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छोटी नदियों को सामाजिक आस्था से जोड़ेगा गंगा समग्र, प्रयाग महाकुंभ में होगा कार्यकर्ता महासंगम

गंगा समग्र राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तीन दिवसीय बैठक संपन्न हो गई। अब छोटी नदियों को सामाजिक आस्था से जोड़ेगा गंगा समग्र। अगले साल फरवरी में गोरखपुर में होगा राष्ट्रीय कार्यकर्ता संगम।

छोटी नदियों को सामाजिक आस्था से जोड़ेगा गंगा समग्र, प्रयाग महाकुंभ में होगा कार्यकर्ता महासंगम
Srishti Kunjहिन्दुस्तान टीम,लखनऊSun, 26 Nov 2023 06:51 AM
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गंगा समग्र समाज को स्थानीय नदियों से जोड़ने के लिए वृहद अभियान चलाएगा। इन नदियों के सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व को आमजन तक पहुंचाया जाएगा। इनसे जुड़ी तिथियों पर वृहद आयोजन किए जाएंगे। ताकि छोटी नदियां सामाजिक आस्था की केंद्र बन सकें। अगले साल कार्यकर्ता संगम गोरखपुर में फरवरी माह में होगा। आगामी महाकुंभ में प्रयागराज में कार्यकर्ता महासंगम का आयोजन करने का फैसला किया गया है। इसमें देशभर से 10 हजार कार्यकर्ता शामिल होंगे।

गंगा समग्र की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की तीन दिवसीय बैठक जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान परिसर में शनिवार को संपन्न हुई। बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल ने कहा कि गंगा और दूसरे जल तीर्थों को ठीक करने के लिए आवश्यक है कि वर्षा का ज्यादा से ज्यादा जल संग्रह किया जाए। इसके बिना नदियों को नया जीवन नहीं दिया जा सकता।

उन्होंने आह्वान किया कि गंगा के किनारे के गावों में तालाबों का सुदृढ़ तंत्र विकसित करना चाहिए। इससे पर्यावरण की स्थिति तो सुधरेगी ही, जैविक चक्र बेहतर होगा। अगर तालाब व्यवस्था सही हुई तो नहरों पर बोझ घटेगा। इससे गंगा का प्रवाह अविरल और निर्मल करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही जैविक कृषि को बढ़ाने और श्मशान घाटों को सुन्दर बनाने में गंगा समग्र की भूमिका को समझाया।

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कुंभ राष्ट्रीय एकता का पर्व
उन्होंने कुंभ को राष्ट्रीय एकता का पर्व बताया और कहा कि इसके आयोजन में गंगा समग्र को अपनी भूमिका तय करनी चाहिए। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 2025 में होने जा रहे कुंभ के सफल और सुफल आयोजन में संभावित कार्यक्रमों पर मंथन हुआ। तय हुआ कि सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ ही विभिन्न सेवा के कार्य किए जाएंगे। कुंभ के पहले देशभर में जागरण कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू की जाएगी।

राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष ने कहा कि गंगा समग्र की कार्य पद्धति त्रिस्तरीय है। इसमें रचनात्मक कार्य, सांगठनिक और जनजागरण शामिल हैं। उन्होंने गंगा और विभिन्न जल तीर्थों के प्रति समाज की भूमिका को समझाया। कहा कि विभिन्न जल तीर्थ आज बचे हैं तो इसका श्रेय समाज को है। वहीं सच यह भी है कि उनकी दारुण दशा का दोषी भी समाज ही है। इसलिए समाज  का जागरण आवश्यक है। उन्होंने महिलाओं और युवाओं को गंगा कार्य से जोड़ने के लिए गंगा वाहिनी और गंगा सेविका आयाम को और सुदृढ़ बनाने पर बल दिया। बैठक की अध्यक्षता गंगा समग्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने की। राष्ट्रीय महामंत्री डा. आशीष गौतम, उपाध्यक्ष विश्वनाथ खेमका, कोषाध्यक्ष ललित कपूर, राष्ट्रीय मंत्री रामाशंकर सिन्हा, अवधेश कुमार आदि उपस्थित रहे।

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