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यूपी के इस शहर में अब नहीं है कोई कोरोना मरीज, 33 महीनों में हुई 2701 मरीजों की मौत

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए मंगलवार का दिन काफी राहत भरा साबित हुआ। करीब 33 माह बाद लखनऊ कोरोना वायरस के चंगुल से मुक्त हो गया। पीजीआई निवासी कोरोना संक्रमित की रिपोर्ट मंगलवार को नेगेटिव आई।

यूपी के इस शहर में अब नहीं है कोई कोरोना मरीज, 33 महीनों में हुई 2701 मरीजों की मौत
Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,लखनऊWed, 07 Dec 2022 08:02 AM

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए मंगलवार का दिन काफी राहत भरा साबित हुआ। करीब 33 माह बाद लखनऊ कोरोना वायरस के चंगुल से मुक्त हो गया। पीजीआई निवासी कोरोना संक्रमित की रिपोर्ट मंगलवार को नेगेटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने राहत की सांस ली है। 11 मार्च 2020 को लखनऊ में कोरोना वायरस ने दस्तक दी थी। गोमतीनगर निवासी महिला डॉक्टर संक्रमित मिली थी। मुंबई की यात्रा से लौटने के बाद जांच में उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव पाए जाने के बाद पूरे लखनऊ में हड़कंप मच गया था। 

अब तक 2701 मरीजों की मौत
लखनऊ में कोरोना वायरस अब तक 2701 लोगों की जान ले चुका है। इसमें सभी उम्र के मरीज शामिल रहे हैं। वायरस ने सर्वाधिक शिकार 25 से 45 साल के लोगों को बनाया, जबकि मृत्यु 50 साल से अधिक उम्र के लोगों की हुई। टीकाकरण के बाद वायरस का हमला कमजोर पड़ा और मृत्युदर में कमी आई।

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अब तक तीन लाख रिपोर्ट आ चुकी हैं पॉजिटिव
अब तक तीन लाख छह हजार 403 नमूनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ चुकी है। 74 लाख 59 हजार 915 नमूनों की जांच हो चुकी है। सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल ने बताया कि डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ ने कड़ी मेहनत की। कई बार डॉक्टर और कर्मचारी भी पॉजिटिव हुए। कठिन दौर में भी डॉक्टरों ने हिम्मत नहीं हारी। घर-घर जाकर कोरोना के संदिग्ध लोगों के नमूने एकत्र किए। दिन रात कर्मचारियों ने एम्बुलेंस से संक्रिय मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया।

81 अस्पतालों में हो रहा था इलाज
जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी योगेश रघुवंशी के मुताबिक कोविड कंट्रोल रूम का संचालन 24 घंटे चलता रहा। कंट्रोल रूम से ही मरीजों को अस्पताल आवंटित किए जा रहे थे। 81 से अधिक सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में कोविड मरीजों की भर्ती के इंतजाम किए गए थे। ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और आईसीयू की भी व्यवस्था की गई थी।

कोविड प्रबंधन बना मिसाल
डिप्टी सीएमओ डॉ. एपी सिंह ने बताया कि अप्रैल 2021 में कोरोना की दूसरी लहर ने लोगों को अधिक परेशान किया। हालात ये थे कि एक दिन में 6400 लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। इसके बावजूद दिन रात मेहनत कर डॉक्टर-कर्मचारियों ने मरीजों को जिंदगी देने में जुटे रहे। इसमें सरकारी के साथ प्राइवेट अस्पतालों ने भी अहम भूमिका अदा की। कोविड प्रबंधन ने सभी गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया। होम आइसोलेशन वाले मरीजों की देखभाल की। घर-घर जाकर दवाएं मुहैया कराईं।

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