंड
एसपी ट्रैफिक ने बताया कि विपुल शाह और नीलेश ने अपने गिरोह के सभी सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारी बांट रखी थी। मैकेनिकल इंजीनियर सादरिया मिलन गरीबों के पैन कार्ड, आधार कार्ड का इस्तेमाल करके एमएसएमई फर्म का लाइसेंस लेता था। इसके बाद एपीएमसी का लाइसेंस लेता था। इन लाइसेंसों की मदद से साइबर ठगों का बैंक से कैश निकालकर टीडीएस फ्री हो जाता था। इस तरह फर्जी फर्म के माध्यम से गैंग साइबर ठगी से बैंक खातों में जुटाई गई रकम को बिना टीडीएस कटे निकाल लेता था। गरीबों से जुटाए गए इन्हीं डाक्यूमेंट्स से गिरोह के सदस्य अपूव्र्, कैतल और मनोज बैंकों में जाकर बैंक खाते खुलवाते थे। उनसे चेक बुक, आरटीजीएस फार्म पर हस्ताक्षर करा लेते थे। इसका बेहद मामूली हिस्सा खाता धारकों को दे दिया जाता था।